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जेल में 500 बंदियों ने रखा नवरात्र का व्रत
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जेल में 500 बंदियों ने रखा नवरात्र का व्रत
कारागार प्रशासन ने उपलब्ध कराया फलाहर व पूजा सामग्री
व्रत रखने वालों में 53 महिला बंदी भी शामिल
बस्ती। बंदी भले ही समाज की मुख्यधारा से कटकर जेल में हों, लेकिन वे भी धार्मिक व आध्यात्मिक भावना से ओतप्रोत हैं। नवरात्र के पहले दिन जेल के 525 बंदियों ने व्रत रखकर देवी की आराधना की। इनमें 53 महिला बंदी शामिल हैं। कारागार प्रशासन ने इन बंदियों के लिए फलाहार की भी व्यवस्था कर रहा है।
उन्हें पूजन सामग्री के साथ ही अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराया गया है। बंदियों के पूजा-पाठ में कोई खलल न पड़े, इस बात पर भी जेल प्रशासन ध्यान दे रहा है। उन्हें नियमित रूप से 500 ग्राम उबले हुए आलू के साथ दो केले, आधा लीटर दूध व अन्य फलाहार उपलब्ध कराया जा रहा। फलाहार बनाने में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जेल अधीक्षक डीके पांडेय ने बताया कि बंदियों की आस्था का पूरा सम्मान किया जा रहा है। नवरात्र में कई बंदियों ने नौ दिन का व्रत शुरू किया है। कई बंदी पहले और आखिरी दिन व्रत रखेंगे। ऐसे बंदियों के लिए पूजन सामग्री के साथ फलाहार की व्यवस्था की गई है।
जेल में है समय माता का मंदिर
ब्रिटिश काल सन 1888 में निर्मित जिला जेल के भीतर ईशान कोण पर समय माता का स्थान है। मान्यता है कि यहां आस्था रखने वालों की मन्नत पूरी होती है। जेल प्रशासन की देखरेख में यहां पूजा-पाठ कराया जाता है। भूअर निरंजनपुर की ग्राम पंचायत से सटे जेल होने के कारण यहां के स्थानीय नागरिक कारागार की चहारदीवारी के बाहर मंदिर की दिशा की ओर मत्था टेक कर समय माता की पूजापाठ करते हैं।
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कारागार प्रशासन ने उपलब्ध कराया फलाहर व पूजा सामग्री
व्रत रखने वालों में 53 महिला बंदी भी शामिल
बस्ती। बंदी भले ही समाज की मुख्यधारा से कटकर जेल में हों, लेकिन वे भी धार्मिक व आध्यात्मिक भावना से ओतप्रोत हैं। नवरात्र के पहले दिन जेल के 525 बंदियों ने व्रत रखकर देवी की आराधना की। इनमें 53 महिला बंदी शामिल हैं। कारागार प्रशासन ने इन बंदियों के लिए फलाहार की भी व्यवस्था कर रहा है।
उन्हें पूजन सामग्री के साथ ही अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराया गया है। बंदियों के पूजा-पाठ में कोई खलल न पड़े, इस बात पर भी जेल प्रशासन ध्यान दे रहा है। उन्हें नियमित रूप से 500 ग्राम उबले हुए आलू के साथ दो केले, आधा लीटर दूध व अन्य फलाहार उपलब्ध कराया जा रहा। फलाहार बनाने में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जेल अधीक्षक डीके पांडेय ने बताया कि बंदियों की आस्था का पूरा सम्मान किया जा रहा है। नवरात्र में कई बंदियों ने नौ दिन का व्रत शुरू किया है। कई बंदी पहले और आखिरी दिन व्रत रखेंगे। ऐसे बंदियों के लिए पूजन सामग्री के साथ फलाहार की व्यवस्था की गई है।
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जेल में है समय माता का मंदिर
ब्रिटिश काल सन 1888 में निर्मित जिला जेल के भीतर ईशान कोण पर समय माता का स्थान है। मान्यता है कि यहां आस्था रखने वालों की मन्नत पूरी होती है। जेल प्रशासन की देखरेख में यहां पूजा-पाठ कराया जाता है। भूअर निरंजनपुर की ग्राम पंचायत से सटे जेल होने के कारण यहां के स्थानीय नागरिक कारागार की चहारदीवारी के बाहर मंदिर की दिशा की ओर मत्था टेक कर समय माता की पूजापाठ करते हैं।
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