{"_id":"65-53616","slug":"Basti-53616-65","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज होगा तुलसी-शालिग्राम विवाह ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज होगा तुलसी-शालिग्राम विवाह
Basti
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। कार्तिक शुक्ल एकादशी पर श्रीहरि की निंद्रा टूटेगी। इसके साथ ही छह महीने से रुके पडे़ मांगलिक कार्य शुरू हो गए। शुक्रवार को त्योहार को लेकर गन्ना, गंजी, सिंगाडे़ आदि की खूब खरीदारी की गई।
बाजारों में जबरदस्त भीड़ बढ़ गई थी। गांधीनगर हो या पांडेय बाजार, मंगल बाजार हो या राजा बाजार, हर जगह शादी की खरीददारी करते लोग दिख रहे थे। खासकर कपडे़, ज्वेलरी, फुट वियर और किराने की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही थी। सौदर्य प्रसाधन, ब्यूटी पार्लर, लांड्री आदि की दुकानों पर ग्राहकों का तांता लगा हुआ था। केवल शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के कस्बों में भी शादी की खरीददारी में लोग व्यस्त दिखे।
अब गूंज उठेगी शहनाई
भगवान विष्णु छह महीने तक निद्रा में रहे। इसलिए शहनाई की गूंज नहीं सुनाई पड़ रही थी। अब उनकी नींद टूटी तो शुभ मुहूर्त शुरू हो गए। इस दिन विधि विधान से स्नान करके स्त्रियां शालिग्राम और तुलसी का विवाह रचाती हैं। गाजे-बाजे के साथ एक सुंदर मंडप के नीचे यह कार्य संपन्न होता है। महिलाएं मंगल गीत गाती हैं। मान्यता है कि जिन दंपति को संतान नहीं होते वे जीवन में एक बार तुलसी का विवाह करके कन्यादान करने से संतान फल प्राप्त होता है।
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बाजारों में जबरदस्त भीड़ बढ़ गई थी। गांधीनगर हो या पांडेय बाजार, मंगल बाजार हो या राजा बाजार, हर जगह शादी की खरीददारी करते लोग दिख रहे थे। खासकर कपडे़, ज्वेलरी, फुट वियर और किराने की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही थी। सौदर्य प्रसाधन, ब्यूटी पार्लर, लांड्री आदि की दुकानों पर ग्राहकों का तांता लगा हुआ था। केवल शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के कस्बों में भी शादी की खरीददारी में लोग व्यस्त दिखे।
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अब गूंज उठेगी शहनाई
भगवान विष्णु छह महीने तक निद्रा में रहे। इसलिए शहनाई की गूंज नहीं सुनाई पड़ रही थी। अब उनकी नींद टूटी तो शुभ मुहूर्त शुरू हो गए। इस दिन विधि विधान से स्नान करके स्त्रियां शालिग्राम और तुलसी का विवाह रचाती हैं। गाजे-बाजे के साथ एक सुंदर मंडप के नीचे यह कार्य संपन्न होता है। महिलाएं मंगल गीत गाती हैं। मान्यता है कि जिन दंपति को संतान नहीं होते वे जीवन में एक बार तुलसी का विवाह करके कन्यादान करने से संतान फल प्राप्त होता है।
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