फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   मिलों में फंसा है पीसीएफ के 6.50 करोड़ का चावल 16-56-01

मिलों में फंसा है पीसीएफ के 6.50 करोड़ का चावल 16-56-01

Tue, 22 Jan 2019 11:55 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Jan 2019 11:55 PM IST
विज्ञापन
मिलों में फंसा है पीसीएफ के 6.50 करोड़ का चावल 16-56-01
मिलों में फंसा है पीसेेेेेेेेेेेेीएफ के 6.50 करोड़ का चावल
विज्ञापन

22 मिलरों के खिलाफ आरसी के बावजूद नहीं हो पाई वसूली
वसूली के सारे हथकंडों पर भारी पड़ रही जिम्मेदारों की उपेक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। धान खरीद के बाद राइस मिलरों को कुटाई के लिए उसे दिया जाता है। इसके बाद राइस मिलर की जिम्मेदारी है कि वे कूटा गया चावल एफसीआई गोदाम को दें। यह क्रम हर वर्ष धान खरीद के साथ होता रहा है, मगर वर्ष 2011-12 में धान खरीद के बाद तकनीकी संकट के चलते करोड़ों रुपये कस्टम मिलिंग राइस यानी सरकारी चावल फंस गया। इसमें पिछले वर्ष तक पीसीएफ का 6.50 करोड़ का सरकारी चावल फंसा हुआ है। हालांकि पिछले वर्ष यानी वर्ष 2017-18 के बकाया में से ज्यादातर चावल की वसूली हो चुकी है, मगर अभी भी उस वर्ष का करीब 1.15 करोड़ रुपये फंसा है।
पीसीएफ ने धान खरीद के बाद वर्ष 2011-12 में संबद्ध 14 राइस मिलों धान उपलब्ध कराया। इसका कुल चावल मूल्य 2.33 करोड़, वर्ष 2013-14 में आठ राइस मिलों को 2.96 करोड़ तथा वर्ष 15-18 में चार राइस मिलों को 1.15 करोड़ का चावल अब तक भारतीय खाद्य निगम के गोदाम तक नहीं पहुंच सका है। चावल की वसूली को लेकर बार-बार निर्देश के बावजूद वर्ष 11-12 व 12-13 के चावल वापसी नहीं किया तो पीसीएफ ने इनमें से 22 के खिलाफ आरसी जारी कर दिया, मगर इस आरसी का भी उन पर कोई प्रभाव नहीं है। खबर है कि आरसी के बाद मिलरों पर राजस्व विभाग ने कोई दबाव नहीं बनाया। नतीजतन, राइस मिलर आरसी को भी नजरंदाज कर गए हैं। हालांकि, शासन ने अब सरकारी चावल की वसूली को लेकर तेवर सख्त कर दिए हैं, जिस पर पीसीएफ पिछले वर्ष के चावल वसूली को चार राइस मिलरों पर दबाव बढ़ा दिया है। इससे उस वर्ष का अधिकांश धन तो जमा हो गया है, मगर अब भी 1.15 करोड़ रुपये बकाया है, मगर पुराने बकाया को लेकर अब भी राइस मिलर चुप्पी साधे हुए हैं। राइस मिलरों की मानें तो जिस समय उन्हें कुटाई के लिए दिया गया था तो वे तत्काल इसे जमा करने गए थे, मगर एफसीआई में गोदाम खाली न होने के कारण उन्हें वापस कर दिया गया। प्रयास के बावजूद एफसीआई बार-बार टालती रही, जिससे गोदामों में रखा चावल खराब हो गया। अब जब चावल खराब हो गया तो उन पर सारी जिम्मेदारी थोप कर वसूली की जा रही है।
विज्ञापन

पीसीएफ के जिला प्रबंधक अमित चौधरी कहते हैं कि जिन राइस मिलरों के खिलाफ आरसी जारी है वे बकाया जमा नहीं कर रहे हैं और उन पर दबाव भी नहीं बनाया जा सकता, मगर वर्ष 2017-18 के बकाया चावल की वसूली की जा रही है। राइस मिलर सहयोग कर रहे हैं। वे धीरे-धीरे बकाया जमा कर रहे हैं। जिन पर आरसी जारी है उनसे राजस्व विभाग वसूली करेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed