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हादसे में अखबार वितरक के बेटे की मौत
basti
Updated Wed, 10 Oct 2018 11:56 PM IST
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युवक की मौत के बाद रोते-बिलखते घरवाले।
- फोटो : amar ujala
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रुधौली। वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के परसा दमया गांव के पास मंगलवार की देर रात हुए सड़क हादसे में समाचार पत्र वितरक 65 वर्षीय बुजुर्ग के 32 वर्षीय बेटे की मौत हो गई। घटना के वक्त मृतक के पिता अगली सुबह का अखबार ले जाने के लिए बस्ती आए हुए थे, लेकिन घटना की सूचना पाकर कहीं वह अपना मानसिक संतुलन न खो बैठें इसलिए घटना की जानकारी उन्हें भोर में घर पहुंचने के बाद दी गई।
रुधौली थाना क्षेत्र के चोंगरी गांव निवासी 32 वर्षीय अरविंद नाथ दूबे मंगलवार को कुछ व्यक्तिगत कार्य से बस्ती गए हुए थे। लौटते समय रात लगभग नौ बजे के आसपास वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के परसा दमया चौराहे के पास उनकी बाइक ट्रक से टकरा गई, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए और थोड़ी देर बाद मौके पर ही दम तोड़ दिए। मौके पर पहुंची पुलिस ने परिवार के अन्य लोगों तक दुर्घटना की सूचना पहुंचाई एवं शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
बेटे के लौटने का इंतजार कर रहीं बूढ़ी आंखें
पिता राम धीरज दूबे रोडवेज से सेवनिवृत्त कर्मचारी हैं और परिवार के खर्च में सहयोग करने के लिए समाचार पत्र वितरण का कार्य करते हैं। बेटे की मौत का सदमा इस कदर लगा है कि वे मानसिक संतुलन खो दिए हैं। वे बेटे की मौत का सच मनाने के लिए तैयार ही नहीं हैं और रोज की तरह सामान्य व्यवहार करते हुए बस एक बार आप कह रहे हैं कि दो दिन से लापता है, आने दो खबर लेता हूं। बड़ा भाई ओमकार दुबे खेती किसानी का काम देखते हैं।
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रुधौली थाना क्षेत्र के चोंगरी गांव निवासी 32 वर्षीय अरविंद नाथ दूबे मंगलवार को कुछ व्यक्तिगत कार्य से बस्ती गए हुए थे। लौटते समय रात लगभग नौ बजे के आसपास वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के परसा दमया चौराहे के पास उनकी बाइक ट्रक से टकरा गई, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए और थोड़ी देर बाद मौके पर ही दम तोड़ दिए। मौके पर पहुंची पुलिस ने परिवार के अन्य लोगों तक दुर्घटना की सूचना पहुंचाई एवं शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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बेटे के लौटने का इंतजार कर रहीं बूढ़ी आंखें
पिता राम धीरज दूबे रोडवेज से सेवनिवृत्त कर्मचारी हैं और परिवार के खर्च में सहयोग करने के लिए समाचार पत्र वितरण का कार्य करते हैं। बेटे की मौत का सदमा इस कदर लगा है कि वे मानसिक संतुलन खो दिए हैं। वे बेटे की मौत का सच मनाने के लिए तैयार ही नहीं हैं और रोज की तरह सामान्य व्यवहार करते हुए बस एक बार आप कह रहे हैं कि दो दिन से लापता है, आने दो खबर लेता हूं। बड़ा भाई ओमकार दुबे खेती किसानी का काम देखते हैं।
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