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29 लाख के छपाई घोटाले में दोषी पाए गए बीएसए
Updated Wed, 30 Aug 2017 11:40 PM IST
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छपाई घोटाले में दोषी पाए गए बीएसए
बस्ती।
29 लाख रुपये के छपाई घोटाले में आखिरकार बीएसए और सहायक वित्त लेखाधिकारी सर्व शिक्षा अभियान फंस ही गए। जांच अधिकारी एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी ने पूर्व बीएसए एमपी वर्मा और पूर्व सहायक वित्त लेखाधिकारी उमेश कुमार श्रीवास्तव को घोटाले का दोषी मानते हुए दोनों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए शासन को लिखा है। इस घोटाले की खबर को अमर उजाला पिछले तीन माह से प्रमुखता से प्रकाशित करता आ रहा है। इसकी जांच सात माह पहले कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह ने एडी बेसिक को दी थी।
जांच अधिकारी की मानें तो इस तरह संगठित होकर घोटाला करने की घटना पहली बार उनके सामने आई। बताया कि बैंक रिपोर्ट से यह साबित हो गया कि इस खेल में बीएसए, सहायक वित्त लेखाधिकारी, पंचायत उद्योग गाजीपुर और बस्ती के लोग शामिल हैं। बताया कि फुलप्रूफ घोटाला करने की योजना थी। पत्रावली पर डीएम, सीडीओ और कमेटी के सदस्यों के हस्ताक्षर भी हैं। इनमें किसी ने भी यह देखने की आवश्यकता महसूस नहीं कि इतना बड़ा कार्य ईं-टेंडरिंग से न कराकर सप्लाई ऑर्डर से कराया गया। वह भी गैर जनपद की संस्था से। हालांकि, जिस गाजीपुर पंचायत उद्योग को छपाई का ऑर्डर दिया गया, उसे इसके बारे में कुछ भी नहीं मालूम। उसे तो यह भी नहीं मालूम कि उसकी संस्था के नाम से बस्ती के बीएसए ने 29 लाख रुपये की छपाई का ऑर्डर भी दिया है। भुगतान भी गाजीपुर के बिल पर किया गया। बस गलती यह हो गई कि वह भुगतान बस्ती के जिला पंचायत उद्योग के नाम से किया गया है। यह मामला भी पकड़ में नहीं आता अगर आईएफसी कोड बस्ती का नहीं होता। इसकी पुष्टि संबधित बैंक ने भी। जांच के दौरान यह पकड़ में आया कि जब ऑर्डर गाजीपुर को दिया गया तो भुगतान कैसे बस्ती के आईएफसी कोर्ड पर हुआ। इस पूरे मामले में बस्ती के जिला पंचायत उद्योग प्रिंटिंग की भूमिका संदिग्ध है। इस सरकारी संस्था ने किस आधार पर 29 लाख रुपये का भुगतान ले लिया, जबकि इनके नाम कोई ऑर्डर नहीं दिया गया। इसकी जांच सीडीओ अपने स्तर से कर रहे हैं। उन्होंने इसकी पत्रावली भी बीएसए से तलब की है। सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय का कहना है कि यह देखना है कि किस आधार पर जिला पंचायत उद्योग प्रिंटिंग के प्रबंधक ने भुगतान ले लिया। इस पूरे खेल में एक नामी सप्लायर्स का भी हाथ होने की बात कही जा रही है। इस घोटाले से संबधित पत्रावली को पूर्व बीएसए द्वारा तबादला होने के बाद अपने साथ ले जाना और बाद में उपलब्ध कराना, यह साबित करता है कि कितनी बारीकी से साजिश की गई।
घोटाले में एबीआरसी कुदरहा की भी होगी जांच
बस्ती। बीएसए कार्यालय में जिसे जहां भी मौका मिल रहा है, सरकारी धन लूट ले रहा है। 29 लाख रुपये के छपाई घोटाले का अभी पर्दाफाश हुए दो दिन भी नहीं हुआ था कि कुदरहा के एबीआरसी राम उग्रह यादव के घोटाले का प्रकरण सामने आ गया। इसकी जांच शासन के निर्देश पर हो रही है।
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डॉ. एसपी त्रिपाठी के पास बस्ती और गोरखपुर दोनों मंडलों के एडी बेसिक का प्रभार है। उन्होंने बताया कि कुदरहा के एबीआरसी राम उग्रह यादव पर काफी गंभीर आरोप हैं। इन पर डायट, सहायक वित्त लेखाधिकारी और बीएसए के यहां से आने वाले भारी धन का दुरुपयोग का आरोप है। कहते हैं कि प्रथम दृष्टया मामला भारी गोलमाल का लगता है। बताया कि इसकी जांच करने के लिए वह शुक्रवार को कुदरहा बीआरसी जा रहे हैं। इसकी जानकारी बीएसए सहित एबीआरसी को दे दी गई है।
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बस्ती।
29 लाख रुपये के छपाई घोटाले में आखिरकार बीएसए और सहायक वित्त लेखाधिकारी सर्व शिक्षा अभियान फंस ही गए। जांच अधिकारी एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी ने पूर्व बीएसए एमपी वर्मा और पूर्व सहायक वित्त लेखाधिकारी उमेश कुमार श्रीवास्तव को घोटाले का दोषी मानते हुए दोनों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए शासन को लिखा है। इस घोटाले की खबर को अमर उजाला पिछले तीन माह से प्रमुखता से प्रकाशित करता आ रहा है। इसकी जांच सात माह पहले कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह ने एडी बेसिक को दी थी।
जांच अधिकारी की मानें तो इस तरह संगठित होकर घोटाला करने की घटना पहली बार उनके सामने आई। बताया कि बैंक रिपोर्ट से यह साबित हो गया कि इस खेल में बीएसए, सहायक वित्त लेखाधिकारी, पंचायत उद्योग गाजीपुर और बस्ती के लोग शामिल हैं। बताया कि फुलप्रूफ घोटाला करने की योजना थी। पत्रावली पर डीएम, सीडीओ और कमेटी के सदस्यों के हस्ताक्षर भी हैं। इनमें किसी ने भी यह देखने की आवश्यकता महसूस नहीं कि इतना बड़ा कार्य ईं-टेंडरिंग से न कराकर सप्लाई ऑर्डर से कराया गया। वह भी गैर जनपद की संस्था से। हालांकि, जिस गाजीपुर पंचायत उद्योग को छपाई का ऑर्डर दिया गया, उसे इसके बारे में कुछ भी नहीं मालूम। उसे तो यह भी नहीं मालूम कि उसकी संस्था के नाम से बस्ती के बीएसए ने 29 लाख रुपये की छपाई का ऑर्डर भी दिया है। भुगतान भी गाजीपुर के बिल पर किया गया। बस गलती यह हो गई कि वह भुगतान बस्ती के जिला पंचायत उद्योग के नाम से किया गया है। यह मामला भी पकड़ में नहीं आता अगर आईएफसी कोड बस्ती का नहीं होता। इसकी पुष्टि संबधित बैंक ने भी। जांच के दौरान यह पकड़ में आया कि जब ऑर्डर गाजीपुर को दिया गया तो भुगतान कैसे बस्ती के आईएफसी कोर्ड पर हुआ। इस पूरे मामले में बस्ती के जिला पंचायत उद्योग प्रिंटिंग की भूमिका संदिग्ध है। इस सरकारी संस्था ने किस आधार पर 29 लाख रुपये का भुगतान ले लिया, जबकि इनके नाम कोई ऑर्डर नहीं दिया गया। इसकी जांच सीडीओ अपने स्तर से कर रहे हैं। उन्होंने इसकी पत्रावली भी बीएसए से तलब की है। सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय का कहना है कि यह देखना है कि किस आधार पर जिला पंचायत उद्योग प्रिंटिंग के प्रबंधक ने भुगतान ले लिया। इस पूरे खेल में एक नामी सप्लायर्स का भी हाथ होने की बात कही जा रही है। इस घोटाले से संबधित पत्रावली को पूर्व बीएसए द्वारा तबादला होने के बाद अपने साथ ले जाना और बाद में उपलब्ध कराना, यह साबित करता है कि कितनी बारीकी से साजिश की गई।
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घोटाले में एबीआरसी कुदरहा की भी होगी जांच
बस्ती। बीएसए कार्यालय में जिसे जहां भी मौका मिल रहा है, सरकारी धन लूट ले रहा है। 29 लाख रुपये के छपाई घोटाले का अभी पर्दाफाश हुए दो दिन भी नहीं हुआ था कि कुदरहा के एबीआरसी राम उग्रह यादव के घोटाले का प्रकरण सामने आ गया। इसकी जांच शासन के निर्देश पर हो रही है।
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डॉ. एसपी त्रिपाठी के पास बस्ती और गोरखपुर दोनों मंडलों के एडी बेसिक का प्रभार है। उन्होंने बताया कि कुदरहा के एबीआरसी राम उग्रह यादव पर काफी गंभीर आरोप हैं। इन पर डायट, सहायक वित्त लेखाधिकारी और बीएसए के यहां से आने वाले भारी धन का दुरुपयोग का आरोप है। कहते हैं कि प्रथम दृष्टया मामला भारी गोलमाल का लगता है। बताया कि इसकी जांच करने के लिए वह शुक्रवार को कुदरहा बीआरसी जा रहे हैं। इसकी जानकारी बीएसए सहित एबीआरसी को दे दी गई है।