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Basti News: पोस्टमार्टम से स्पष्ट हो जाती जानवर की पहचान
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बभनान (बस्ती)। गौर क्षेत्र के मेहदिया रामदत्त गांव में वृद्ध पर जंगली जानवर के हमले के बाद शव का पोस्टमार्टम परिवार के लोगों ने नहीं होने दिया, जबकि पोस्टमार्टम होता तो पंजों के निशान किस जानवर के हैं, की पहचान हो जाती। मगर ऐसा हो न सका। इसके चलते वन विभाग की टीम को पंजों के निशान के आधार पर जानवर की पहचान करने में पसीना छूट रहा है।
घटना के बाद सबसे पहले पहुंचे प्रभारी निरीक्षक गौर ने परिवार के लोगों से पोस्टमार्टम की बात कही, मगर परिवार के लोग साफ इन्कार कर दिया। वन विभाग की टीम भी पोस्टमार्टम होने से जानवर की पहचान स्पष्ट होने की पूरी उम्मीद लगाए बैठी थी, मगर जब परिवार के लोग उनकी बात नहीं मानी, तो डीएफओ नवीन कुमार शाक्य भी देर शाम वहां पहुंचे। मृतक के बेटों से बातचीत कर लोगों के सुरक्षा का हवाला भी दिया, मगर बात नहीं बनी।
रेंजर रामनगर सोनल वर्मा ने कहा कि मृतक के पोस्टमार्टम से जानवर की पहचान हो जाती, मगर अब तो पग चिह्न ही एकमात्र जानवर की पहचान का सहारा है। परिजनों से पोस्टमार्टम कराने के लिए बार-बार कहा गया, लेकिन वह तैयार नहीं हुए और शुक्रवार की देर शाम ही शव का अंतिम संस्कार कर दिए। अब विशेषज्ञों के पास निशान भेज गया है। वही जानवर की पहचान स्पष्ट कर सकेंगे।
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घटना के बाद सबसे पहले पहुंचे प्रभारी निरीक्षक गौर ने परिवार के लोगों से पोस्टमार्टम की बात कही, मगर परिवार के लोग साफ इन्कार कर दिया। वन विभाग की टीम भी पोस्टमार्टम होने से जानवर की पहचान स्पष्ट होने की पूरी उम्मीद लगाए बैठी थी, मगर जब परिवार के लोग उनकी बात नहीं मानी, तो डीएफओ नवीन कुमार शाक्य भी देर शाम वहां पहुंचे। मृतक के बेटों से बातचीत कर लोगों के सुरक्षा का हवाला भी दिया, मगर बात नहीं बनी।
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रेंजर रामनगर सोनल वर्मा ने कहा कि मृतक के पोस्टमार्टम से जानवर की पहचान हो जाती, मगर अब तो पग चिह्न ही एकमात्र जानवर की पहचान का सहारा है। परिजनों से पोस्टमार्टम कराने के लिए बार-बार कहा गया, लेकिन वह तैयार नहीं हुए और शुक्रवार की देर शाम ही शव का अंतिम संस्कार कर दिए। अब विशेषज्ञों के पास निशान भेज गया है। वही जानवर की पहचान स्पष्ट कर सकेंगे।
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