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स्टेडियम में दो साल से बैडमिंटन खेल का नहीं है प्रशिक्षक
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स्टेडियम में दो साल से बैडमिंटन खेल प्रशिक्षक नहीं
बस्ती। अमर शहीद सत्यवान सिंह क्षेत्रीय क्रीड़ा स्टेडियम में करीब दो साल से बैडमिंटन खेल प्रशिक्षक के न होने से खिलाड़ियों को खेल की बारीकियां नहीं मिल पा रही हैं। एक ओर जहां बैडमिंटन प्रशिक्षक की कमी से खिलाड़ियों को बैडमिंटन खेल की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं हो पा रही है वहीं, समुचित प्रशिक्षण के अभाव में खिलाड़ियों की प्रतिभाएं निखर नहीं पा रही हैं।
सरकार युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। न्याय पंचायत स्तर से लेकर जिला और मंडल स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती रही हैं ताकि युवाओं के अंदर खेलों को लेकर दिलचस्पी पैदा हो। लेकिन, शासन प्रशासन की ओर से सुविधाओं और संसाधनों को लेकर किया गया कोई खास प्रयास जमीनी स्तर पर नहीं दिख रहा है। इसी का नतीजा है कि लॉकडाउन के बाद से स्टेडियम में खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई।
क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल का प्रशिक्षक न होना सरकार के मंसूबे पर पानी फेरने जैसा है। स्टेडियम में 1986 में बैडमिंटन कोर्ट की स्थापना की गई। वर्तमान में इस खेल में करीब 20 खिलाड़ियों ने पंजीकरण करा रखा है। कभी-कभी जूनियर खिलाड़ियों को वरिष्ठ खिलाड़ियों से अभ्यास में मदद मिल जाती है। लेकिन, प्रशिक्षक के अभाव में प्रशिक्षण शिविर का संचालन नहीं हो पा रहा है।
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खेल निदेशालय को कराया जा चुका है अवगत
बैडमिंटन खेल के प्रशिक्षक की नियुक्ति की मांग खेल निदेशालय से की गई है। जल्द ही प्रशिक्षक नियुक्त करने का आश्वासन मिला है।
-संजय शर्मा, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
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बस्ती। अमर शहीद सत्यवान सिंह क्षेत्रीय क्रीड़ा स्टेडियम में करीब दो साल से बैडमिंटन खेल प्रशिक्षक के न होने से खिलाड़ियों को खेल की बारीकियां नहीं मिल पा रही हैं। एक ओर जहां बैडमिंटन प्रशिक्षक की कमी से खिलाड़ियों को बैडमिंटन खेल की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं हो पा रही है वहीं, समुचित प्रशिक्षण के अभाव में खिलाड़ियों की प्रतिभाएं निखर नहीं पा रही हैं।
सरकार युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। न्याय पंचायत स्तर से लेकर जिला और मंडल स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती रही हैं ताकि युवाओं के अंदर खेलों को लेकर दिलचस्पी पैदा हो। लेकिन, शासन प्रशासन की ओर से सुविधाओं और संसाधनों को लेकर किया गया कोई खास प्रयास जमीनी स्तर पर नहीं दिख रहा है। इसी का नतीजा है कि लॉकडाउन के बाद से स्टेडियम में खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई।
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क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल का प्रशिक्षक न होना सरकार के मंसूबे पर पानी फेरने जैसा है। स्टेडियम में 1986 में बैडमिंटन कोर्ट की स्थापना की गई। वर्तमान में इस खेल में करीब 20 खिलाड़ियों ने पंजीकरण करा रखा है। कभी-कभी जूनियर खिलाड़ियों को वरिष्ठ खिलाड़ियों से अभ्यास में मदद मिल जाती है। लेकिन, प्रशिक्षक के अभाव में प्रशिक्षण शिविर का संचालन नहीं हो पा रहा है।
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खेल निदेशालय को कराया जा चुका है अवगत
बैडमिंटन खेल के प्रशिक्षक की नियुक्ति की मांग खेल निदेशालय से की गई है। जल्द ही प्रशिक्षक नियुक्त करने का आश्वासन मिला है।
-संजय शर्मा, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी