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जांच रिपोर्ट से शिकायतकर्ता असंतुष्ट, आपति
Updated Fri, 12 Oct 2018 12:29 AM IST
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जांच रिपोर्ट से शिकायतकर्ता असंतुष्ट, आपत्ति
जुलाई 2018 में प्रसव के बाद हो गई थी नवजात की मौत
चार डॉक्टरों की टीम को सौंपी गई थी प्रकरण की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। कस्बे से सटे निजी अस्पताल पर प्रसव के बाद शिशु की मौत के मामले की जांच रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता ने आपत्ति उठाई है। उसने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से पुनर्जांच की मांग की है। उसकी आपत्ति को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने स्वीकार करते हुए मामले में न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है।
सिद्धार्थनगर जनपद के साड़ी खुर्द निवासी शिव प्रसाद चौबे की पत्नी आशा ने छह जुलाई 2018 को रुधौली के एक हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद एक बच्चे को जन्म दिया था। जन्म के थोड़ी देर बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने नवजात को जिले के एक निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया था और बाद में बच्चे की मौत हो गई थी। मामले में नवजात के पिता शिव प्रसाद ने अस्पताल प्रबंधन पर धोखाधड़ी एवं समय पूर्व प्रसव का आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिया था। प्रकरण में सीएमओ के निर्देश पर चार सदस्यीय टीम बनी। इसमें एसीएमओ डॉ. फक्रेयार हुसैन, डॉ. सीएल कन्नौजिया, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सचिन कुमार व डीएलओ डॉ. डीपी गुप्त ने जांच की और 29 सितंबर को रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट पर शिव प्रसाद चौबे ने आपत्ति उठाई है। आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान टीम ने अस्पताल का कोई भी अभिलेख जब्त नहीं किया, बल्कि नोटिस देकर अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। जांच रिपोर्ट में यह भी कहीं नहीं उल्लिखित है कि हॉस्पिटल में कौन सी सुविधा हैं, हॉस्पिटल पर मौजूद ओटी (ऑपरेशन थियेटर) में कौन-कौन से उपकरण हैं और मुख्य डॉक्टर कौन है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जो सहमति पत्र अस्पताल की ओर से दिखाया जा रहा है। वह फर्जी है एवं सहमति पत्र पर धोखे से हस्ताक्षर करवाए गए थे। इसके साथ ही ऑपरेशन के समय ऑपरेशन टीम का नायक कौन था और उसके सदस्य कौन-कौन थे। इस बिंदु का भी जांच रिपोर्ट में उल्लेख नहीं किया गया है। जांच के दौरान उन्हें सूचित भी नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने जांच के क्रम में बयान लेते समय सीडी तैयार किए जाने की बात उठाई है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम अमनदीप डुली ने कहा कि बुधवार को शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था। इन दौरान शिकायतकर्ता की ओर से जांच में की गई कमियों के संबंध में एक पत्र दिया गया। मामले की फिर से जांच करवाई जाएगी।
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जुलाई 2018 में प्रसव के बाद हो गई थी नवजात की मौत
चार डॉक्टरों की टीम को सौंपी गई थी प्रकरण की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। कस्बे से सटे निजी अस्पताल पर प्रसव के बाद शिशु की मौत के मामले की जांच रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता ने आपत्ति उठाई है। उसने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से पुनर्जांच की मांग की है। उसकी आपत्ति को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने स्वीकार करते हुए मामले में न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है।
सिद्धार्थनगर जनपद के साड़ी खुर्द निवासी शिव प्रसाद चौबे की पत्नी आशा ने छह जुलाई 2018 को रुधौली के एक हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद एक बच्चे को जन्म दिया था। जन्म के थोड़ी देर बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने नवजात को जिले के एक निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया था और बाद में बच्चे की मौत हो गई थी। मामले में नवजात के पिता शिव प्रसाद ने अस्पताल प्रबंधन पर धोखाधड़ी एवं समय पूर्व प्रसव का आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिया था। प्रकरण में सीएमओ के निर्देश पर चार सदस्यीय टीम बनी। इसमें एसीएमओ डॉ. फक्रेयार हुसैन, डॉ. सीएल कन्नौजिया, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सचिन कुमार व डीएलओ डॉ. डीपी गुप्त ने जांच की और 29 सितंबर को रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट पर शिव प्रसाद चौबे ने आपत्ति उठाई है। आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान टीम ने अस्पताल का कोई भी अभिलेख जब्त नहीं किया, बल्कि नोटिस देकर अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। जांच रिपोर्ट में यह भी कहीं नहीं उल्लिखित है कि हॉस्पिटल में कौन सी सुविधा हैं, हॉस्पिटल पर मौजूद ओटी (ऑपरेशन थियेटर) में कौन-कौन से उपकरण हैं और मुख्य डॉक्टर कौन है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जो सहमति पत्र अस्पताल की ओर से दिखाया जा रहा है। वह फर्जी है एवं सहमति पत्र पर धोखे से हस्ताक्षर करवाए गए थे। इसके साथ ही ऑपरेशन के समय ऑपरेशन टीम का नायक कौन था और उसके सदस्य कौन-कौन थे। इस बिंदु का भी जांच रिपोर्ट में उल्लेख नहीं किया गया है। जांच के दौरान उन्हें सूचित भी नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने जांच के क्रम में बयान लेते समय सीडी तैयार किए जाने की बात उठाई है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम अमनदीप डुली ने कहा कि बुधवार को शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था। इन दौरान शिकायतकर्ता की ओर से जांच में की गई कमियों के संबंध में एक पत्र दिया गया। मामले की फिर से जांच करवाई जाएगी।
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