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समितियों से यूरिया नदारद, किसान परेशान
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यूरिया के लिए भटक रहे किसान
- समितियों से यूरिया नदारद, चांदी काट रहे निजी उर्वरक दुकानदार
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। क्षेत्र के साधन सहकारी समितियों पर यूरिया नहीं होने से किसान परेशान हैं। किसानों को जरूरत के मुताबिक यूरिया नहीं मिल पा रहा है, जबकि किसान सुबह-शाम समितियों का चक्कर लगा रहे हैं।
बारिश के बाद से ही गेहूं में यूरिया की जरूरत होती है। इसके लिए किसानों को भटकना पड़ रहा है। मजबूर होकर किसान महंगी कीमत पर यूरिया खरीदने को विवश हैं। क्षेत्र के नयकापार, महुआडांड़, पारा, बैरागल, भरूकहवा समितियों पर यूरिया उपलब्ध नहीं है। जिससे प्राइवेट दुकानदार चांदी काट रहे हैं। क्षेत्र के किसान प्रेमनाथ सिंह, राधेश्याम चौधरी, दीनानाथ चौधरी, जोखू, प्रमोद, अज्ञाराम चौधरी आदि किसानों का कहना है बारिश के बाद से ही खाद के लिए समितियों पर जा रहे हैं, मगर वहां उर्वरक नहीं है। ऐसे में निजी दुकान से खरीदना मजबूरी है। एआर कोआपरेटिव प्रवीन कुमार ने कहा कि कुछ समितियों पर यूरिया नहीं है। यह संज्ञान में है। इसे लेकर डिमांड की गई थी। बुधवार को रैक लग रही है। सभी समितियों पर 24 घंटे बाद यूरिया पहुंच जाएगी।
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- समितियों से यूरिया नदारद, चांदी काट रहे निजी उर्वरक दुकानदार
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। क्षेत्र के साधन सहकारी समितियों पर यूरिया नहीं होने से किसान परेशान हैं। किसानों को जरूरत के मुताबिक यूरिया नहीं मिल पा रहा है, जबकि किसान सुबह-शाम समितियों का चक्कर लगा रहे हैं।
बारिश के बाद से ही गेहूं में यूरिया की जरूरत होती है। इसके लिए किसानों को भटकना पड़ रहा है। मजबूर होकर किसान महंगी कीमत पर यूरिया खरीदने को विवश हैं। क्षेत्र के नयकापार, महुआडांड़, पारा, बैरागल, भरूकहवा समितियों पर यूरिया उपलब्ध नहीं है। जिससे प्राइवेट दुकानदार चांदी काट रहे हैं। क्षेत्र के किसान प्रेमनाथ सिंह, राधेश्याम चौधरी, दीनानाथ चौधरी, जोखू, प्रमोद, अज्ञाराम चौधरी आदि किसानों का कहना है बारिश के बाद से ही खाद के लिए समितियों पर जा रहे हैं, मगर वहां उर्वरक नहीं है। ऐसे में निजी दुकान से खरीदना मजबूरी है। एआर कोआपरेटिव प्रवीन कुमार ने कहा कि कुछ समितियों पर यूरिया नहीं है। यह संज्ञान में है। इसे लेकर डिमांड की गई थी। बुधवार को रैक लग रही है। सभी समितियों पर 24 घंटे बाद यूरिया पहुंच जाएगी।
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