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पहले चरण में 63 हजार बच्चें ड्रेस से हुए वंचित
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आधार नहीं होने से यूनिफॉर्म से विद्यार्थी वंचित
जिले में मौजूद हैं 2076 परिषदीय स्कूल, 63 हजार बच्चों के पास नहीं है आधार कार्ड
1,07,661 अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से पहुंची यूनिफार्म की रकम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। परिषदीय विद्यालयों के 63 हजार बच्चे पहले चरण में ड्रेस, स्कूल बैग, जूते-मोजे व स्वेटर से वंचित हो गए। शासन ने इस सत्र में भी परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से हर बच्चे को 1200 रुपये भेजने का निर्णय लिया है। लेकिन, बच्चों के आधार कार्ड न होने से उन्हें इस सुविधा से वंचित होना पड़ा।
जिले में 2076 परिषदीय स्कूल है जिसमें 1,430 प्राथमिक 324 उच्च प्राथमिक और 322 संविलियन विद्यालय हैं। जिसमें दो लाख 44 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को हर साल मुफ्त दो सेट ड्रेस के अलावा जूता-मोजा, स्वेटर व स्कूल बैग विभाग उपलब्ध कराता है। लेकिन, पिछले वर्ष से बेसिक शिक्षा विभाग यूनिफार्म, स्वेटर, जूता-मोजा का 1100 रुपये डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे अभिभावकों के खाते में स्थानांतरित किया ताकि कमीशनखोरी पर लगाम लग सके।
साथ ही अभिभावक अपनी मनपसंद दुकान से स्वयं यूनिफार्म क्रय कर सकें। जिले में 2.40 लाख पंजीकृत बच्चों का पूरा डाटा, अभिभावकों के बैंक अकाउंट आदि प्रेरणा एप पर फीड करना था। लेकिन, 63 हजार बच्चों का आधार न बनने के के कारण अभिभावकों को ड्रेस का पैसा नहीं मिला। वहीं, एक लाख 76 हजार 661 विद्यार्थियों का डाटा पोर्टल पर अपलोड होने से उन्हें ड्रेस, बैग, जूते-मोजे व स्वेटर खरीदने के लिए प्रत्येक बच्चों के अभिभावकों को 1200 रुपये डीबीटी के माध्यम से भेजे गए।
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जिला समन्वयक, शिक्षा अभिषेक शुक्ला ने बताया कि बीते दिन लखनऊ में बैठक हुई है जिसमें एक अगस्त को इन विद्यार्थियों के अभिभावकों को डीबीटी के माध्यम से पैसे भेजने के लिए कहा गया था। अभी 63 हजार विद्यार्थियों को आधार कार्ड न होने के कारण नहीं जोड़ा जा सका। आधार से न जुड़ने के कारण इन विद्यार्थियों को पहले चरण में पैसा नहीं मिल सका जिसके चलते इन्हें पैसा पाने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों का भी आधार सत्यापन होना अनिवार्य है तभी डीबीटी के माध्यम से पैसे मिल सकेंगे।
----------------------रमेश मिश्र
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जिले में मौजूद हैं 2076 परिषदीय स्कूल, 63 हजार बच्चों के पास नहीं है आधार कार्ड
1,07,661 अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से पहुंची यूनिफार्म की रकम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। परिषदीय विद्यालयों के 63 हजार बच्चे पहले चरण में ड्रेस, स्कूल बैग, जूते-मोजे व स्वेटर से वंचित हो गए। शासन ने इस सत्र में भी परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से हर बच्चे को 1200 रुपये भेजने का निर्णय लिया है। लेकिन, बच्चों के आधार कार्ड न होने से उन्हें इस सुविधा से वंचित होना पड़ा।
जिले में 2076 परिषदीय स्कूल है जिसमें 1,430 प्राथमिक 324 उच्च प्राथमिक और 322 संविलियन विद्यालय हैं। जिसमें दो लाख 44 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को हर साल मुफ्त दो सेट ड्रेस के अलावा जूता-मोजा, स्वेटर व स्कूल बैग विभाग उपलब्ध कराता है। लेकिन, पिछले वर्ष से बेसिक शिक्षा विभाग यूनिफार्म, स्वेटर, जूता-मोजा का 1100 रुपये डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे अभिभावकों के खाते में स्थानांतरित किया ताकि कमीशनखोरी पर लगाम लग सके।
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साथ ही अभिभावक अपनी मनपसंद दुकान से स्वयं यूनिफार्म क्रय कर सकें। जिले में 2.40 लाख पंजीकृत बच्चों का पूरा डाटा, अभिभावकों के बैंक अकाउंट आदि प्रेरणा एप पर फीड करना था। लेकिन, 63 हजार बच्चों का आधार न बनने के के कारण अभिभावकों को ड्रेस का पैसा नहीं मिला। वहीं, एक लाख 76 हजार 661 विद्यार्थियों का डाटा पोर्टल पर अपलोड होने से उन्हें ड्रेस, बैग, जूते-मोजे व स्वेटर खरीदने के लिए प्रत्येक बच्चों के अभिभावकों को 1200 रुपये डीबीटी के माध्यम से भेजे गए।
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जिला समन्वयक, शिक्षा अभिषेक शुक्ला ने बताया कि बीते दिन लखनऊ में बैठक हुई है जिसमें एक अगस्त को इन विद्यार्थियों के अभिभावकों को डीबीटी के माध्यम से पैसे भेजने के लिए कहा गया था। अभी 63 हजार विद्यार्थियों को आधार कार्ड न होने के कारण नहीं जोड़ा जा सका। आधार से न जुड़ने के कारण इन विद्यार्थियों को पहले चरण में पैसा नहीं मिल सका जिसके चलते इन्हें पैसा पाने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों का भी आधार सत्यापन होना अनिवार्य है तभी डीबीटी के माध्यम से पैसे मिल सकेंगे।
----------------------रमेश मिश्र