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अपराजिता: विश्वास से आगे बढ़ें, मिलेगी सफलता
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विश्वास से आगे बढ़ें, मिलेगी सफलता
अपराजिता अभियान के तहत शांतिदेवी आरएन सिंह मेमोरियल इंटर कालेज में महिला सशक्तिकरण संगोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। महिलाओं में ही सृजन की शक्ति है। महिलाएं अपराजिता हैं। जरूरत है उन्हें अपने आत्म विश्वास को जगाने की। जिस दिन आत्मविश्वास से आगे बढ़ेंगी, उस दिन हर कार्य में सफलता उनके कदम चूमेगी। यह कहना है समाजसेवी राजकुमार पांडेय का। वह अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित महिला जागरूकता संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
शांतिदेवी आरएन सिंह मेमोरियल इंटर कॉलेज देवखर छावनी में मंगलवार को अपराजिता मुहिम के तहत आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि ने कहा कि भारतीय संस्कृति यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता की रही है। महिलाओं का सम्मान जनक स्थान रहा है। कुछ कुरीतियों के चलते मध्य काल में स्थिति दयनीय हो गई। कवियों ने भी अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी से दुख व्यक्त किया। लेकिन आज समय बदल चुका है। आधी आबादी हर उस क्षेत्र में आगे है जो कभी पुरुषों का कार्य समझा जाता था। अंतरिक्ष हो या बॉर्डर, राजनीति हो या विज्ञान व चिकित्सा का क्षेत्र में महिलाओं का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। आज देश की विदेश मंत्री और रक्षामंत्री महिला ही हैं। कहा कि सभी में क्षमता है। सिर्फ अपने आत्मबल को पहचानें। लड़कियों के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं हैं। धर्मचंद सिंह, संजय पाठक और आशा सिंह ने भी छात्राओं को उत्साहित किया। कहा कि आत्मविश्वास के साथ आगे कदम बढ़ाएं। हर ओर सफलता कदम चूमेगी। इस दौरान 53 लोगों ने शपथ पत्र भर कर अपराजिता मुहिम को समर्थन दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रबंधक महेंद्र प्रताप सिंह, विशाल सिंह, ब्यूटी सिंह समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
जागरूक हैं बस अवसर चाहिए
आत्मविश्वास से भरी छात्रा स्वाति पांडेय ने कहा कि महिलाएं या छात्राएं जागरूक हैं। सिर्फ ग्रामीण परिवार के लोग लड़कों जैसी तवज्जो लड़कियों को भी दें। क्योंकि महिलाओं के साथ भेदभाव आज भी हो रहा है। पढ़ाई हो या सर्विस परिवार के लोग आज भी अवसर नहीं देते।
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सशक्तिकरण घर से शुरू हो
विद्यालय की छात्रा अनामिका सिंह कहती हैं कि महिलाओं के सशक्तिकरण की शुरुआत घर से होनी चाहिए। लोग महिलाओं को सशक्त बनाने, बेटियों को बचाने की बात तो करते हैं लेकिन ऐसा होता नहीं है। घर से जब भेदभाव खत्म होगा तो समाज में भी बदलाव आएगा।
सराहनीय पहल है अपराजिता
अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम वास्तव में सराहनीय है। पहली बार ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल हुई हैं। समाज में आज सर्वाधिक प्रताड़ना का शिकार या यूं कहें कि भेदभाव का शिकार महिलाएं ही होती हैं। जब महिला सशक्त होगी तो परिवार विकास की ओर बढ़ेगा।
हम भी किसी से कम नहीं
शांतिदेवी कॉलेज में 11वीं की छात्रा सौम्या पांडेय का कहना है कि लड़कियां आज पढ़ाई से लेकर हर कार्य में आगे हैं। सुनीता विलियम्स, किरण वेदी, बछेंद्रीपाल आदि महिलाओं ने अपने दम पर वह मुकाम हासिल किया है जिसे पहले लड़कों के लिए ही माना जाता है।
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विश्वास से आगे बढ़ें, मिलेगी सफलता
अपराजिता अभियान के तहत शांतिदेवी आरएन सिंह मेमोरियल इंटर कालेज में महिला सशक्तिकरण संगोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। महिलाओं में ही सृजन की शक्ति है। महिलाएं अपराजिता हैं। जरूरत है उन्हें अपने आत्म विश्वास को जगाने की। जिस दिन आत्मविश्वास से आगे बढ़ेंगी, उस दिन हर कार्य में सफलता उनके कदम चूमेगी। यह कहना है समाजसेवी राजकुमार पांडेय का। वह अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित महिला जागरूकता संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
शांतिदेवी आरएन सिंह मेमोरियल इंटर कॉलेज देवखर छावनी में मंगलवार को अपराजिता मुहिम के तहत आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि ने कहा कि भारतीय संस्कृति यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता की रही है। महिलाओं का सम्मान जनक स्थान रहा है। कुछ कुरीतियों के चलते मध्य काल में स्थिति दयनीय हो गई। कवियों ने भी अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी से दुख व्यक्त किया। लेकिन आज समय बदल चुका है। आधी आबादी हर उस क्षेत्र में आगे है जो कभी पुरुषों का कार्य समझा जाता था। अंतरिक्ष हो या बॉर्डर, राजनीति हो या विज्ञान व चिकित्सा का क्षेत्र में महिलाओं का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। आज देश की विदेश मंत्री और रक्षामंत्री महिला ही हैं। कहा कि सभी में क्षमता है। सिर्फ अपने आत्मबल को पहचानें। लड़कियों के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं हैं। धर्मचंद सिंह, संजय पाठक और आशा सिंह ने भी छात्राओं को उत्साहित किया। कहा कि आत्मविश्वास के साथ आगे कदम बढ़ाएं। हर ओर सफलता कदम चूमेगी। इस दौरान 53 लोगों ने शपथ पत्र भर कर अपराजिता मुहिम को समर्थन दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रबंधक महेंद्र प्रताप सिंह, विशाल सिंह, ब्यूटी सिंह समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
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जागरूक हैं बस अवसर चाहिए
आत्मविश्वास से भरी छात्रा स्वाति पांडेय ने कहा कि महिलाएं या छात्राएं जागरूक हैं। सिर्फ ग्रामीण परिवार के लोग लड़कों जैसी तवज्जो लड़कियों को भी दें। क्योंकि महिलाओं के साथ भेदभाव आज भी हो रहा है। पढ़ाई हो या सर्विस परिवार के लोग आज भी अवसर नहीं देते।
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सशक्तिकरण घर से शुरू हो
विद्यालय की छात्रा अनामिका सिंह कहती हैं कि महिलाओं के सशक्तिकरण की शुरुआत घर से होनी चाहिए। लोग महिलाओं को सशक्त बनाने, बेटियों को बचाने की बात तो करते हैं लेकिन ऐसा होता नहीं है। घर से जब भेदभाव खत्म होगा तो समाज में भी बदलाव आएगा।
सराहनीय पहल है अपराजिता
अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम वास्तव में सराहनीय है। पहली बार ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल हुई हैं। समाज में आज सर्वाधिक प्रताड़ना का शिकार या यूं कहें कि भेदभाव का शिकार महिलाएं ही होती हैं। जब महिला सशक्त होगी तो परिवार विकास की ओर बढ़ेगा।
हम भी किसी से कम नहीं
शांतिदेवी कॉलेज में 11वीं की छात्रा सौम्या पांडेय का कहना है कि लड़कियां आज पढ़ाई से लेकर हर कार्य में आगे हैं। सुनीता विलियम्स, किरण वेदी, बछेंद्रीपाल आदि महिलाओं ने अपने दम पर वह मुकाम हासिल किया है जिसे पहले लड़कों के लिए ही माना जाता है।