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घाघरा में अचानक ऊफान से संकट
Updated Tue, 04 Jul 2017 12:04 AM IST
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घाघरा में अचानक उफान से संकट
विक्रमजोत।
पूरे प्रदेश और पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के चलते घाघरा नदी अचानक उफान पर पहुंच गई। बरसात के चलते लगातार जलस्तर बढ़ रहा है। विक्रमजोत-लोलपुर (वीएल) तटबंध के पास बसे गांवों में अफरा-तफरी मच गई है।
शनिवार से हो रही बरसात से जलस्तर बढ़ने लगा, जिससे कल्याणपुर, भरथापुर, भदोई, रानीपुर कठवनिया, बाघानाला सहित विक्रमजोत-लोलपुर बांध से सटे गांवों के पास कटान शुरू हो गई। भदोई और रानीपुर कठवनिया गांव के सामने बाढ़ विभाग की ओर से तीन नए स्पर (ठोकर) का निर्माण कार्य हो रहा था, जिसे रोक दिया गया है। गांववालों को एक बार फिर अपने घरों को बचाने के लिए रतजगा करना पड़ रहा है। नदी से सटे बिना बांध वाले गांवों की सुरक्षा पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। लोगों को पिछले वर्ष की बाढ़ और कटान से हुई दुर्दशा याद आ रही है। इस बार भी करीब एक दर्जन गांवों से सट कर नदी बह रही है। बाढ़ विभाग के अवर अभियंता दयाशंकर सिंह का कहना है कि पिछले तीन-चार दिनों से हो रही बरसात से घाघरा का जलस्तर बढ़ा है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के मुताबिक शनिवार को जलस्तर 90.650 मीटर पर पहुंच गया। जो सोमवार शाम पांच बजे 90.645 पर आ गया है। लेकिन बहाव के कारण कटान में तेजी आई है। जिले की सीमा के गांव रानीपुर, कठवनिया, बाघानाला, कल्याणपुर, भरथापुर व सहजौरा पाठक के किनारे खेती की जमीन में तेज बहाव के चलते कटान हो रही है। यहां नदी प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय के भवन से मात्र 10 मीटर दूरी पर बह रही है। यदि कटान बढ़ी तो स्कूल चपेट में आ सकते हैं। स्कूल जाने वाले संपर्क मार्ग की पुलिया का आधा हिस्सा नदी में पहले ही विलीन हो चुका है। बाघानाला गांव के राजेन्द्र मिश्रा, तिलकराम यादव, बृजेश पंडित, राजेश सिंह, विजयपाल सिंह, सहित कई के खेतों पर खतरा मंडराने लगा है। करीब 15 दिन पहले डीएम अरविंद सिंह एवं एसपी संकल्प शर्मा ने बांध का जायजा लिया था। गांव वालों से समस्याएं जानीं और बाढ़ विभाग के बचाव कार्यों को देखा। हर संभव मदद का आश्वासन दिया था। लेकिन दो दिन से शुरू हुई इस मुसीबत पर कोई अफसर झांकने तक नहीं आया।
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विक्रमजोत।
पूरे प्रदेश और पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के चलते घाघरा नदी अचानक उफान पर पहुंच गई। बरसात के चलते लगातार जलस्तर बढ़ रहा है। विक्रमजोत-लोलपुर (वीएल) तटबंध के पास बसे गांवों में अफरा-तफरी मच गई है।
शनिवार से हो रही बरसात से जलस्तर बढ़ने लगा, जिससे कल्याणपुर, भरथापुर, भदोई, रानीपुर कठवनिया, बाघानाला सहित विक्रमजोत-लोलपुर बांध से सटे गांवों के पास कटान शुरू हो गई। भदोई और रानीपुर कठवनिया गांव के सामने बाढ़ विभाग की ओर से तीन नए स्पर (ठोकर) का निर्माण कार्य हो रहा था, जिसे रोक दिया गया है। गांववालों को एक बार फिर अपने घरों को बचाने के लिए रतजगा करना पड़ रहा है। नदी से सटे बिना बांध वाले गांवों की सुरक्षा पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। लोगों को पिछले वर्ष की बाढ़ और कटान से हुई दुर्दशा याद आ रही है। इस बार भी करीब एक दर्जन गांवों से सट कर नदी बह रही है। बाढ़ विभाग के अवर अभियंता दयाशंकर सिंह का कहना है कि पिछले तीन-चार दिनों से हो रही बरसात से घाघरा का जलस्तर बढ़ा है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के मुताबिक शनिवार को जलस्तर 90.650 मीटर पर पहुंच गया। जो सोमवार शाम पांच बजे 90.645 पर आ गया है। लेकिन बहाव के कारण कटान में तेजी आई है। जिले की सीमा के गांव रानीपुर, कठवनिया, बाघानाला, कल्याणपुर, भरथापुर व सहजौरा पाठक के किनारे खेती की जमीन में तेज बहाव के चलते कटान हो रही है। यहां नदी प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय के भवन से मात्र 10 मीटर दूरी पर बह रही है। यदि कटान बढ़ी तो स्कूल चपेट में आ सकते हैं। स्कूल जाने वाले संपर्क मार्ग की पुलिया का आधा हिस्सा नदी में पहले ही विलीन हो चुका है। बाघानाला गांव के राजेन्द्र मिश्रा, तिलकराम यादव, बृजेश पंडित, राजेश सिंह, विजयपाल सिंह, सहित कई के खेतों पर खतरा मंडराने लगा है। करीब 15 दिन पहले डीएम अरविंद सिंह एवं एसपी संकल्प शर्मा ने बांध का जायजा लिया था। गांव वालों से समस्याएं जानीं और बाढ़ विभाग के बचाव कार्यों को देखा। हर संभव मदद का आश्वासन दिया था। लेकिन दो दिन से शुरू हुई इस मुसीबत पर कोई अफसर झांकने तक नहीं आया।
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