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चुनाव: मुलाकात की जगह अब सोशल मीडिया टीम

Thu, 11 Apr 2019 11:39 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2019 11:39 PM IST
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चुनाव: मुलाकात की जगह अब सोशल मीडिया टीम
फोटो
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गुड़-चूड़ा के साथ सात किमी वोट डालने पहुंचते थे
बदला ट्रेंड मुलाकात की जगह अब सोशल मीडिया टीम
पंफलेट की जगह अब ह्वाट्एप और फेशबुक से संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नगर बाजार। लोकसभा चुनाव के लिए जिले में भी प्रचार शुरू हो गया है। हालांकि, निर्वाचन प्रक्रिया यहां 16 की अधिसूचना के बाद शुरू होगी। लेकिन सभी दलों ने अपनी एक सोशल मीडिया टीम बना रखी है। टीम ही मतदाताओं से ह्वाट्सएप, फेसबुक व ट्विटर के जरिये जोड़ रही है। जबकि पहले नात-रिश्तेदारों के माध्यम से प्रत्याशी पहुंच बनाते थे। इस लोकसभा चुनाव में रैली, प्रचार एवं सभाओं पर आचार संहिता की सीमा तय होने के साथ ही उम्मीदवारों ने प्रचार के तरीकों मेें भी बदलाव कर लिया है। पहले जहां कई दिनों तक रैली व सभाएं की जाती थीं, उम्मीदवार गांव, गांव जाकर वोट मांगते और रिश्तेदारों को अहमियत देते लेकिन बदलते ट्रेंड में सब बीते दिनों की बात हो गई।
75 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक शिवाकान्त पांडेय कहते हैं कि पहले मीतनपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में लोग सात किलोमीटर दूर से पैदल वोट डालने आते थे। लोग अपने साथ गुड़ व चूड़ा भी लेकर आते थे और अपनी प्यास बुझाते थे फिर मतदान करते थे। यहां लोगों से मेल मुलाकात करते जिससे संबंध में मधुरता आती।
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53 वर्षीय राजीव मौर्य ने बताया कि पहले नगर बाजार में स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में दूर-दराज के गांव के लोग पैदल आकर वोट डालते थे, उस समय तीन चार मतदान केंद्रों को मिलाकर मतदान केंद्र बनाया जाता था। अब आबादी अधिक होने से बूथ भी बढ़ गए हैं। ज्यादा दूरी होने के वजह से कम वोट पड़ते थे।
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72 वर्षीय जगदंबा प्रसाद पांडेय ने बताया कि पहले अधिक से अधिक जनसंपर्क और सीमित संसाधनों से चुनाव लड़ा जाता था। उनका फोकस क्षेत्र के विकास पर होता था। तब जाति-धर्म के नाम पर लोग वोट नहीं मांगते थे। प्रत्याशी और उनके समर्थक 10-10 किमी दूर पैदल चलकर मतदाताओं से वोट मांगते थे।

58 वर्षीय शिव प्रसाद दूबे ने बताया कि चुनाव आते ही लोगों मे एक उल्लास रहता था। उस समय प्रत्याशी खासकर शनिवार व बुधवार को लगने वाले बाजार के दिन आते थे। अपना मंच लगाकर दूर-दराज के गांवों से बाजार करने आए लोगों को संबोधित करते थे। जिसके बाद लोग एक दूसरे का राय जानकर वोट डालते थे।
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