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कांवेंट की तर्ज पर विद्यालय भवन, बच्चों का इंतजार
Fri, 11 Jan 2019 10:46 PM IST
राकेश पांडेय
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Published by: राकेश पांडेय
Updated Fri, 11 Jan 2019 10:46 PM IST
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सजकर तैयार प्राथमिक विद्यालय ओठघनपुर।
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। यूं तो सरकार प्राथमिक विद्यालयों की सूरत बदलने की कोशिश में जुटी है, मगर जिम्मेदार कभी धन तो कभी संसाधन का रोना रोते हैं। ओठघनपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय पर शायद किसी की नजर नहीं पड़ी हो। विद्यालय भवन को कांवेंट की तर्ज पर बनाया गया है। चमकते रंग-बिरंगे भवन में संसाधन भी भरपूर हैं, मगर शिक्षकों की कमी के चलते पठन-पाठन प्रभावित हो गया। लकदक भवन व संसाधनों से भरपूर इस विद्यालय में बच्चे नहीं हैं।
इच्छा शक्ति से कोई भी काम आसान हो जाता है। इसी इच्छा शक्ति से कभी जीर्ण-शीर्ण नजर आने वाले ओठघनपुर के प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर को वहां के प्रधान रामतौल यादव ने संवार दी है। एक वर्ष पूर्व विद्यालय की सूरत देखने के लायक नहीं थी। बरसात के मौसम में पूरे परिसर में पानी भर जाने से बच्चे विद्यालय नहीं आते थे। जिसको देखते हुए प्रधान ने इसकी सूरत बदलने के लिए निश्चय किया। जिससे बच्चों के लिए डीलक्स शौचालय, वाटर टेप, खेलने के लिए मैदान, सुसज्जित कमरे और चारों ओर से चाहरदीवारी करा दी। विद्यालय भवन को रंगरोगन और दीवालों पर आकर्षक चित्रकारी कराकर पूरे क्षेत्र में इसकी अलग पहचान बना दी। लेकिन शिक्षक की कमी के कारण छात्रों की संख्या में वृद्धि नही हो पा रही है। एक ही शिक्षिका एक से पांच तक के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाती है। इस कारण अभिभावक अपने बच्चों को इस विद्यालय में नहीं भेजना चाहते हैं। कहते हैं कि एक शिक्षक कितने बच्चों को पढ़ा सकती है। जिसे देखते हुए पिछले महीने एक सहायक अध्यापक की नियुुक्ति की गई। अगर शिक्षकों की संख्या बढ़ जाए तो विद्यालय में छात्राओं की संख्या बढ़ जाएगी।
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इच्छा शक्ति से कोई भी काम आसान हो जाता है। इसी इच्छा शक्ति से कभी जीर्ण-शीर्ण नजर आने वाले ओठघनपुर के प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर को वहां के प्रधान रामतौल यादव ने संवार दी है। एक वर्ष पूर्व विद्यालय की सूरत देखने के लायक नहीं थी। बरसात के मौसम में पूरे परिसर में पानी भर जाने से बच्चे विद्यालय नहीं आते थे। जिसको देखते हुए प्रधान ने इसकी सूरत बदलने के लिए निश्चय किया। जिससे बच्चों के लिए डीलक्स शौचालय, वाटर टेप, खेलने के लिए मैदान, सुसज्जित कमरे और चारों ओर से चाहरदीवारी करा दी। विद्यालय भवन को रंगरोगन और दीवालों पर आकर्षक चित्रकारी कराकर पूरे क्षेत्र में इसकी अलग पहचान बना दी। लेकिन शिक्षक की कमी के कारण छात्रों की संख्या में वृद्धि नही हो पा रही है। एक ही शिक्षिका एक से पांच तक के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाती है। इस कारण अभिभावक अपने बच्चों को इस विद्यालय में नहीं भेजना चाहते हैं। कहते हैं कि एक शिक्षक कितने बच्चों को पढ़ा सकती है। जिसे देखते हुए पिछले महीने एक सहायक अध्यापक की नियुुक्ति की गई। अगर शिक्षकों की संख्या बढ़ जाए तो विद्यालय में छात्राओं की संख्या बढ़ जाएगी।
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