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84 कोसी परिक्रमा मख क्षेत्र से शुरू
basti
Updated Wed, 12 Apr 2017 11:40 PM IST
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पूजा
- फोटो : amarujala
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छावनी।
मनुष्य को मोक्ष देने वाली 84 कोसी परिक्रमा बुधवार को जिले के मख क्षेत्र मखौड़ा से शुरू हुई। अयोध्या धर्मार्थ सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंथ गया दास की अगुवाई में शुरू हुई इस पद यात्रा में जय श्रीराम, हर-हर महादेव के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने यात्रा आगे बढ़ाई।
पुरुषोत्तम श्रीराम के अयोध्या राज्य का विस्तार चौरासी कोस में था। मान्यता है कि इस राज्य की परिक्रमा से मनुष्य की सभी कामनाओं की पूर्ति के साथ उसे सद्गति मिलती है। बुधवार को सुबह पांच बजे मखौड़ा से शुरू हुई इस परिक्रमा में देश के हिंदू धर्मानुयायियों ने हिस्सा लिया। यात्रा का प्रारंभ और समापन मख धाम में ही होता है। ऐसी मान्यता है कि राजा दशरथ ने यहां पुत्रेष्टि यज्ञ किया था शृंगी ऋषि के आचार्यत्व में हुए यज्ञ में अग्निदेव स्वयं प्रकट होकर उन्हें खीर प्रदान किया, जिसे खाकर तीनों रानियों ने राम, लक्ष्मन, भरत, शत्रुघ्न जैसे पुत्रों की प्राप्ति हुई। तभी से इस क्षेत्र की महत्ता बढ़ गई। इस परिक्रमा का मार्ग अंबेडकर नगर, फैजाबाद, गोंडा, बाराबंकी जिलों से होकर गुजरता है। परिक्रमा की अगुवाई कर रहे महंत गया दास ने बताया कि परिक्रमा में इस बार श्रद्धालुओं ने नया रिकॉर्ड बनाया है। कभी अधिकतम एक हजार तक साधु-संतों की भीड़ इस बार दो हजार के ऊपर पहुंच गई है। इसमें काफ़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। इधर, परिक्रमा के प्रथम पड़ाव स्थल रामरेखा मंदिर पर दोपहर से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। यह सिलसिला शाम तक चलता रहा। रामरेखा मंदिर के पुजारी दयाशंकर दास ने बताया कि सभी संतों के लिए खाने, पीने, ठहरने तथा रात में प्रकाश के लिए जेनरेटर आदि की व्यवस्था कर ली गई है। यहां रात्रि विश्राम के बाद श्रद्धालु गुरुवार को सुबह दूसरे पड़ाव स्थल हनुमान बाग चकोही के लिए निकलेंगे। रामरेखा मंदिर पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा में छावनी पुलिस सुबह से ही मुस्तैद दिखाई दी।
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मनुष्य को मोक्ष देने वाली 84 कोसी परिक्रमा बुधवार को जिले के मख क्षेत्र मखौड़ा से शुरू हुई। अयोध्या धर्मार्थ सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंथ गया दास की अगुवाई में शुरू हुई इस पद यात्रा में जय श्रीराम, हर-हर महादेव के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने यात्रा आगे बढ़ाई।
पुरुषोत्तम श्रीराम के अयोध्या राज्य का विस्तार चौरासी कोस में था। मान्यता है कि इस राज्य की परिक्रमा से मनुष्य की सभी कामनाओं की पूर्ति के साथ उसे सद्गति मिलती है। बुधवार को सुबह पांच बजे मखौड़ा से शुरू हुई इस परिक्रमा में देश के हिंदू धर्मानुयायियों ने हिस्सा लिया। यात्रा का प्रारंभ और समापन मख धाम में ही होता है। ऐसी मान्यता है कि राजा दशरथ ने यहां पुत्रेष्टि यज्ञ किया था शृंगी ऋषि के आचार्यत्व में हुए यज्ञ में अग्निदेव स्वयं प्रकट होकर उन्हें खीर प्रदान किया, जिसे खाकर तीनों रानियों ने राम, लक्ष्मन, भरत, शत्रुघ्न जैसे पुत्रों की प्राप्ति हुई। तभी से इस क्षेत्र की महत्ता बढ़ गई। इस परिक्रमा का मार्ग अंबेडकर नगर, फैजाबाद, गोंडा, बाराबंकी जिलों से होकर गुजरता है। परिक्रमा की अगुवाई कर रहे महंत गया दास ने बताया कि परिक्रमा में इस बार श्रद्धालुओं ने नया रिकॉर्ड बनाया है। कभी अधिकतम एक हजार तक साधु-संतों की भीड़ इस बार दो हजार के ऊपर पहुंच गई है। इसमें काफ़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। इधर, परिक्रमा के प्रथम पड़ाव स्थल रामरेखा मंदिर पर दोपहर से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। यह सिलसिला शाम तक चलता रहा। रामरेखा मंदिर के पुजारी दयाशंकर दास ने बताया कि सभी संतों के लिए खाने, पीने, ठहरने तथा रात में प्रकाश के लिए जेनरेटर आदि की व्यवस्था कर ली गई है। यहां रात्रि विश्राम के बाद श्रद्धालु गुरुवार को सुबह दूसरे पड़ाव स्थल हनुमान बाग चकोही के लिए निकलेंगे। रामरेखा मंदिर पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा में छावनी पुलिस सुबह से ही मुस्तैद दिखाई दी।
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