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आज मखौड़ा से शुरु होगी चौरासी कोसी परिक्रमा
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आज मखौड़ा धाम से शुरू होगी पौराणिक चौरासी कोसी परिक्रमा
सिकंदरपुर (बस्ती)। मखौड़ा धाम में चैत्र पूर्णिमा के दिन आयोजित होने वाले प्रसिद्ध पौराणिक मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। पूर्णिमा के दिन शनिवार को साधु-संत मनोरमा नदी में स्नानकर 84 कोसी परिक्रमा की शुरुआत करेंगे। इस अवसर पर भव्य मेला भी लगता है। मेले में कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, बस्ती, बलरामपुर आदि जिलों से व्यवसायी आते हैं।
शुक्रवार को देश के विभिन्न प्रांतों से साधु संतों का जत्था मखौड़ा पहुंच गया। शाम को धाम में संतों द्वारा लिट्टी चोखा तैयार कर प्रभू श्रीराम को प्रसाद चढ़ाया गया और इसके बाद सभी ने प्रसाद ग्रहण किया। मखौड़ा श्रीराम के उद्भव स्थली के रुप में मानी जाती है। यहां लोग पुत्र प्राप्ति की कामना के लिए आज भी यज्ञ कराते हैं। यहीं से हर साल साधु-संत व वैरागी 84 कोसी परिक्रमा शुरू करते हैं। मान्यता है कि चौरासी कोसी परिक्रमा करने से मनुष्य को 84 लाख योनियों से मुक्ति मिल जाती है।
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सिकंदरपुर (बस्ती)। मखौड़ा धाम में चैत्र पूर्णिमा के दिन आयोजित होने वाले प्रसिद्ध पौराणिक मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। पूर्णिमा के दिन शनिवार को साधु-संत मनोरमा नदी में स्नानकर 84 कोसी परिक्रमा की शुरुआत करेंगे। इस अवसर पर भव्य मेला भी लगता है। मेले में कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, बस्ती, बलरामपुर आदि जिलों से व्यवसायी आते हैं।
शुक्रवार को देश के विभिन्न प्रांतों से साधु संतों का जत्था मखौड़ा पहुंच गया। शाम को धाम में संतों द्वारा लिट्टी चोखा तैयार कर प्रभू श्रीराम को प्रसाद चढ़ाया गया और इसके बाद सभी ने प्रसाद ग्रहण किया। मखौड़ा श्रीराम के उद्भव स्थली के रुप में मानी जाती है। यहां लोग पुत्र प्राप्ति की कामना के लिए आज भी यज्ञ कराते हैं। यहीं से हर साल साधु-संत व वैरागी 84 कोसी परिक्रमा शुरू करते हैं। मान्यता है कि चौरासी कोसी परिक्रमा करने से मनुष्य को 84 लाख योनियों से मुक्ति मिल जाती है।
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