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कागजों में 18 सड़कों का निर्माण

Mon, 03 Oct 2016 11:02 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती Updated Mon, 03 Oct 2016 11:02 PM IST
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18 roads in paper
road
पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड में 18 सड़कों का निर्माण कागजों में कराने की योजना बन रही है। कहने को तो नियमित रूप से इसका टेंडर हुआ, मगर टेंडर की दर इतना कम है, कि इस दर में सड़क बनाने को कौन कहे मजदूरी तक नहीं दी जा सकती है। साढ़े चार लाख रुपये की सड़क का टेंडर मात्र एक लाख 53 हजार रुपये में हुआ। यानि ठेकेदार को साढ़े चार लाख रुपये खर्च करने होंगे, और उसे विभाग से मिलेगा मात्र एक लाख 54 हजार रुपये। फिर भी ठेकेदार सड़क बनाने को तैयार हो गए, उनके नाम पर अनुबंध भी गठित हो गया। मगर अब सबसे बड़ा सवाल है कि कोई ठेकेदार लाखों रुपये का नुकसान क्यों विभाग के लिए उठाना चाहेगा? उसके बावजूद ठेका लेने वाला ठेकेदार और अधिकारी दोनों खुश हैं।
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एक ठेकेदार का कहना है कि इतने कम दर पर या तो सड़क बनेगी ही नहीं या फिर बनेगी तो वह कागजों में बनेगी। अगर किसी ठेकेदार ने हिम्मत करके बनवा भी दिया तो उसकी गुणवत्ता निम्न स्तर की रहेगी। ठेकेदार संघ के जिलाध्यक्ष अमर सिंह भी इसे अव्यवहारिक मानते हैं। मगर साथ ही वह यह भी कहते हैं कि विभाग में बने रहने के लिए ठेकेदारों को कभी कभार नुकसान भी उठाना पड़ता है।  वहीं एक्सईएन उपेंद्रनाथ प्रधान का कहना है कि हर हाल में ठेकेदार को उसी दर पर सड़क बनाना होगा, जिस पर उसका अनुबंध हुआ है।  
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हाल ही में पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड और निर्माण खंड एक में सड़कों के निर्माण के लिए एक ही दिन और एक ही स्थान पर टेंडर निकला। प्रांतीय खंड में जो टेंडर फाइनल हुआ उसकी दर सरकारी दर से मात्र एक फीसदी से कम रही। वहीं निर्माण खंड में जो टेंडर निकला वह सरकारी दर से 38 फीसदी कम पर फाइनल हुआ। यह पहली बार हुआ जब इतने कम दर में कोई टेंडर फाइनल हुआ। जो टेंडर 38 फीसदी कम में पास हुआ, उस पर ठेकेदार को सेल टैक्स और इनकम टैक्स के रूप में सात फीसदी, 11 फीसदी विभाग का सुकराना और 10 फीसदी ठेकेदार के लाभ का अंश है। इस तरह एक सड़क के निर्माण पर ठेकेदार की कुल लागत दो लाख 97 हजार रुपये की आती है, और उसे विभाग से कुल एक लाख 53 हजार रुपये का भुगतान होना है। यह मामला जिले के नोडल अधिकारी के सामने भी उठ चुका है, और वह भी इसे अव्यवहारिक टेंडर बता चुके हैं।  
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