{"_id":"5ba7daa2867a557ed5717cbc","slug":"201537727138-basti-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मस्तिष्क ज्वर से मासूम की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मस्तिष्क ज्वर से मासूम की मौत
Updated Sun, 23 Sep 2018 11:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मस्तिष्क ज्वर से मासूम की मौत
कलवारी मुस्तहकम की डेढ़ वर्षीय दिव्यांशी की गई जान
अमर उजाला ब्यूरो
कलवारी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरपुर क्षेत्र के कलवारी मुस्तहकम की डेढ़ वर्षीय मासूम दिव्यांशी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में रविवार को जिंदगी का जंग हार गई। जेई व एईएस को लेकर स्वास्थ्य महकमे के तमाम दावे दिव्यांशी की मौत के बाद सवालों के घेरे में आ गए हैं। कलवारी क्षेत्र जेई-एईएस की संवेदनशील सूची में है।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में कलवारी, हर्रैया व गौर को संवेदनशील सूची में शामिल किया है। यहां जेई-एईएस की 24 घंटे इलाज की व्यवस्था भी है। जिला अस्पताल में इस बीमारी से जूझ रहे बच्चों के लिए अलग से पीआईसीयू स्थापित किया गया है, जहां चिकित्सक के अलावा संसाधनों की भी उपलब्धता है। अस्पताल के जिम्मेदार भी इस वार्ड में भर्ती होने वाले बच्चों के पल-पल की खबर रखते हैं। बावजूद इसके परिवार के लोग ऐसे बीमार बच्चों को लेकर इधर-उधर भटकते हैं।
पिता पंकज अग्रहरि ने बताया कि शनिवार सुबह तेज बुखार होने पर उसे बालरोग विशेषज्ञ डॉ. एसके गौड़ के यहां लेकर गए, जहां उसका इलाज चल रहा था। शाम को जब हालत नाजुक हो गई तो डॉक्टर ने उसे मस्तिष्क ज्वर करार देेते हुए मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया। शनिवार शाम को उसे बाबा राघव दास मेडिकल कालेज गोरखपुर में भर्ती करने के बाद डॉक्टरों ने आईसीयू में रखा, जहां रात भर इलाज चला सुबह लगभग दस बजे उसकी मौत हो गई। बस्ती के सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने बताया कि जेई से मौत होने की रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। रिपोर्ट आने के बाद यदि बच्चे की मौत जेई से हुई होगी तो गांव में निरोधात्मक कार्रवाई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
कलवारी मुस्तहकम की डेढ़ वर्षीय दिव्यांशी की गई जान
अमर उजाला ब्यूरो
कलवारी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरपुर क्षेत्र के कलवारी मुस्तहकम की डेढ़ वर्षीय मासूम दिव्यांशी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में रविवार को जिंदगी का जंग हार गई। जेई व एईएस को लेकर स्वास्थ्य महकमे के तमाम दावे दिव्यांशी की मौत के बाद सवालों के घेरे में आ गए हैं। कलवारी क्षेत्र जेई-एईएस की संवेदनशील सूची में है।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में कलवारी, हर्रैया व गौर को संवेदनशील सूची में शामिल किया है। यहां जेई-एईएस की 24 घंटे इलाज की व्यवस्था भी है। जिला अस्पताल में इस बीमारी से जूझ रहे बच्चों के लिए अलग से पीआईसीयू स्थापित किया गया है, जहां चिकित्सक के अलावा संसाधनों की भी उपलब्धता है। अस्पताल के जिम्मेदार भी इस वार्ड में भर्ती होने वाले बच्चों के पल-पल की खबर रखते हैं। बावजूद इसके परिवार के लोग ऐसे बीमार बच्चों को लेकर इधर-उधर भटकते हैं।
विज्ञापन
पिता पंकज अग्रहरि ने बताया कि शनिवार सुबह तेज बुखार होने पर उसे बालरोग विशेषज्ञ डॉ. एसके गौड़ के यहां लेकर गए, जहां उसका इलाज चल रहा था। शाम को जब हालत नाजुक हो गई तो डॉक्टर ने उसे मस्तिष्क ज्वर करार देेते हुए मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया। शनिवार शाम को उसे बाबा राघव दास मेडिकल कालेज गोरखपुर में भर्ती करने के बाद डॉक्टरों ने आईसीयू में रखा, जहां रात भर इलाज चला सुबह लगभग दस बजे उसकी मौत हो गई। बस्ती के सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने बताया कि जेई से मौत होने की रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। रिपोर्ट आने के बाद यदि बच्चे की मौत जेई से हुई होगी तो गांव में निरोधात्मक कार्रवाई जाएगी।
विज्ञापन