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सीवर ट्रीटमेंट के बजाय अब सेफटाज मैनेजमेंट
Updated Fri, 07 Dec 2018 12:20 AM IST
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सीवर ट्रीटमेंट के बजाय अब सेफटाज मैनेजमेंट
अमृत योजना से जुड़े 40 जिलों में क्रियान्वित होगी योजना
शुरू हुआ सर्वे, सेक्शन मशीन के माध्यम से जुड़ेंगे सेफ्टी टैंक
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सीवर ट्रीटमेंट योजना में जमीन की तलाश अभी तक पूरी नहीं हो सकी। शासन ने जिले के नगर निकायों सहित सूबे के 40 जिलों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना को निरस्त कर दिया है। यहां सेफटाज मैनेजमेंट से पानी निकास की व्यवस्था संचालित होगी। जिले में पानी निकास की सुचारु व्यवस्था नहीं है। इसके लिए नाले तो हैं, मगर नालों में सिल्ट व कूड़ा के चलते यह जाम हो जाते हैं, जिससे गलियों व मोहल्लों की नालियां उफना जाती हैं। बारिश में तो स्थिति और दयनीय हो जाती है। क्योंकि नालों में बहाव न होने के कारण पानी सड़क तक पहुंच जाता है। तमाम घरों में नाली का गंदा पानी घुस जाता है। इन स्थितियों को लेकर प्रशासन ने डेढ़ दशक पहले शहरी क्षेत्र में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापना के प्रयास शुरू किए। पहली बार प्रस्ताव शासन को गया तो वहां इस पर अधिक खर्च की बात कह कर फाइल लौटा दी गई। इसी वर्ष फिर से उसे सुधार कर भेजा गया, मगर शासन में यह लंबित हो गया। नगर पालिका व प्रशासन शहर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए प्रयासरत रहा, मगर सब कुछ हो जाने के बाद जमीन की कमी इसमें बाधा बन गई। किसी तरह वर्ष भर पहले पालिका को जमीन मिली भी मगर तकनीकी कारणों से वह निरस्त हो गई। मामला लटक गया। इस बीच शासन ने जिले को अमृत योजना में शामिल किया और अब यहां इसी योजना के तहत पानी निकास के लिए सेफटाज मैनेजमेंट की व्यवस्था बनाई गई है। इस योजना में शहरी क्षेत्र में सेफ्टी टैंक व नालियों को सेक्शन मशीन से जोड़ा जाएगा। इस पानी का ट्रीटमेंट कर उसे नाला, खेत अथवा नदियों में छोड़ा जाएगा। इससे शहर की जल निकास की समस्या समाप्त होगी। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणि भूषण त्रिपाठी ने कहा कि शहर में सेफटाज मैनेजमेंट का क्रियान्वयन होगा। इसके लिए जल निगम को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है। क्योंकि इसके संचालन को नालियों में पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जो घरों के सेफ्टी टैंक से जुड़ा होगा। यहां से पानी खींचकर उसका ट्रीटमेंट होगा, फिर इसे नदियों व खेतों में छोड़ा जाएगा। योजना का सबसे बड़ा लाभ भू-गर्भ जल को प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा।
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अमृत योजना से जुड़े 40 जिलों में क्रियान्वित होगी योजना
शुरू हुआ सर्वे, सेक्शन मशीन के माध्यम से जुड़ेंगे सेफ्टी टैंक
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सीवर ट्रीटमेंट योजना में जमीन की तलाश अभी तक पूरी नहीं हो सकी। शासन ने जिले के नगर निकायों सहित सूबे के 40 जिलों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना को निरस्त कर दिया है। यहां सेफटाज मैनेजमेंट से पानी निकास की व्यवस्था संचालित होगी। जिले में पानी निकास की सुचारु व्यवस्था नहीं है। इसके लिए नाले तो हैं, मगर नालों में सिल्ट व कूड़ा के चलते यह जाम हो जाते हैं, जिससे गलियों व मोहल्लों की नालियां उफना जाती हैं। बारिश में तो स्थिति और दयनीय हो जाती है। क्योंकि नालों में बहाव न होने के कारण पानी सड़क तक पहुंच जाता है। तमाम घरों में नाली का गंदा पानी घुस जाता है। इन स्थितियों को लेकर प्रशासन ने डेढ़ दशक पहले शहरी क्षेत्र में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापना के प्रयास शुरू किए। पहली बार प्रस्ताव शासन को गया तो वहां इस पर अधिक खर्च की बात कह कर फाइल लौटा दी गई। इसी वर्ष फिर से उसे सुधार कर भेजा गया, मगर शासन में यह लंबित हो गया। नगर पालिका व प्रशासन शहर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए प्रयासरत रहा, मगर सब कुछ हो जाने के बाद जमीन की कमी इसमें बाधा बन गई। किसी तरह वर्ष भर पहले पालिका को जमीन मिली भी मगर तकनीकी कारणों से वह निरस्त हो गई। मामला लटक गया। इस बीच शासन ने जिले को अमृत योजना में शामिल किया और अब यहां इसी योजना के तहत पानी निकास के लिए सेफटाज मैनेजमेंट की व्यवस्था बनाई गई है। इस योजना में शहरी क्षेत्र में सेफ्टी टैंक व नालियों को सेक्शन मशीन से जोड़ा जाएगा। इस पानी का ट्रीटमेंट कर उसे नाला, खेत अथवा नदियों में छोड़ा जाएगा। इससे शहर की जल निकास की समस्या समाप्त होगी। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणि भूषण त्रिपाठी ने कहा कि शहर में सेफटाज मैनेजमेंट का क्रियान्वयन होगा। इसके लिए जल निगम को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है। क्योंकि इसके संचालन को नालियों में पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जो घरों के सेफ्टी टैंक से जुड़ा होगा। यहां से पानी खींचकर उसका ट्रीटमेंट होगा, फिर इसे नदियों व खेतों में छोड़ा जाएगा। योजना का सबसे बड़ा लाभ भू-गर्भ जल को प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा।