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फरमान बेअसर, नहीं बदली जाती चादरें
Updated Sat, 20 Oct 2018 11:02 PM IST
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बस्ती। शासन ने स्वास्थ्य महकमे को हर दिन मरीजों के चादर बदलने का फरमान दे रखा है। लेकिन जिले के सरकारी अस्पतालों में यह आदेश बेअसर है। कभी कभी चादर बदलवाने के लिए मरीज के तीमारदारों को स्टाफ से नोकझोंक तक करना पड़ता है। जबकि यह फरमान है कि अस्पताल के बेडों पर दिन के हिसाब से चादरों को रंग होना चाहिए। यानी हर दिन बदली जानी चाहिए।
जिला अस्पताल हो या महिला चिकित्सालय अथवा सीएचसी व पीएचसी यहां सिर्फ सफेद चादर का ही प्रयोग हो रहा है। गंदगी होने से मरीज दूसरी बीमारियों के संक्रमण में आ सकता है। यहां के सरकारी अस्पतालों में बेड पर पड़े पुरानी चादरों पर ही नए मरीजों को शिफ्ट कर इलाज किया जाता है। चादर बदलवाने के लिए अक्सर तीमारदारों की स्टाफ से नोकझोंक भी होती रहती है। जबकि चादरों की धुलाई के लिए एजेंसियों को टेंडर दिया जाता है।हकीकत यही है कि मरीज की मृत्यु या डिस्चार्ज होने के बाद भी कई बार चादरें नहीं बदली जाती हैं। ऐसा अक्सर जिला अस्पताल और महिला चिकित्सालय में हो रहा है। तीमारदार सहूलियत से इलाज करवाने के लिए खुद की चद्दरें प्रयोग में लाते हैं। अस्पताल प्रशासन के लोग भी इस पर ध्यान नहीं देते हैं।
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अक्सर बेड पर पड़ी चद्दरें नहीं बदलने या नोकझोंक पर एडी हेल्थ रंग जी द्विवेदी कहते हैं चादरों के संबंध में निर्देश दिए गए है। कमियों को सुधारा जाएगा। यदि अस्पताल स्टॉफ ऐसा कर रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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