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कच्चे धागे में बांधा स्नेह का अटूट बंधन
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भाई को राखी बांधती बहन।
- फोटो : BASTI
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कच्चे धागे में बांधा स्नेह का अटूट बंधन
बस्ती। विकराल रूप अख्तियार कर रही कोरोना महामारी के साए में सोमवार को बहनों ने भाई की कलाई में कलावा-रक्षा सूत्र बांधा। भाई कीलंबी आयु के साथ ही कोरोना महामारी से सुरक्षित रहने की कामना लिए बहनों ने अपनी रक्षा का वचन लिया। यथासंभव द्रव्य, कपड़े, ज्वेलरी आदि उपहार का आदान-प्रदान हुआ।
सबसे ज्यादा उल्लास बच्चों में देखा गया। रंग-बिरंगी राखियों से सजी कलाई और उनके चेहरों पर सुकून देने वाली हंसी-खुशी देखी गई। वैसे तो सुबह साढ़े नौ बजे तक भद्रा की वजह से भाई को बहनों को इंतजार करना पड़ा। इसके बाद पूरे दिन माहौल भाई बहनों के नाम रहा। शहर से लेकर गांव तक त्योहार का उल्लास देखा गया। पूरे दिन सड़कों पर भाई-बहनों का आवागमन होता रहा। इस बीच कोरोना से बचाव के उपाय और सावधानी को लेकर लोग बेफिक्र नजर आए। पुलिस प्रशासन की मौजूदगी तो रही, लेकिन उनकी तरफ से कोई रोक-टोक नहीं की गई। पुलिस सहित अन्य सरकारी महकमों में यहां सोमवार की छुट्टी नहीं थी, वहां महिला कर्मियों ने पुरुषों को राखी बांधी। थानों में महिला आरक्षियों उपनिरीक्षकों ने भी त्योहार को पारंपरिक रूप देने में भूमिका निभाई।
15 दिन तक नहीं खोलनी चाहिए राखी
मान्यता है कि राखी बंधने के कम से कम एक पक्ष तक इसे नहीं खोलना चाहिए। अगर किसी कारणवश राखी खुल जाती है तो उसे बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए या मिट्टी में भी दबा सकते हैं। राखी अधिक से अधिक समय तक अपने कलाई पर रखनी चाहिए।
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बस्ती। विकराल रूप अख्तियार कर रही कोरोना महामारी के साए में सोमवार को बहनों ने भाई की कलाई में कलावा-रक्षा सूत्र बांधा। भाई कीलंबी आयु के साथ ही कोरोना महामारी से सुरक्षित रहने की कामना लिए बहनों ने अपनी रक्षा का वचन लिया। यथासंभव द्रव्य, कपड़े, ज्वेलरी आदि उपहार का आदान-प्रदान हुआ।
सबसे ज्यादा उल्लास बच्चों में देखा गया। रंग-बिरंगी राखियों से सजी कलाई और उनके चेहरों पर सुकून देने वाली हंसी-खुशी देखी गई। वैसे तो सुबह साढ़े नौ बजे तक भद्रा की वजह से भाई को बहनों को इंतजार करना पड़ा। इसके बाद पूरे दिन माहौल भाई बहनों के नाम रहा। शहर से लेकर गांव तक त्योहार का उल्लास देखा गया। पूरे दिन सड़कों पर भाई-बहनों का आवागमन होता रहा। इस बीच कोरोना से बचाव के उपाय और सावधानी को लेकर लोग बेफिक्र नजर आए। पुलिस प्रशासन की मौजूदगी तो रही, लेकिन उनकी तरफ से कोई रोक-टोक नहीं की गई। पुलिस सहित अन्य सरकारी महकमों में यहां सोमवार की छुट्टी नहीं थी, वहां महिला कर्मियों ने पुरुषों को राखी बांधी। थानों में महिला आरक्षियों उपनिरीक्षकों ने भी त्योहार को पारंपरिक रूप देने में भूमिका निभाई।
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15 दिन तक नहीं खोलनी चाहिए राखी
मान्यता है कि राखी बंधने के कम से कम एक पक्ष तक इसे नहीं खोलना चाहिए। अगर किसी कारणवश राखी खुल जाती है तो उसे बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए या मिट्टी में भी दबा सकते हैं। राखी अधिक से अधिक समय तक अपने कलाई पर रखनी चाहिए।
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