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किसानों को कम दी जा रहा था कीमत
Basti
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। खाद्य विभाग के मंडलीय अधिकारियों की जांच में किसानों के साथ धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया। गल्ला व्यापारी किसानों को धान की कीमत कम देते धराए गए। व्यापारियों के लाइसेंस को निरस्त करने की सिफारिश अफसरों ने मंडी समिति से की है। मामला इटवा मंडी समिति का है।
आरएफसी एके सिंह और आरएमओ राममूर्ति वर्मा ने इटवा स्थित मंडी समिति में किसानों से खरीदे जा रहे धान की जांच करने पहुंचे। यहां पर गल्ला व्यापारी किसानों के नाम जारी (6आर) पर एक कुंटल की कीमत तो 1250 रुपये चढ़ा रहे थे, मगर किसानों को दर्शाई गई कीमत से काफी कम दे रहे थे। आरएफसी ने बताया कि सेमरी खान कोट स्थित गल्ला व्यापारी राधेश्याम बंशीधर, इटवा बाजार के उमागणपति फूड और यहीं के केदारनाथ नरायनदास के यहां छापा मारा। धान से खरीद संबधी अभिलेख मांगने के बावजूद भी व्यापारियों ने नहीं दिखाया। किसानों ने शिकायत की कि उन्हें जो धान खरीद की पर्ची दी जाती है उस पर 1250 रुपये लिखा रहता है, मगर जब पैसा दिया जाता तो धान में नमी का बहाना बनाकर काट लिया जाता है। आरएफसी कहते हैं कि सरकार किसानों को 1250 रुपये के दर से धान की कीमत दिलाना चाहती है। क्वालिटी खराब होने का कारण बताते हुए कहा कि धान की फसल को कम पानी और देर से मिलने के कारण धान का दाना पूरी तरह परिपक्व नहीं हो पाया। इसके चलते फरहा की मात्रा बढ़ गई। नमी का प्रतिशत 20 प्रतिशत तक पहुंच गया जबकि अनुमन्य तीन फीसदी तक ही है।
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आरएफसी एके सिंह और आरएमओ राममूर्ति वर्मा ने इटवा स्थित मंडी समिति में किसानों से खरीदे जा रहे धान की जांच करने पहुंचे। यहां पर गल्ला व्यापारी किसानों के नाम जारी (6आर) पर एक कुंटल की कीमत तो 1250 रुपये चढ़ा रहे थे, मगर किसानों को दर्शाई गई कीमत से काफी कम दे रहे थे। आरएफसी ने बताया कि सेमरी खान कोट स्थित गल्ला व्यापारी राधेश्याम बंशीधर, इटवा बाजार के उमागणपति फूड और यहीं के केदारनाथ नरायनदास के यहां छापा मारा। धान से खरीद संबधी अभिलेख मांगने के बावजूद भी व्यापारियों ने नहीं दिखाया। किसानों ने शिकायत की कि उन्हें जो धान खरीद की पर्ची दी जाती है उस पर 1250 रुपये लिखा रहता है, मगर जब पैसा दिया जाता तो धान में नमी का बहाना बनाकर काट लिया जाता है। आरएफसी कहते हैं कि सरकार किसानों को 1250 रुपये के दर से धान की कीमत दिलाना चाहती है। क्वालिटी खराब होने का कारण बताते हुए कहा कि धान की फसल को कम पानी और देर से मिलने के कारण धान का दाना पूरी तरह परिपक्व नहीं हो पाया। इसके चलते फरहा की मात्रा बढ़ गई। नमी का प्रतिशत 20 प्रतिशत तक पहुंच गया जबकि अनुमन्य तीन फीसदी तक ही है।
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