{"_id":"62b5f11c3e2b7275c91c101f","slug":"asha-searched-five-desice-basti-news-gkp4415031108","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच तरह की बीमारियों के बारे में पता लगाएंगी आशा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच तरह की बीमारियों के बारे में पता लगाएंगी आशा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच तरह की बीमारियों के बारे में पता लगाएंगी आशा
- 16 जुलाई से शुरू होगा दस्तक अभियान, तैनात की गईं 2282 आशा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दस्तक अभियान का आगाज 16 जुलाई से होगा। 31 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान के दौरान आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर पांच तरह की बीमारियों का पता लगाएंगी। इसी के साथ अगर किसी के घर के पास मच्छर पनप रहे हैं तो उसकी भी रिपोर्ट ब्लॉक पर करेंगी। संबंधित विभाग को इसकी सूचना देकर उसका निवारण कराया जाएगा।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. आईए अंसारी ने बताया कि पहली जुलाई से विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान के साथ ही 16 जुलाई से दस्तक कार्यक्रम भी शुरू होगा। अभियान में 2282 आशा कार्यकर्ता व 2600 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को लगाया गया है। सुपरविजन करने के लिए एएनएम, हेल्थ सुपरवाइजर, बेसिक हेल्थ वर्कर्स को भी जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने बताया कि आशा घर-घर जाकर परिवार के लोगों से मलेरिया, टीबी, सर्दी, जुकाम व बुखार (आईएलआई व सारी) से संबंधित सवाल पूछेंगी। इसी के साथ वह यह भी जानकारी लेंगी की घर में कोई अति कुपोषित बच्चा तो नहीं है। अगर किसी में बीमारी के लक्षण मिलते हैं या कोई अति कुपोषित बच्चा मिलता है तो इसकी सूचना वह संबंधित ब्लॉक के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को देंगी। संबंधित विभाग सूचना के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। उन्होंने बताया कि अगर किसी घर के पास जलजमाव है तथा वहां लार्वा पैदा हो रहा है तो इसकी भी सूचना आशा देंगी। सूचना के बाद मलेरिया विभाग वहां निरीक्षण कर जल निकासी, दवा के छिड़काव आदि की व्यवस्था संबंधित से कराएगा। अभियान की जिला स्तर पर प्रतिदिन समीक्षा कर कमियों को दूर किया जाएगा। अगर किसी को बुखार के लक्षण हों तो आशा कार्यकर्ता से छिपाए नहीं, बल्कि खुलकर बताएं। बुखार का समय से पता चल जाने से जांच कर सही दिशा में इलाज हो सकता है।
----------------
कारगर रहा है दस्तक अभियान
डीएमओ ने बताया कि दस्तक अभियान काफी कारगर रहा है। पिछले साल एक्युट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस)/ जापानीज इंसेफेलाइटिस (जेई) के कुल 59 मामले सामने आए थे, जबकि उससे पहले वर्ष 2020 में 79 मामले रिकार्ड किए गए थे। वर्ष 2019 में 113 मामले सामने आए थे। उन्होंने बताया कि इस अभियान का परिणाम है कि अब एईएस/जेई में मौत के मामले सामने नहीं आ रहे हैं। आम तौर से लोग इनके प्रति जागरूक है तथा किसी में लक्षण दिखते ही तुरंत 108 एंबुलेंस से मरीज को अस्पताल में भर्ती करा रहे हैं। ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों से लेकर जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में एईएस/जेई के इलाज की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है। समय से इलाज शुरू होने पर मौत की आशंका नहीं रहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
- 16 जुलाई से शुरू होगा दस्तक अभियान, तैनात की गईं 2282 आशा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दस्तक अभियान का आगाज 16 जुलाई से होगा। 31 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान के दौरान आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर पांच तरह की बीमारियों का पता लगाएंगी। इसी के साथ अगर किसी के घर के पास मच्छर पनप रहे हैं तो उसकी भी रिपोर्ट ब्लॉक पर करेंगी। संबंधित विभाग को इसकी सूचना देकर उसका निवारण कराया जाएगा।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. आईए अंसारी ने बताया कि पहली जुलाई से विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान के साथ ही 16 जुलाई से दस्तक कार्यक्रम भी शुरू होगा। अभियान में 2282 आशा कार्यकर्ता व 2600 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को लगाया गया है। सुपरविजन करने के लिए एएनएम, हेल्थ सुपरवाइजर, बेसिक हेल्थ वर्कर्स को भी जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने बताया कि आशा घर-घर जाकर परिवार के लोगों से मलेरिया, टीबी, सर्दी, जुकाम व बुखार (आईएलआई व सारी) से संबंधित सवाल पूछेंगी। इसी के साथ वह यह भी जानकारी लेंगी की घर में कोई अति कुपोषित बच्चा तो नहीं है। अगर किसी में बीमारी के लक्षण मिलते हैं या कोई अति कुपोषित बच्चा मिलता है तो इसकी सूचना वह संबंधित ब्लॉक के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को देंगी। संबंधित विभाग सूचना के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। उन्होंने बताया कि अगर किसी घर के पास जलजमाव है तथा वहां लार्वा पैदा हो रहा है तो इसकी भी सूचना आशा देंगी। सूचना के बाद मलेरिया विभाग वहां निरीक्षण कर जल निकासी, दवा के छिड़काव आदि की व्यवस्था संबंधित से कराएगा। अभियान की जिला स्तर पर प्रतिदिन समीक्षा कर कमियों को दूर किया जाएगा। अगर किसी को बुखार के लक्षण हों तो आशा कार्यकर्ता से छिपाए नहीं, बल्कि खुलकर बताएं। बुखार का समय से पता चल जाने से जांच कर सही दिशा में इलाज हो सकता है।
विज्ञापन
----------------
कारगर रहा है दस्तक अभियान
डीएमओ ने बताया कि दस्तक अभियान काफी कारगर रहा है। पिछले साल एक्युट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस)/ जापानीज इंसेफेलाइटिस (जेई) के कुल 59 मामले सामने आए थे, जबकि उससे पहले वर्ष 2020 में 79 मामले रिकार्ड किए गए थे। वर्ष 2019 में 113 मामले सामने आए थे। उन्होंने बताया कि इस अभियान का परिणाम है कि अब एईएस/जेई में मौत के मामले सामने नहीं आ रहे हैं। आम तौर से लोग इनके प्रति जागरूक है तथा किसी में लक्षण दिखते ही तुरंत 108 एंबुलेंस से मरीज को अस्पताल में भर्ती करा रहे हैं। ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों से लेकर जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में एईएस/जेई के इलाज की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है। समय से इलाज शुरू होने पर मौत की आशंका नहीं रहती है।
विज्ञापन