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गृहस्थी बचाने में जूझ रहे सौ परिवार
Updated Sun, 30 Jul 2017 04:50 PM IST
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बस्ती। विक्रमजोत-लोलपुर तटबंध के बांध विहीन गांवों की किस्मत भी साथ नहीं है। पहले तो बाढ़ शोध संस्थान पटना ने बांध नहीं बनने की रिपोर्ट दी। फिर सुरक्षा के लिए बने तीन स्परों को पुनर्जीवित किया गया जो धारा को मोड़ देगा वह भी रोक नहीं पा रहे। अब इनको विस्थापन के लिए जमीन भी नहीं मिल पा रही है।
बाढ़ शोध संस्थान की रिपोर्ट के बाद विस्थापन के लिए प्रशासनिक लचर रवैए ने कल्याणपुर, भरथापुर और सहजौरा पाठक गांवों को घाघरा के रहमो करम पर छोड़ दिया है। नदी के कटान की जद में आने से इन तीनों गांवों का अस्तित्व नदी में कब विलीन हो जाए यह काल के गाल में है। यहां के करीब 100 परिवारों को कहीं जगह नहीं मिली। बाढ़ के समय आसपास सटे गांवों में अपनी गृहस्थी को ट्रांसफर करते रहते हैं। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता फूलचंद्र सिंह का कहना है कि काम तो 52 लाख रुपये का हो चुका है लेकिन डीएम की स्वीकृति का एक ढेला भी नहीं मिला। सीमित संसाधनों से तीनों स्परों की सुुरक्षा की जा रही है।
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संवेदनशील तीन गांव के लोगों को अन्यत्र बसाने की कवायद वर्ष 15-16 में तब शुरू हुई। तत्कालीन डीएम नरेंद्र सिंह पटेल ने तीनों गांवों का सर्वे कराया। निर्देश दिया कि कुल 150 घरों की डेढ हजार की आबादी को सुरक्षित स्थानों पर बसाने कि व्यवस्था की जाए। तत्कालीन एसडीएम हरिश्चन्द्र सिंह को जिम्मेदारी दी गई। दो साल बाद भी विभाग को न सुरक्षित जमीन मिली न हि डूबने के कगार पहुंचे ग्रामीणों को कोई राहत।
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कल्याण पुर के ग्राम प्रधान संजय यादव का कहना है कि पक्का कच्चा सभी मकान वाले अपना दूसरा अशियाना बनाने मे जुट गए हैं। कुछ तो पास पडोस के गांवों में जाकर अपने नाते रिश्तेदारों के यहां शरण ले लिए। अभी भी 100 परिवार जमीन न मिलने के कारण डटे हुए है।
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दूसरे गांवों में रखी गृहस्थी
हेमंत पाण्डेय, संतराम, रामचंदर, पैकरमा, राजकुमार, भरथलाल, बैजनाथ, जगदम्बा यादव सहित तमाम ग्रामीणों ने अपने गृहस्थी ढोकर दूसरे गावों में सुरक्षित करने का काम करने लगे हैं। कल्याणपुर के पैकरमा का कहना है कि अब हम गांव छोड़ देना चाहते हैं क्योकि खेती की सारी जमीन बह गई है। सहजौरा पाठक के संतराम ने बताया कि मेहनत मजदूरी करके परिवार का बमुश्किल से खर्च चलाते हैं अब हमारे घर कभी भी कट सकते हैं। कोई
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जिम्मेदार बोले
- गांवों को बचाने के लिए प्रमुुुख सचिव से 37 लाख रुपये तत्काल स्वीकृत करा दिया है। धन आ भी गया लेकिन बाढ़ खंड के अधिकारी उसे इंफ्रास्ट्रक्चर मद में प्रयोग कर लिए यह राशि राज्य अकस्मिकता निधि से मिली है। बाढ़ खंड के लोग झूठ बोल रहे हैं कि डीएम की स्वीकृति की राशि अभी तक नहीं मिली।
अरविंद कुमार सिंह, जिला अधिकारी
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गांव के लोग अगर दूसरी जगह बसना चाहते हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ दिलाया जाएगा।बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के बचाव के लिए पूरे बंधे को पिच कराने की मांग संसद में भी उठाई है। इससे हर साल कटान भी नहीं होगी और आने जाने में भी आसानी होगी।
हरीश द्विवेदी, सांसद