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Basti News: संभलकर लगाएं फटकार, छोटी-छोटी बातों पर घर छोड़ रहे लाडले
Fri, 29 Sep 2023 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 29 Sep 2023 01:01 AM IST
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- 26 दिनों में पांच बच्चों ने फटकार व पिटाई से नाराज होकर छोड़ा घर
- शिक्षक की पिटाई से कोई भागा, किसी को घूमने के लिए लगी थी फटकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अपने लाडलों को संभलकर फटकार लगायें। छोटी-छोटी बातों पर बच्चे घर छोड़कर भाग रहे हैं। इस महीने के 26 दिनों में पांच किशोरों ने फटकार व पिटाई से नाराज होकर घर छोड़ दिया। हरकतों पर नजर रखनी व भविष्य को लेकर लगाई गई डांट-फटकार परिजनों को भारी पड़ रही है। नाराज बच्चों की तलाश में दर ब दर भटना पड़ रहा है। पुलिस भी ऐसे बच्चों की तलाश में हलाकान हो रही है। बच्चों के इस हरकतों से अभिभावक, शिक्षक, मनोविज्ञानी व समाजशास्त्री भी हैरान हैं। पिछले आठ महीने में 22 बच्चों को जिले की पुलिस तलाशकर परिजनों को सुपुर्द किया। कुछ बच्चे चार-छह दिन में खुद वापस चले आये। वहीं, दो बच्चे दिल्ली भाग गये। जिनको वापस लाने के लिए परिवार गया है।
जानकर बताते हैं कि बच्चों को सीधे फटकार लगाने व पिटाई करने के बजाए उनसे खुलकर बात करने की जरूरत है। अभिभावकों को बच्चों के मन की बात सुननी चाहिए। उनसे दोस्ताना रिश्ते रखने की आवश्यकता है। समाजशास्त्री डाॅ. रघुवर पांडेय बताते हैं कि पांच वर्ष की उम्र के बाद बच्चे के व्यवहार और मन:स्थिति में परिवर्तन होने लगता है। इस दौरान स्कूल में उनका नए दोस्तों से मेलजोल बढ़ता है। उनके व्यवहार और गतिविधियों में भी बदलाव दिखता है। इन पर अभिभावकों की रोकटोक बच्चों को बंदिश सी लगने लगती हैं। टोकने से वह चिढ़चिढ़े हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में उनसे दूरी बनाने के बजाए खुलकर बातचीत करना और दोस्ताना रवैया ही ठीक है। उनसे बात करने पर ही मन:स्थिति को समझा जा सकता है। उसी अनुसार अपना व्यवहार किया जाना जरूरी है।
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केस एक
चाचा ने थप्पड़ मारा तो छोड़ दिया घर
- शहर के एक व्यवसायी के 13 वर्षीय बेटे को उसके चाचा अक्सर टोकते रहते थे। खेल, पढ़ाई, मित्रों संग घूमने, कपड़े खरीदने जैसी बातों पर वह टीका-टिप्पणी करते थे। यह बात बच्चे को नागवार लगता था, मगर माता-पिता से संकोच वश नहीं बोल पाता था। एक प्रदर्शनी से घूमकर आने के बाद चाचा ने उसे एक थप्पड़ मार दिया। यह बात उसे नागवार गुजरी। वह चुपचाप घर से निकल गया। दो दिन ढूंढने के बाद लखनऊ में मिला।
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केस दो
पढ़ने के लिए मां ने डांटा तो भाग गया
- शहर के एक मुहल्ले के निवासी व्यवसायी की पुरानी बस्ती थानाक्षेत्र के अंतर्गत फोरलेन पर धर्मकांटा है। 26 जुलाई काे उनके 10 वर्षीय बेटे को पढ़ाई के लिए मां ने डांट दिया। जिससे नाराज होकर बालक घर से स्कूल जाने के लिए निकला मगर लौटकर नहीं आया। इस संबंध में थाने में केस दर्ज कराया गया। 10 दिन बाद सोनहा थाने की पुलिस को वह बालक भानपुर में भटकते मिला।
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केस तीन
बिना बताये घर से भागा
- मुण्डेरवा के ओड़वारा से 12 वर्षीय बालक गायब होने का मामला पुलिस ने चार दिन पहले दर्ज किया है। उसके मामा ने मुंडेरवा थाने में तहरीर दी। जिसमें बताया कि उसके पिता ने पढ़ाई के लिए बेटे को डांट दिया था। इस पर वह बिना बताए घर से कहीं चला गया। पुलिस गुमशुदगी दर्ज कर गुमशुदा बच्चे की तलाश शुरु कर दी है।
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केस चार
शिक्षक के थप्पड़ मारने पर भाग गया दिल्ली
- किसान इंटर कालेज परशुरामपुर में कक्षा नौ के छात्र आजाद सिंह की शिकायत मिलने पर एक शिक्षक ने बच्चों के सामने थप्पड़ मार दिया। जिससे नाराज होकर वह 23 सितम्बर को अपने एक दोस्त के हाथ एक चिट्ठी लिखकर पिता के पास भेजा कि वह मरने जा रहा है। इसके बाद वह लापता हो गया। बृहस्पतिवार को पता चला कि वह दिल्ली पहुंच गया है। लाल किला के पास दिल्ली पुलिस ने उसे संदिग्ध अवस्था में घूमते हुए पकड़ा। परिवार के लोग उसे लाने गए हुए हैं।
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केस पांच-
स्कूल से ही भाग गया दिल्ली
- दुबौलिया के ऊंजी गांव का 10 वीं का छात्र मंगलवार सुबह करीब 9 बजे अपनी साइकिल व स्कूल बैग के साथ स्कूल ड्रेस में अपने विद्यालय गया। देर शाम तक वापस नहीं आया। इस पर परिवार के लोग तलाश करने लगे। पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज करके खोजबीन करने लगी। 24 घंटे तक जगह-जगह तलाश करने के बाद पता चला कि वह भागकर दिल्ली रहने वाले अपने बड़े पिता के पास पहुंच गया है।
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सजा और इनाम दोनों जरूरी
- मनोविज्ञान के सेवानिवृत्त प्रवक्ता कृष्ण बिहारी उपाध्याय का कहना है कि सजा और इनाम की तरकीब काफी कारगर है। घर में ऐसा माहौल तैयार करें जिसमें अच्छे बर्ताव के लिए इनाम और गलत व्यवहार के लिए सजा की गुंजाइश हो। सजा सिर्फ शारीरिक यातना नहीं, बल्कि उनकी छूट व सुविधा में कटौती करना भी है।
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बच्चों का घर छोड़ना चिंता का विषय
- आईजी आरके भारद्वाज कहते हैं कि बच्चों, किशोरों के नाराज होकर घर छोड़कर भागने की घटनाएं चिंता का विषय है। इसमें पुलिस से ज्यादा परिवार वालों की जिम्मेदारी होती है। बच्चों से संवादहीनता की स्थिति नहीं बनने देना चाहिए। उनसे लगातार बातचीत ही ऐसी स्थिति से बचने का उपाय है।
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- शिक्षक की पिटाई से कोई भागा, किसी को घूमने के लिए लगी थी फटकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अपने लाडलों को संभलकर फटकार लगायें। छोटी-छोटी बातों पर बच्चे घर छोड़कर भाग रहे हैं। इस महीने के 26 दिनों में पांच किशोरों ने फटकार व पिटाई से नाराज होकर घर छोड़ दिया। हरकतों पर नजर रखनी व भविष्य को लेकर लगाई गई डांट-फटकार परिजनों को भारी पड़ रही है। नाराज बच्चों की तलाश में दर ब दर भटना पड़ रहा है। पुलिस भी ऐसे बच्चों की तलाश में हलाकान हो रही है। बच्चों के इस हरकतों से अभिभावक, शिक्षक, मनोविज्ञानी व समाजशास्त्री भी हैरान हैं। पिछले आठ महीने में 22 बच्चों को जिले की पुलिस तलाशकर परिजनों को सुपुर्द किया। कुछ बच्चे चार-छह दिन में खुद वापस चले आये। वहीं, दो बच्चे दिल्ली भाग गये। जिनको वापस लाने के लिए परिवार गया है।
जानकर बताते हैं कि बच्चों को सीधे फटकार लगाने व पिटाई करने के बजाए उनसे खुलकर बात करने की जरूरत है। अभिभावकों को बच्चों के मन की बात सुननी चाहिए। उनसे दोस्ताना रिश्ते रखने की आवश्यकता है। समाजशास्त्री डाॅ. रघुवर पांडेय बताते हैं कि पांच वर्ष की उम्र के बाद बच्चे के व्यवहार और मन:स्थिति में परिवर्तन होने लगता है। इस दौरान स्कूल में उनका नए दोस्तों से मेलजोल बढ़ता है। उनके व्यवहार और गतिविधियों में भी बदलाव दिखता है। इन पर अभिभावकों की रोकटोक बच्चों को बंदिश सी लगने लगती हैं। टोकने से वह चिढ़चिढ़े हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में उनसे दूरी बनाने के बजाए खुलकर बातचीत करना और दोस्ताना रवैया ही ठीक है। उनसे बात करने पर ही मन:स्थिति को समझा जा सकता है। उसी अनुसार अपना व्यवहार किया जाना जरूरी है।
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केस एक
चाचा ने थप्पड़ मारा तो छोड़ दिया घर
- शहर के एक व्यवसायी के 13 वर्षीय बेटे को उसके चाचा अक्सर टोकते रहते थे। खेल, पढ़ाई, मित्रों संग घूमने, कपड़े खरीदने जैसी बातों पर वह टीका-टिप्पणी करते थे। यह बात बच्चे को नागवार लगता था, मगर माता-पिता से संकोच वश नहीं बोल पाता था। एक प्रदर्शनी से घूमकर आने के बाद चाचा ने उसे एक थप्पड़ मार दिया। यह बात उसे नागवार गुजरी। वह चुपचाप घर से निकल गया। दो दिन ढूंढने के बाद लखनऊ में मिला।
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केस दो
पढ़ने के लिए मां ने डांटा तो भाग गया
- शहर के एक मुहल्ले के निवासी व्यवसायी की पुरानी बस्ती थानाक्षेत्र के अंतर्गत फोरलेन पर धर्मकांटा है। 26 जुलाई काे उनके 10 वर्षीय बेटे को पढ़ाई के लिए मां ने डांट दिया। जिससे नाराज होकर बालक घर से स्कूल जाने के लिए निकला मगर लौटकर नहीं आया। इस संबंध में थाने में केस दर्ज कराया गया। 10 दिन बाद सोनहा थाने की पुलिस को वह बालक भानपुर में भटकते मिला।
केस तीन
बिना बताये घर से भागा
- मुण्डेरवा के ओड़वारा से 12 वर्षीय बालक गायब होने का मामला पुलिस ने चार दिन पहले दर्ज किया है। उसके मामा ने मुंडेरवा थाने में तहरीर दी। जिसमें बताया कि उसके पिता ने पढ़ाई के लिए बेटे को डांट दिया था। इस पर वह बिना बताए घर से कहीं चला गया। पुलिस गुमशुदगी दर्ज कर गुमशुदा बच्चे की तलाश शुरु कर दी है।
केस चार
शिक्षक के थप्पड़ मारने पर भाग गया दिल्ली
- किसान इंटर कालेज परशुरामपुर में कक्षा नौ के छात्र आजाद सिंह की शिकायत मिलने पर एक शिक्षक ने बच्चों के सामने थप्पड़ मार दिया। जिससे नाराज होकर वह 23 सितम्बर को अपने एक दोस्त के हाथ एक चिट्ठी लिखकर पिता के पास भेजा कि वह मरने जा रहा है। इसके बाद वह लापता हो गया। बृहस्पतिवार को पता चला कि वह दिल्ली पहुंच गया है। लाल किला के पास दिल्ली पुलिस ने उसे संदिग्ध अवस्था में घूमते हुए पकड़ा। परिवार के लोग उसे लाने गए हुए हैं।
केस पांच-
स्कूल से ही भाग गया दिल्ली
- दुबौलिया के ऊंजी गांव का 10 वीं का छात्र मंगलवार सुबह करीब 9 बजे अपनी साइकिल व स्कूल बैग के साथ स्कूल ड्रेस में अपने विद्यालय गया। देर शाम तक वापस नहीं आया। इस पर परिवार के लोग तलाश करने लगे। पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज करके खोजबीन करने लगी। 24 घंटे तक जगह-जगह तलाश करने के बाद पता चला कि वह भागकर दिल्ली रहने वाले अपने बड़े पिता के पास पहुंच गया है।
सजा और इनाम दोनों जरूरी
- मनोविज्ञान के सेवानिवृत्त प्रवक्ता कृष्ण बिहारी उपाध्याय का कहना है कि सजा और इनाम की तरकीब काफी कारगर है। घर में ऐसा माहौल तैयार करें जिसमें अच्छे बर्ताव के लिए इनाम और गलत व्यवहार के लिए सजा की गुंजाइश हो। सजा सिर्फ शारीरिक यातना नहीं, बल्कि उनकी छूट व सुविधा में कटौती करना भी है।
बच्चों का घर छोड़ना चिंता का विषय
- आईजी आरके भारद्वाज कहते हैं कि बच्चों, किशोरों के नाराज होकर घर छोड़कर भागने की घटनाएं चिंता का विषय है। इसमें पुलिस से ज्यादा परिवार वालों की जिम्मेदारी होती है। बच्चों से संवादहीनता की स्थिति नहीं बनने देना चाहिए। उनसे लगातार बातचीत ही ऐसी स्थिति से बचने का उपाय है।