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Basti News: बांध निर्माण कराए बिना कराया भुगतान, प्रधान के अधिकार सीज
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बस्ती। कप्तानगंज ब्लॉक क्षेत्र के पटखौली राजा गांव में विकास कार्यों में अनियमितता पाए जाने पर डीएम ने ग्राम प्रधान का वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिया है। ग्राम पंचायत के कार्याें के संपादन के लिए ग्राम पंचायत सदस्यों की तीन सदस्यीय टीम गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कप्तानगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत सेमरा गांव के विजय कुमार यादव ने शपथ पत्र देकर आरोप लगाया था कि गांव की प्रधान व सचिव ने मिलकर विकास कार्यों में अनियमितता की है। पूर्व में दुबौली सरहद तक बंधे के निर्माण के नाम पर रकम निकाली गई। करचोलिया सरहद से शत्रुघ्न के बाग तक बांध निर्माण दिखाया गया। उप कृषि निदेशक, जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां और पंचायत लेखा परीक्षा व एई आरईडी ने जांच कर रिपोर्ट दी। जांच में पता चला कि ग्राम प्रधान व सचिव ने बांध निर्माण दोबारा कराया जाना दिखाकर भुगतान कराया। मजदूरों के बजाय प्रधान ने एक लाख 69 हजार 324 रुपये अपने व्यक्तिगत खाते में भुगतान करा लिया। इसकी पुष्टि खुद प्रधान ने भी की थी। जांच रिपोर्ट में प्रधान और सचिव दोनों को दोषी बताया गया है। बीती 25 फरवरी को ग्राम प्रधान को नोटिस दिया गया। 12 मार्च को सचिव उदितांशु शुक्ल व तकनीकी सहायक वीरेंद्र चौरसिया को भी नोटिस जारी किया गया। तीनों ने कोई जवाब न देकर संयुक्त रूप से एक प्रार्थना पत्र भेजा।
शिकायतकर्ता विजय ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की। 18 मार्च को सुनवाई कर हाईकोर्ट ने भी जांच कमेटी को कार्रवाई का निर्देश दिया। वहीं, जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रधान मनोज कुमार दूबे के दोषी पाए जाने पर डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों को सीज कर दिया है। गांव में विकास कार्यों को सुचारु रूप से चालू रखने के लिए ग्राम पंचायत सदस्यों की तीन सदस्य समिति का गठन कराने के निर्देश दिए गए हैं। डीसी मनरेगा संजय शर्मा को अंतिम जांच अधिकारी नामित किया गया है।
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कप्तानगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत सेमरा गांव के विजय कुमार यादव ने शपथ पत्र देकर आरोप लगाया था कि गांव की प्रधान व सचिव ने मिलकर विकास कार्यों में अनियमितता की है। पूर्व में दुबौली सरहद तक बंधे के निर्माण के नाम पर रकम निकाली गई। करचोलिया सरहद से शत्रुघ्न के बाग तक बांध निर्माण दिखाया गया। उप कृषि निदेशक, जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां और पंचायत लेखा परीक्षा व एई आरईडी ने जांच कर रिपोर्ट दी। जांच में पता चला कि ग्राम प्रधान व सचिव ने बांध निर्माण दोबारा कराया जाना दिखाकर भुगतान कराया। मजदूरों के बजाय प्रधान ने एक लाख 69 हजार 324 रुपये अपने व्यक्तिगत खाते में भुगतान करा लिया। इसकी पुष्टि खुद प्रधान ने भी की थी। जांच रिपोर्ट में प्रधान और सचिव दोनों को दोषी बताया गया है। बीती 25 फरवरी को ग्राम प्रधान को नोटिस दिया गया। 12 मार्च को सचिव उदितांशु शुक्ल व तकनीकी सहायक वीरेंद्र चौरसिया को भी नोटिस जारी किया गया। तीनों ने कोई जवाब न देकर संयुक्त रूप से एक प्रार्थना पत्र भेजा।
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शिकायतकर्ता विजय ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की। 18 मार्च को सुनवाई कर हाईकोर्ट ने भी जांच कमेटी को कार्रवाई का निर्देश दिया। वहीं, जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रधान मनोज कुमार दूबे के दोषी पाए जाने पर डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों को सीज कर दिया है। गांव में विकास कार्यों को सुचारु रूप से चालू रखने के लिए ग्राम पंचायत सदस्यों की तीन सदस्य समिति का गठन कराने के निर्देश दिए गए हैं। डीसी मनरेगा संजय शर्मा को अंतिम जांच अधिकारी नामित किया गया है।
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