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बिजली गिरने से युवक की मौत, पशु झुलसे
Updated Sun, 09 Jul 2017 11:59 PM IST
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सल्टौआ/ महराजगंज। खराब मौसम के बीच रविवार को अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बिजली गिरने से जहां युवक की मौत हो गई। वहीं, दो मवेशी भी गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
सल्टौआ गोपालपुर गांव के 35 वर्षीय वीरेंद्र प्रताप पुत्र मुनीराम धान रोपाई के लिए खेत तैयार कर रहे थे। तभी बिजली गिरी, जिसकी चपेट में आने से घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। खेत के बगल में काम कर रहे गांव के ही रामानुज बिजली गिरने के दौरान दहशत में भागते समय गिर पड़े। पड़ोस में काम कर रहे वीरेंद्र की तरफ देखा तो बेहोशी जानकर शोरगुल करने लगे। आसपास के लोग जुट गए। वीरेंद्र के पिता मुनीराम लोगों के सहयोग से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सल्टौआ लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। आकाशीय बिजली से मरने की जानकारी ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विवेक यादव ने एसडीएम भानपुर दिनेश कुमार तथा थाना अध्यक्ष सोनहा ओमप्रकाश यादव को दी। पुलिस ने शव का पंचनामा कराकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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दूसरी घटना हर्रैया क्षेत्र के बंजरिया गांव में हुई। बिजली गिरने से दो पशु झुलस गए। घटना से पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। गांव के बैजनाथ दुबे घर के सामने ही झोपड़ी में गायें बांध रखे थे। सुबह करीब सात बजे अचानक झोपड़ी पर बिजली गिर गई। दोनों गायें झुलस गईं। पशुपालन विभाग के चिकित्सकों को सूचना दी गई। डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज किया।
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बच्चों को देख नम हुईं आंखें
सल्टौआ। वीरेंद्र की मौत का यकीन ने तो घर वालों को हो रहा था न ही जानने वालों को। सल्टौआ गांव ही नहीं मिलन सार व्यक्तित्व के चलते कई गांवों के लोग जानते थे। बिजली गिरने से मौत की सूचना पर लोग उनके घर पहुंच गए।
तीन भाइयों में सबसे बड़े वीरेंद्र घर में इकलौता कमाऊ बेटे थे। डेढ़ वर्ष पूर्व माता मालती देवी की बीमारी के कारण मौत हो गई। पिता भी बीमार ही चल रहे हैं। इसके कारण पूरे घर की जिम्मेदारी वीरेंद्र पर ही थी। दो बेटे लक्की (10), तथा समीर (8 वर्ष) भी पिता की मौत पर बदहवास स्थिति में खड़े देखते ही रहे। पत्नी गीता देवी बच्चों को पकड़कर रोते-रोते बेसुध हो जा रही थीं। बच्चे भी रो रहे थे, जिन्हें देखकर मौजूद लोग भी आंसुओं को नहीं रोक पाए। बहन नीलम, विजय, अजय तथा पिता मुनीराम और भाई धीरेंद्र, राजू का रो-रो कर बुरा हाल है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की। आसपास के परसा खाल, कोयलसा, ककरहिया, देईपार सहित अनेक गांव के लोग परिवार वालों को ढांढस बंधाते रहे।