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Basti News: विभीषण की शरणागति से लक्ष्मण को शक्ति बाण लगने तक का किया मंचन
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नियामतपुर गांव में रामलीला में मंचन करते कलाकार स्रोत आयोजक
विक्रमजोत। नियामतपुर गांव की रामलीला में विभीषण की शरणागति, समुद्र सेतु निर्माण, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध के प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों के अभिनय और युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों को रामकथा से जोड़ दिया।
मंचन में दिखाया गया कि माता सीता को लौटाने की सलाह देने पर रावण अपने भाई विभीषण को अपमानित कर दरबार से निकाल देता है। इसके बाद विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचते हैं। श्रीराम उन्हें अपनाकर शरणागत की रक्षा का संदेश देते हैं। इसके बाद वानर सेना समुद्र पर सेतु बनाकर लंका पहुंचती है। युद्ध टालने के प्रयास में श्रीराम युवराज अंगद को दूत बनाकर रावण के दरबार में भेजते हैं।
अंगद के समझाने के बावजूद रावण माता सीता को लौटाने से इन्कार कर देता है। संधि का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद दोनों पक्षों में युद्ध शुरू हो जाता है। युद्ध के दौरान मेघनाद ब्रह्मा से प्राप्त वीरघातिनी शक्ति का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूच्छित कर देता है। लक्ष्मण के भूमि पर गिरते ही मेघनाद विजय का उद्घोष करते हुए लंका लौट जाता है। इसके बाद विभीषण के परामर्श पर श्रीराम हनुमान को सुषेण वैद्य को लाने के लिए भेजते हैं। इस प्रसंग के मंचन ने दर्शकों में आगे की कथा को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी।
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राम की भूमिका रमाकांत मौर्य, लक्ष्मण की सूरज मौर्य, हनुमान की राजेश पाल, अंगद की श्रवण यादव, सुग्रीव की परशुराम मौर्य, रावण की राजेश सविता और मेघनाद की भूमिका रोहित गुप्ता ने निभाई। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना की। इस दौरान समिति अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्विवेदी, श्याम शंकर पाल, रवि श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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मंचन में दिखाया गया कि माता सीता को लौटाने की सलाह देने पर रावण अपने भाई विभीषण को अपमानित कर दरबार से निकाल देता है। इसके बाद विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचते हैं। श्रीराम उन्हें अपनाकर शरणागत की रक्षा का संदेश देते हैं। इसके बाद वानर सेना समुद्र पर सेतु बनाकर लंका पहुंचती है। युद्ध टालने के प्रयास में श्रीराम युवराज अंगद को दूत बनाकर रावण के दरबार में भेजते हैं।
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अंगद के समझाने के बावजूद रावण माता सीता को लौटाने से इन्कार कर देता है। संधि का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद दोनों पक्षों में युद्ध शुरू हो जाता है। युद्ध के दौरान मेघनाद ब्रह्मा से प्राप्त वीरघातिनी शक्ति का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूच्छित कर देता है। लक्ष्मण के भूमि पर गिरते ही मेघनाद विजय का उद्घोष करते हुए लंका लौट जाता है। इसके बाद विभीषण के परामर्श पर श्रीराम हनुमान को सुषेण वैद्य को लाने के लिए भेजते हैं। इस प्रसंग के मंचन ने दर्शकों में आगे की कथा को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी।
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राम की भूमिका रमाकांत मौर्य, लक्ष्मण की सूरज मौर्य, हनुमान की राजेश पाल, अंगद की श्रवण यादव, सुग्रीव की परशुराम मौर्य, रावण की राजेश सविता और मेघनाद की भूमिका रोहित गुप्ता ने निभाई। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना की। इस दौरान समिति अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्विवेदी, श्याम शंकर पाल, रवि श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।