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मजदूरों की कमी से गन्ना छिलाई में संकट में
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Sun, 09 Dec 2018 09:56 PM IST
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बभनान चीनी मिल क्षेत्र में अकेले गन्ना छिलाई करता किसान।
- फोटो : अमर उजाला
बभनान। चीनी मिल परिक्षेत्र के किसानों का नकदी फसल गन्ना है। यहां के किसान अपने रकबे के आधे से अधिक हिस्से पर गन्ने की बुवाई करते हैं। चीनी मिल के पेराई सत्र शुरू हुए 20 दिन का समय बीत गया है, पर क्षेत्र में अभी तक भरपूर संख्या में बाहरी श्रमिक गन्ना छिलाई के लिए नहीं पहुंचे हैं, जिससे गन्ने की छिलाई करने में किसानों को पसीना छूट रहा है।
क्षेत्र में ज्यादा रकबे मेें गन्ने की बुवाई होने के चलते यहां गन्ना छिलाई के लिए बिहार, पीलीभीत, खीरी-लखीमपुर, सीतापुर और नेपाल आदि जगहों से मजदूर आते हैं। मौजूदा पेराई सत्र में अभी तक बाहरी मजदूर इक्का-दुक्का जगहों पर ही आए हैं, जिसके चलते किसान परेशान हैं। जिन किसानों को गन्ने की पर्ची मिल जा रही है, वे जब मजदूरों के अभाव में गन्ने की छिलाई नहीं करा पा रहे हैं तो उन्हें समितियों मेें जमा कर दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि बाहरी मजदूरों के न आने से जो किसान केवल मजदूरों पर निर्भर हैं, उनमें से अधिकांश की अभी छिलाई शुरू ही नहीं हो पाई है। जबकि जो किसान खुद व परिवार के सदस्यों के साथ छिलाई कर रहा है। उसका गन्ना किसी तरह से चीनी मिल तक पहुंच पा रहा है। चूंकि अधिकांश किसानों ने गन्ने की खेती की है, इसलिए लोकल मजदूरों की काफी कमी हो जाती है। किसान मजदूर आने के इंतजार में हैं। किसान रमाकांत मिश्र, राम दास, शिव बहादुर और देव कुमार आदि का कहना है कि यदि मजदूर आने में विलंब करेंगे तो उनकी पेड़ी के खेतों में गेहू बोने की हसरत अधूरी रह जाएगी।
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क्षेत्र में ज्यादा रकबे मेें गन्ने की बुवाई होने के चलते यहां गन्ना छिलाई के लिए बिहार, पीलीभीत, खीरी-लखीमपुर, सीतापुर और नेपाल आदि जगहों से मजदूर आते हैं। मौजूदा पेराई सत्र में अभी तक बाहरी मजदूर इक्का-दुक्का जगहों पर ही आए हैं, जिसके चलते किसान परेशान हैं। जिन किसानों को गन्ने की पर्ची मिल जा रही है, वे जब मजदूरों के अभाव में गन्ने की छिलाई नहीं करा पा रहे हैं तो उन्हें समितियों मेें जमा कर दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि बाहरी मजदूरों के न आने से जो किसान केवल मजदूरों पर निर्भर हैं, उनमें से अधिकांश की अभी छिलाई शुरू ही नहीं हो पाई है। जबकि जो किसान खुद व परिवार के सदस्यों के साथ छिलाई कर रहा है। उसका गन्ना किसी तरह से चीनी मिल तक पहुंच पा रहा है। चूंकि अधिकांश किसानों ने गन्ने की खेती की है, इसलिए लोकल मजदूरों की काफी कमी हो जाती है। किसान मजदूर आने के इंतजार में हैं। किसान रमाकांत मिश्र, राम दास, शिव बहादुर और देव कुमार आदि का कहना है कि यदि मजदूर आने में विलंब करेंगे तो उनकी पेड़ी के खेतों में गेहू बोने की हसरत अधूरी रह जाएगी।
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