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बस्ती आदर्श रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं नदारद
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पूछताछ काउंटर के समीप बंद पड़ी स्क्रीन।
- फोटो : BASTI
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बस्ती आदर्श रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं नदारद
फोटो
- बिजली कटते ही बंद हो जाती हैं स्वचालित सीढ़ियां
- टिकट वेडिंग मशीनें भी ठप, सूचना वाली स्क्रीन खराब-प्लेट फार्म तीन के शौचालयों में बंद हैं ताले
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जिले के रेलवे स्टेशन को भले ही आदर्श स्टेशन का दर्जा मिल गया हो लेकिन यहां से सुविधाएं नदारद हैं। टिकट के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। इस स्टेशन पर चार टिकट बेडिंग मशीनें लगी हैं। शुरुआती दिनों में यह मशीनें कारगर थीं। लेकिन अब शोपीस बनकर रह गई है।
ट्रनों की आवाजाही के बारे में पता करना मुश्किल है। पूछताछ काउंटर के पास लगी स्क्रीन खराब पड़ी है। स्टेशन पर विद्युत व्यवस्था रामभरोसे है। बिजली कटते ही जेनरेटर तो चलता है लेकिन आधे स्टेशन की लाइटें गुल रहती हैं।
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बंद हो जाती हैं स्वचालित सीढ़ियां
- स्टेशन पर 367 लाख की लागत से स्वचालित सीढ़ी लगी है। कंक्रीट रोड भी बनवाए गए हैं। लेकिन अब बिजली कटते ही सीढ़ियां बंद हो जाती है। कर्मचारियों से पता चला कि जेनरेट कम लोड का है। इस वजह से बिना लाइन के इस सीढ़ी का चल पाना संभव नहीं है।
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प्लेटफार्म तीन के शौचालयों पर लटका ताला
- यात्रियों के लिए प्लेट फार्म तीन पर बने शौचालयों पर ताले लगे हैं। इन शौचालयों की दीवारों पर लिखा है कि इसकी चाभी स्टेशन मास्टर के पास है। अब आप ही सोचिए कि यदि किसी को इमर्जेंसी में इसकी आवश्कता पड़ी तो वह पहले स्टेशन मास्टर से संपर्क करेगा। कारण कि स्टेशन मास्टर का ऑफिस प्लेट फार्म एक पर है। और उपरगामी सेतु से होते हुए इन तक पहुंचने में तीन मिनट तो लग ही जाएंगे।
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खामियों को दूर किया जाएगा : स्टेशन अधीक्षक
- बस्ती रेलवे स्टेशन के अधीक्षक विश्वंभर चौधरी का कहना है कि कमी को दूर किया जाएगा। स्वचालित सीढ़ियां बराबर चलती हैं। टिकट बेडिंग मशीन भी काम कर रही है।
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- बिजली कटते ही बंद हो जाती हैं स्वचालित सीढ़ियां
- टिकट वेडिंग मशीनें भी ठप, सूचना वाली स्क्रीन खराब-प्लेट फार्म तीन के शौचालयों में बंद हैं ताले
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जिले के रेलवे स्टेशन को भले ही आदर्श स्टेशन का दर्जा मिल गया हो लेकिन यहां से सुविधाएं नदारद हैं। टिकट के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। इस स्टेशन पर चार टिकट बेडिंग मशीनें लगी हैं। शुरुआती दिनों में यह मशीनें कारगर थीं। लेकिन अब शोपीस बनकर रह गई है।
ट्रनों की आवाजाही के बारे में पता करना मुश्किल है। पूछताछ काउंटर के पास लगी स्क्रीन खराब पड़ी है। स्टेशन पर विद्युत व्यवस्था रामभरोसे है। बिजली कटते ही जेनरेटर तो चलता है लेकिन आधे स्टेशन की लाइटें गुल रहती हैं।
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बंद हो जाती हैं स्वचालित सीढ़ियां
- स्टेशन पर 367 लाख की लागत से स्वचालित सीढ़ी लगी है। कंक्रीट रोड भी बनवाए गए हैं। लेकिन अब बिजली कटते ही सीढ़ियां बंद हो जाती है। कर्मचारियों से पता चला कि जेनरेट कम लोड का है। इस वजह से बिना लाइन के इस सीढ़ी का चल पाना संभव नहीं है।
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प्लेटफार्म तीन के शौचालयों पर लटका ताला
- यात्रियों के लिए प्लेट फार्म तीन पर बने शौचालयों पर ताले लगे हैं। इन शौचालयों की दीवारों पर लिखा है कि इसकी चाभी स्टेशन मास्टर के पास है। अब आप ही सोचिए कि यदि किसी को इमर्जेंसी में इसकी आवश्कता पड़ी तो वह पहले स्टेशन मास्टर से संपर्क करेगा। कारण कि स्टेशन मास्टर का ऑफिस प्लेट फार्म एक पर है। और उपरगामी सेतु से होते हुए इन तक पहुंचने में तीन मिनट तो लग ही जाएंगे।
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खामियों को दूर किया जाएगा : स्टेशन अधीक्षक
- बस्ती रेलवे स्टेशन के अधीक्षक विश्वंभर चौधरी का कहना है कि कमी को दूर किया जाएगा। स्वचालित सीढ़ियां बराबर चलती हैं। टिकट बेडिंग मशीन भी काम कर रही है।