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नदी से बंधे को बचाने में गोलमाल

Sun, 16 Jul 2017 11:27 PM IST
Updated Sun, 16 Jul 2017 11:27 PM IST
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नदी से बंधे को बचाने में गोलमाल
आधे घंटे की तबाही, फिर नदी का रुख बदला
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कुदरहा/विक्रमजोत/बस्ती।
घाघरा के रुख में रविवार को तब्दीली दोपहर बाद आई। सुबह आठ बजे पिपरपाती के पास कटान शुरू हुई। इसके चलते स्पर छह और सात के बीच बंधे के स्लोप को क्षति पहुंची साथ ही ठोकर चार की नोज कट गई। इसके बाद नदी के रुख में बदलाव आया। अयोध्या स्थित केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक नदी खतरे के निशान से 14 सेमी नीचे है। शनिवार को आधे घंटे की तबाही बाद बाढ़खंड के अधिकारियों की नींद टूटी। डैमज कंट्रोल का काम किया जा रहा है।
शनिवार को 3:30 बजे के आसपास घाघरा ने स्पर पांच के पास 50 मीटर में कटान शुरू की। देखते ही देखते चार मीटर बांध नदी में समा गया। बांध पर कटान सुनकर अफसर भी पहुंचे। कैंप कर रहे जेई राघवेंद्र कुमार नायक और आरपी पांडेय ने क्षतिग्रस्त हिस्से में बोल्डर की भराई शुरू कर दी। रविवार को सुबह आठ बजे एक बार फिर नदी आक्रामक हुई। ठोकर नं. चार की नोज और स्पर सात के पास बंधे का ढाल कटान की चपेट में आ गया। पिपरपाती मुस्तहकम के प्रधान महंथ यादव का कहना है कि विभाग आकस्मिक कार्य कराने में रुचि रखता है जबकि बंधे की सुरक्षा के लिए स्थायी और ठोस काम होना चाहिए। सहायक अभियंता बलराम यादव का कहना है कि बंधे के क्षतिग्रस्त हिस्से में पूरी रात काम कराया गया। अब सब कुछ अनुकूल है। संसाधन और मजदूर पर्याप्त संख्या में मौजूद है।
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निर्माणाधीन स्पर में भी दरार पड़ी
विक्रमजोत। घाघरा का जलस्तर स्थिर हो गया है। मगर कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक सहित बाघानाला, रानीपुर कठवनिया, भदोई में कटान जारी है। कें द्रीय जल आयोग के कार्यालय के अनुसार रविवार को जलस्तर 92.590 पर रहा जो खतरे के निशान से 14 सेमी नीचे है। विक्रमजोत-लोलपुर बंधे के 14 स्परों से एक दर्जन से अधिक गांवों की सुरक्षा होती है। कल्याणपुर, भरथापुर और सहजौरा पाठक बंाधविहीन गांव है। राजनीति के चलते इन गांवों के पास बांध नहीं बनाया जा सका। 14 स्परों (ठोकरों) में से चार का अगला हिस्सा नदी में समा चुका है। निर्माणाधीन भदोई गांव के सामने के स्पर में भी दरारें पड़ने लगी हैं। चार करोड़ की लागत से नये स्पर और बांध का मरम्मत कार्य हो रहा है।
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चारा संकट गहराया
विक्रमजोत।
घाघरा के पानी से मैरुंड हुए सहजौरा पाठक में कुल 13 घर हैं। इसकी आबादी 80 की है। गांव के तेजबहादुर, माझीलाल, गोपाल, यशोदरा, लालमन, हीरा आदि ने बताया कि बांध पर मड़ई डालकर दहशत में दिन-रात बिता रहे हैं। जिनके पास दूसरा घर नहीं है वे रिश्तेदारों के घरों में पनाह लिए हैं। कुछ तो पालतू पशुओं को बेचकर शहर कमाने चले गए हैं। पीड़ितों का कहना है कि हमारे जानवर अब भी गांव में ही हैं। राशन और पशुओं के चारे की विकट समस्या हो गई है। प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ यह कहने आए थे कि गांव छोड़ दो मगर कोई जरूरतों को पूरा करने का सहारा नहीं दे रहा है। गृहस्थी के समान ढोकर भाग रहे हैं और फिर पानी लौट जाने पर वापस पुराने चले जाते हैं।

चांदपुर और पारा गांव के पास बने स्पर पर बना दबाव
दुबौलिया। घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से वीडी बांध पर दबाव बना हुआ है। बांध की सुुरक्षा के लिए बने स्पर बैठ रहे हैं। चांदपुर और पारा में बने 36 छोटे-बड़े स्पर से धारा टकराकर प्रवाहित हो रही है। करीब दस स्पर बैठ गए हैं। पारा गांव के पास नदी बंधे से कटान कर रही है। इससे ग्रामीणों में दहशत है। कटान से पेड़ नदी की धारा में गिर गए। बंधे की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रशासन के उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं।

फोटो
नदी से बंधे को बचाने में गोलमाल की बू
बस्ती।
करोड़ों रुपये के बंधे को बचाने के लिए निर्माण किए जा रहे स्पर की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। गुणवत्ताविहीन होने के कारण स्पर या तो क्षतिग्रस्त हो जा रहे हैं या फिर बह जा रहे हैं। बाढ़ पीड़ित भी गोलमाल की कहानी बयां करते रहते हैं।

एक स्पर के निर्माण में 10 लाख रुपये से अधिक की लागत आती है। बंधे जैसे संवेदनशील मामलों में भी विभाग और ठेकेदार लापरवाही बरत रहे हैं। इस मामले को खुद डीएम अरविंद सिंह ने संज्ञान लेकर हो रही लापरवाही पर नाराजगी जताई है। कार्रवाई करने को चेता भी चुके हैं। स्थानीय लोग भी बताते हैं कि बाढ़ और बचाव के नाम पर अफसर जेब गरम करते हैं। वैसे तो जिले में कुल 15 बंधें हैं मगर तीन बंधें सबसे अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। इनमें वीडी बांध, गौरा-सैफाबाद बांध और कलवारी-रामपुर बांध् शामिल हैं। इन बंधों पर नदी सबसे अधिक कटान करती है इसी कटान को रोकने के लिए स्पर का निर्माण किया जाता है। एक तरह से स्पर न सिर्फ बंधें को बचाते हैं बल्कि बंधे के टूट जाने की स्थिति में गांव को लीन होने से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। शासन और प्रशासन का मानना हैं कि बंधे से स्पर की अधिक मजबूती जरूरी है। अब जरा विभाग और ठेकेदार की संवेदनशीलता देखिए। अभी बाढ़ पूरी तरह आई ही नहीं और स्पर क्षतिग्रस्त होने लगे, उसके नोज बहने लगे। जो रिपोर्ट सामने आई है, उनमें पारा में छोटे-बडे़ 12, चांदपुर में एक, भिउरा में दो, भदोई और कल्याणपुर में चार सहित कुल स्पर या तो क्षतिग्रस्त हो गए या फिर बह गए। इसके चलते इन बंधें को ही खतरा हो गया। स्पर बहने या क्षतिग्रस्त होने के पीछे विभाग के एक ठेकेदार का कहना है कि आधी-अधूरी पिचिंग होने से स्पर बह जाता है। अगर विभाग यही पिचिंग मई तक कर ले तो स्पर कभी नहीं बहेगा और बंधे को खतरा नहीं रहेगा। विभाग गुणवत्ता पर भी ध्यान नहीं देता। डीएम अरविंद कुमार सिह कहते हैं कि बाढ़ खंड के अधिकारी और ठेकेदार कार्यो के प्रति लापरवाही बरत रहे हैं, धन उपलब्ध कराने के बाद भी समय से कार्य पूरा नहीं कराया जा रहा है। कार्यों की गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। बताया कि इसके लिए चेतावनी जारी कर दी है। कहा गया है कि अगर कहीं से बाढ़ कार्यों में लापरवाही की गई तो कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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