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ब्लड बैंक: यहां खून पाने को तमाम कवायद
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ब्लड बैंक : यहां खून पाने को तमाम कवायद
400 रुपये है प्रति यूनिट सरकारी फीस
35 दिन बाद निष्प्रयोज्य हो जाता है ब्लड
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। खून की कमी के चलते किसी की जान न जाए, इसके लिए सरकार ने ब्लड बैंकों की स्थापना कराई है, लेकिन इन ब्लड बैंकों से खून लेना आसान नहीं है। क्योंकि बिचौलिये मरीजों के तीमारदारों को यहां तक पहुंचने ही नहीं देते। वहीं, जागरूकता की कमी से लोग अधिक धन व्यय कर मानकविहीन खून प्राप्त करते हैं। इससे मरीजों का जीवन संकट में पड़ सकता है। कई बार तो रक्त की कमी के चलते लोगों की जान भी चली जाती है।
जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में तीन सौ यूनिट ब्लड स्टोर करने की क्षमता है, वर्तमान समय में यहां मात्र 58 यूनिट ही ब्लड मौजूद है। यहां ज्यादा डिमांड न होने से अक्सर ब्लड खराब हो जाता है। क्योंकि डोनेट किया गया ब्लड 35 दिन ही सुरक्षित रहता है, जिसके बाद वह निष्प्रयोज्य हो जाता है। जबकि जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में लोगों को खून के लिए भटकते देखा जा सकता है। इसके पीछे की बड़ी वजह जागरूकता की कमी व व्यापक प्रचार-प्रसार का अभाव भी है, क्योंकि ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं होता कि ब्लड बैंक है कहां। इसी का फायदा उठाते हैं बिचौलिए और महज चार सौ रुपये प्रति यूनिट मिलने वाले ब्लड को वे पांच हजार रुपये तक प्रति यूनिट बेच लेते हैं। नियम तो यह है कि यदि किसी को ब्लड की आवश्यकता है तो उसके परिजन एक यूनिट खून ब्लड बैंक में डोनेट कर एक यूनिट मरीज के ग्रुप का ब्लड प्राप्त कर सकते हैं, इसके लिए भी इन्हें पैसे देने होते हैं। यदि सरकारी अस्पताल में मरीज का इलाज चल रहा है और उसे रक्त की आवश्यकता है तो उसे एक यूनिट के बदले 400 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। यदि मरीज का इलाज प्राइवेट अस्पताल में चल रहा है तो उसे 1050 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। शुल्क के पीछे का कारण यह है कि जो रक्त ब्लड बैंक से दिया जाता है वह 100 प्रतिशत शुद्ध होता है, विशेषज्ञों की जांच-पड़ताल के बाद ही रक्त को ब्लड बैंक में स्टोर किया जाता है। इसके पीछे आने वाले खर्चे को शुल्क के रूप में लिया जाता है।
पहल करने की आवश्यकता
जरूरतमंदों को कम दामों पर रक्त मिल सके, इसके लिए प्राइवेट अस्पतालों व नर्सिंग होमों को पहल करने की आवश्यकता है, विभागीय सूत्रों की मानें तो इन अस्पतालों से कम डिमांड के चलते ब्लड बैंकों में अधिक रक्त स्टोर नहीं किया जाता।
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अधिकारी की सुनिए
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ ओपी सिंह का कहना है जिले में तीन ब्लड बैंक हैं, जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की कोई कमी नहीं है। कहा कि कोई भी व्यक्ति एक यूनिट ब्लड डोनेट कराकर ब्लड ले सकता है।
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400 रुपये है प्रति यूनिट सरकारी फीस
35 दिन बाद निष्प्रयोज्य हो जाता है ब्लड
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। खून की कमी के चलते किसी की जान न जाए, इसके लिए सरकार ने ब्लड बैंकों की स्थापना कराई है, लेकिन इन ब्लड बैंकों से खून लेना आसान नहीं है। क्योंकि बिचौलिये मरीजों के तीमारदारों को यहां तक पहुंचने ही नहीं देते। वहीं, जागरूकता की कमी से लोग अधिक धन व्यय कर मानकविहीन खून प्राप्त करते हैं। इससे मरीजों का जीवन संकट में पड़ सकता है। कई बार तो रक्त की कमी के चलते लोगों की जान भी चली जाती है।
जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में तीन सौ यूनिट ब्लड स्टोर करने की क्षमता है, वर्तमान समय में यहां मात्र 58 यूनिट ही ब्लड मौजूद है। यहां ज्यादा डिमांड न होने से अक्सर ब्लड खराब हो जाता है। क्योंकि डोनेट किया गया ब्लड 35 दिन ही सुरक्षित रहता है, जिसके बाद वह निष्प्रयोज्य हो जाता है। जबकि जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में लोगों को खून के लिए भटकते देखा जा सकता है। इसके पीछे की बड़ी वजह जागरूकता की कमी व व्यापक प्रचार-प्रसार का अभाव भी है, क्योंकि ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं होता कि ब्लड बैंक है कहां। इसी का फायदा उठाते हैं बिचौलिए और महज चार सौ रुपये प्रति यूनिट मिलने वाले ब्लड को वे पांच हजार रुपये तक प्रति यूनिट बेच लेते हैं। नियम तो यह है कि यदि किसी को ब्लड की आवश्यकता है तो उसके परिजन एक यूनिट खून ब्लड बैंक में डोनेट कर एक यूनिट मरीज के ग्रुप का ब्लड प्राप्त कर सकते हैं, इसके लिए भी इन्हें पैसे देने होते हैं। यदि सरकारी अस्पताल में मरीज का इलाज चल रहा है और उसे रक्त की आवश्यकता है तो उसे एक यूनिट के बदले 400 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। यदि मरीज का इलाज प्राइवेट अस्पताल में चल रहा है तो उसे 1050 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। शुल्क के पीछे का कारण यह है कि जो रक्त ब्लड बैंक से दिया जाता है वह 100 प्रतिशत शुद्ध होता है, विशेषज्ञों की जांच-पड़ताल के बाद ही रक्त को ब्लड बैंक में स्टोर किया जाता है। इसके पीछे आने वाले खर्चे को शुल्क के रूप में लिया जाता है।
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पहल करने की आवश्यकता
जरूरतमंदों को कम दामों पर रक्त मिल सके, इसके लिए प्राइवेट अस्पतालों व नर्सिंग होमों को पहल करने की आवश्यकता है, विभागीय सूत्रों की मानें तो इन अस्पतालों से कम डिमांड के चलते ब्लड बैंकों में अधिक रक्त स्टोर नहीं किया जाता।
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जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ ओपी सिंह का कहना है जिले में तीन ब्लड बैंक हैं, जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की कोई कमी नहीं है। कहा कि कोई भी व्यक्ति एक यूनिट ब्लड डोनेट कराकर ब्लड ले सकता है।