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फोटो.. डीएम के गांव में कुपोषण युक्त बचपन
Updated Fri, 21 Sep 2018 12:37 AM IST
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डीएम के गांव में कुपोषण युक्त बचपन
पोषण मिशन से तीन वर्ष पूर्व डीएम ने गोद लिया
वजन-लंबाई में रत्तीभर भी नहीं हुआ सुधार
अमर उजाला ब्यूरो
कप्तानगंज/बस्ती। जिले में सरकारी योजनाओं के लाभ कागज में मिल रहे हैं। इस हकीकत से डीएम डॉ. राजशेखर बृहस्पतिवार को रूबरू हुए। डीएम को उस समय और भी हैरानी हुई, जब देखे कि जिला मजिस्ट्रेट के गोद लिए गांव कप्तानगंज के सिकटा में भी महज रस्म निभाई गई।
गांव के कुपोषित बच्चों के न तो स्वास्थ्य में सुधार आया, न ही उनकी लंबाई और वजन में सुधार हुआ। हालत देखकर डीएम ने सीएमओ, एसडीएम और बीडीओ को निर्देशित किया कि जिले भर के कुपोषित बच्चों का रक्त व मूत्र का नमूना लेकर पैथालॉजी परीक्षण कराएं। ताकि उन बच्चों को बेहतर चिकित्सीय उपाय करके औसत लंबाई और वजन का संतुलन ठीक किया जा सके। सिकटा गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में पांच वर्ष तक के 61 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें से 56 सामान्य श्रेणी के हैं, जिन्हें हरे रंग से चिह्नित किया गया है। चार बच्चे मामूली कुपोषित हैैं, जिनके नाम पीले निशान से हाईलाइट हैं लेकिन एक बालक गंभीर रूप से कुपोषण का शिकार होने के कारण लाल निशान से रेखांकित है। 12 महीने के बच्चों के बेहतर पोषण और विशेष देखभाल के जरिए छह से 12 महीने में ग्रीन श्रेणी यानी सामान्य बच्चों की जमात में लाया जाना है। रजिस्टर की जांच में पाया गया कि एक बच्चे को पिछले 11 महीने से उपचारित किया जा रहा है लेकिन कोई सुधार नहीं दिखा। डीएम ने इसे माता-पिता, बाल कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के लिए चिंताजनक स्थिति बताई।
शौचालय,आवास की प्रगति देखा
शौचालय निर्माण प्रगति की समीक्षा और आठ-दस निर्मित व निर्माणाधीन शौचालयों का निरीक्षण किया गया। बेसलाइन सर्वेक्षण के अनुसार गांव में 83 में 72 शौचालय तैयार और उपयोग में हैं। बाकी 11 निर्माणाधीन शौचालयों में से आठ 50 प्रतिशत और तीन का एक तिहाई काम पूरा हो चुका है। अगले सप्ताह पूरा होने का आश्वासन दिया गया। गांव में सात प्रधानमंत्री आवास तैयार है, जिनमें लाभार्थियों व उनके परिवार निवास कर रहे हैं। लेकिन आवास के लिए 52 पात्र व्यक्तियों के नाम अगस्त की खुली बैठक के बाद मंजूरी के लिए भेजे गए हैं।
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10 अक्टूबर तक बच्चों की जांच का अल्टीमेटम
महीने की सातवीं तारीख को देनी होगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जिले के सभी कुपोषित बच्चों का रक्त और मूत्र की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर बच्चों को पौष्टिक आहार और अन्य चिकित्सीय पद्धति के जरिए आदर्श स्थिति तक लाया जाएगा। इसके लिए डीएम डॉ. राजशेखर ने सीएमओ और जिला कार्यक्रम अधिकारी को 10 अक्टूबर तक का समय दिया है।
डीएम ने बृहस्पतिवार को बताया कि जिले के सभी गंभीर कुपोषित (लाल श्रेणी) के बच्चों को सीएचसी के डॉक्टरों की जवाबदेही तय की गई है। डीपीओ को सभी लाल श्रेणी के बच्चों को हर महीने की सातवीं तारीख को मासिक रिपोर्ट जमा करनी होगी। डीएम ने पीले और लाल श्रेणी के बच्चों के माता-पिता को संबोधित किया और उन्हें इन बच्चों की विशेष देखभाल करने को कहा ताकि उनका बेहतर पोषण और चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
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डीएम के गांव में कुपोषण युक्त बचपन
पोषण मिशन से तीन वर्ष पूर्व डीएम ने गोद लिया
वजन-लंबाई में रत्तीभर भी नहीं हुआ सुधार
अमर उजाला ब्यूरो
कप्तानगंज/बस्ती। जिले में सरकारी योजनाओं के लाभ कागज में मिल रहे हैं। इस हकीकत से डीएम डॉ. राजशेखर बृहस्पतिवार को रूबरू हुए। डीएम को उस समय और भी हैरानी हुई, जब देखे कि जिला मजिस्ट्रेट के गोद लिए गांव कप्तानगंज के सिकटा में भी महज रस्म निभाई गई।
गांव के कुपोषित बच्चों के न तो स्वास्थ्य में सुधार आया, न ही उनकी लंबाई और वजन में सुधार हुआ। हालत देखकर डीएम ने सीएमओ, एसडीएम और बीडीओ को निर्देशित किया कि जिले भर के कुपोषित बच्चों का रक्त व मूत्र का नमूना लेकर पैथालॉजी परीक्षण कराएं। ताकि उन बच्चों को बेहतर चिकित्सीय उपाय करके औसत लंबाई और वजन का संतुलन ठीक किया जा सके। सिकटा गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में पांच वर्ष तक के 61 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें से 56 सामान्य श्रेणी के हैं, जिन्हें हरे रंग से चिह्नित किया गया है। चार बच्चे मामूली कुपोषित हैैं, जिनके नाम पीले निशान से हाईलाइट हैं लेकिन एक बालक गंभीर रूप से कुपोषण का शिकार होने के कारण लाल निशान से रेखांकित है। 12 महीने के बच्चों के बेहतर पोषण और विशेष देखभाल के जरिए छह से 12 महीने में ग्रीन श्रेणी यानी सामान्य बच्चों की जमात में लाया जाना है। रजिस्टर की जांच में पाया गया कि एक बच्चे को पिछले 11 महीने से उपचारित किया जा रहा है लेकिन कोई सुधार नहीं दिखा। डीएम ने इसे माता-पिता, बाल कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के लिए चिंताजनक स्थिति बताई।
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शौचालय,आवास की प्रगति देखा
शौचालय निर्माण प्रगति की समीक्षा और आठ-दस निर्मित व निर्माणाधीन शौचालयों का निरीक्षण किया गया। बेसलाइन सर्वेक्षण के अनुसार गांव में 83 में 72 शौचालय तैयार और उपयोग में हैं। बाकी 11 निर्माणाधीन शौचालयों में से आठ 50 प्रतिशत और तीन का एक तिहाई काम पूरा हो चुका है। अगले सप्ताह पूरा होने का आश्वासन दिया गया। गांव में सात प्रधानमंत्री आवास तैयार है, जिनमें लाभार्थियों व उनके परिवार निवास कर रहे हैं। लेकिन आवास के लिए 52 पात्र व्यक्तियों के नाम अगस्त की खुली बैठक के बाद मंजूरी के लिए भेजे गए हैं।
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10 अक्टूबर तक बच्चों की जांच का अल्टीमेटम
महीने की सातवीं तारीख को देनी होगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जिले के सभी कुपोषित बच्चों का रक्त और मूत्र की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर बच्चों को पौष्टिक आहार और अन्य चिकित्सीय पद्धति के जरिए आदर्श स्थिति तक लाया जाएगा। इसके लिए डीएम डॉ. राजशेखर ने सीएमओ और जिला कार्यक्रम अधिकारी को 10 अक्टूबर तक का समय दिया है।
डीएम ने बृहस्पतिवार को बताया कि जिले के सभी गंभीर कुपोषित (लाल श्रेणी) के बच्चों को सीएचसी के डॉक्टरों की जवाबदेही तय की गई है। डीपीओ को सभी लाल श्रेणी के बच्चों को हर महीने की सातवीं तारीख को मासिक रिपोर्ट जमा करनी होगी। डीएम ने पीले और लाल श्रेणी के बच्चों के माता-पिता को संबोधित किया और उन्हें इन बच्चों की विशेष देखभाल करने को कहा ताकि उनका बेहतर पोषण और चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जा सके।