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टूट रही उम्मीद, छह हजार में मात्र 120 को रोजगार
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टूट रही उम्मीद, छह हजार में मात्र 120 को रोजगार
शहरी आजीविका मिशन का हाल
बेरोजगारों से वसूला गया 12 लाख शुल्क
छिटपुट लोगों को नौकरी, 5880 को रोजगार का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सरकार की अति महत्वाकांक्षी शहरी आजीविका मिशन का जिले में बुरा हाल है। यूं तो इसमें अब तक छह हजार बेरोजगारों का पंजीकरण कर 12 लाख रुपये शुल्क वसूला गया है, मगर मिशन केवल 120 को ही रोजगार उपलब्ध करा पाया है। हालांकि अधिकारी इसे बेहतर उपलब्धि करार देेते हैं, मगर अब भी 5880 को रोजगार का इंतजार है। इसके चलते अब इन बेरोजगारों की उम्मीद टूट रही है।
शहरी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने शहरी आजीविका मिशन संचालित किया है। योजना के तहत 2016 में इसकी गाड़ी पटरी पर उतरी, मगर विभागीय अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते संस्था इसे संचालित नहीं कर सकी। बाद में संस्था से कार्य हटाकर किसी और को दे दिया गया। शहरी आजीविका मिशन को बेहतर बनाने के सारे उपाय किए गए, मगर यह केवल अपने आय बढ़ाने में जुटा है। क्योंकि अब तक इस संस्था ने प्रति व्यक्ति दो सौ रुपये शुल्क लेकर छह हजार बेरोजगारों को रोजगार का लालीपाप देकर पंजीकरण कराया और कुल बारह लाख रुपये एकत्रित किए, मगर जैसे-तैसे अब तक पंजीकृत बेरोजगारों में से मात्र दो फीसदी को रोजगार मिल सका है, जबकि 98 प्रतिशत अभी भी लाइन में हैं। हालांकि इन बेरोजगारों को उम्मीद टूट रही है क्योंकि उन्हें रोजगार कैसे मिलेगा न तो संस्था बता पा रही है और न जिम्मेदार। नतीजतन रोजगार तो मिल नहीं रहा और हर दिन पंजीकरण कराने वालों की संख्या बढ़ रही है, जिससे संस्था की आय तो बढ़ रही है मगर बेरोजगार परेशान हैं। परियोजना निदेशक डूडा सतीश सिंह ने कहा कि प्रदेश में अपना ही ऐसा जिला है, जहां संस्था काम कर रही है। अधिकांश जिलों में तो ताला लटक गया है। यहां संस्था ने अपनी आय बढ़ाई है। हां अभी रोजगार की दिशा में कोई विशेष पहल नहीं हो सकी है, मगर 120 को संस्था के माध्यम से रोजगार मिला है। योजना में पंजीकृत लोगों को रोजगार उपलब्ध हो इसका प्रयास किया जाएगा।
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शहरी आजीविका मिशन का हाल
बेरोजगारों से वसूला गया 12 लाख शुल्क
छिटपुट लोगों को नौकरी, 5880 को रोजगार का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सरकार की अति महत्वाकांक्षी शहरी आजीविका मिशन का जिले में बुरा हाल है। यूं तो इसमें अब तक छह हजार बेरोजगारों का पंजीकरण कर 12 लाख रुपये शुल्क वसूला गया है, मगर मिशन केवल 120 को ही रोजगार उपलब्ध करा पाया है। हालांकि अधिकारी इसे बेहतर उपलब्धि करार देेते हैं, मगर अब भी 5880 को रोजगार का इंतजार है। इसके चलते अब इन बेरोजगारों की उम्मीद टूट रही है।
शहरी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने शहरी आजीविका मिशन संचालित किया है। योजना के तहत 2016 में इसकी गाड़ी पटरी पर उतरी, मगर विभागीय अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते संस्था इसे संचालित नहीं कर सकी। बाद में संस्था से कार्य हटाकर किसी और को दे दिया गया। शहरी आजीविका मिशन को बेहतर बनाने के सारे उपाय किए गए, मगर यह केवल अपने आय बढ़ाने में जुटा है। क्योंकि अब तक इस संस्था ने प्रति व्यक्ति दो सौ रुपये शुल्क लेकर छह हजार बेरोजगारों को रोजगार का लालीपाप देकर पंजीकरण कराया और कुल बारह लाख रुपये एकत्रित किए, मगर जैसे-तैसे अब तक पंजीकृत बेरोजगारों में से मात्र दो फीसदी को रोजगार मिल सका है, जबकि 98 प्रतिशत अभी भी लाइन में हैं। हालांकि इन बेरोजगारों को उम्मीद टूट रही है क्योंकि उन्हें रोजगार कैसे मिलेगा न तो संस्था बता पा रही है और न जिम्मेदार। नतीजतन रोजगार तो मिल नहीं रहा और हर दिन पंजीकरण कराने वालों की संख्या बढ़ रही है, जिससे संस्था की आय तो बढ़ रही है मगर बेरोजगार परेशान हैं। परियोजना निदेशक डूडा सतीश सिंह ने कहा कि प्रदेश में अपना ही ऐसा जिला है, जहां संस्था काम कर रही है। अधिकांश जिलों में तो ताला लटक गया है। यहां संस्था ने अपनी आय बढ़ाई है। हां अभी रोजगार की दिशा में कोई विशेष पहल नहीं हो सकी है, मगर 120 को संस्था के माध्यम से रोजगार मिला है। योजना में पंजीकृत लोगों को रोजगार उपलब्ध हो इसका प्रयास किया जाएगा।
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