{"_id":"596cfe5d4f1c1bf44f8b4576","slug":"151500315229-basti-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यवस्था से दुखी शख्स ने दिया आत्मदाह का नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्यवस्था से दुखी शख्स ने दिया आत्मदाह का नोटिस
Updated Mon, 17 Jul 2017 11:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीएम को आत्मदाह का नोटिस दिया
बस्ती।
एक आम आदमी जब गांव के तालाब पर अतिक्रमण हटवाने के लिए हार गया तो उसने आत्मदाह करने का निर्णय लिया। उसने 25 जुलाई को आत्मदाह के लिए डीएम को नोटिस दिया है।
अतिक्रमण हटवाने के लिए एसडीएम, डीएम, कमिश्नर, सीएम और प्रधानमंत्री तक से गुहार लगाई मगर हर तरफ उसे निराशा हाथ लगी। गंगाराम ने चार दिन तक डीएम कार्यालय पर आमरण अनशन भी किया। बावजूद एक आम आदमी की नहीं सुनी गई। व्यवस्था से दुखी होकर गंगाराम का कहना है कि जब प्रशासन के लोग खुद तालाबों पर अतिक्रमण करा रहे हैं तो कोई क्या कर सकता है। उसने डीएम को शपथ-पत्र के जरिए नोटिस देकर 25 जुलाई को आत्मदाह करने की बात कही है। मामला ब्लॉक बनकटी के ग्राम बेहिल का है।
सरकार तालाबों और पोखरों जैसी सरकारी संपत्तियों पर से अतिक्रमण हटाने के लिए एंटी-भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन कर रही है, वहीं एक आम आदमी को तालाब पर से कब्जा हटवाने के लिए आत्मदाह का फैसला करना पड़ रह है। यह उस व्यवस्था पर कड़ा प्रहार है, जिसमें सब कुछ ठीक होने का दावा किया जा रहा है। ब्लॉक बनकटी के ग्राम बेहिल के गंगा राम यादव का कहना है कि वह जुलाई 2014 से ही गांव के सार्वजनिक तालाब पर कब्जे को मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहा है मगर प्रशासन बाधा बना हुआ है। बताया कि अब तक वह न जानें कितनी बार एसडीएम, डीएम, कमिश्नर, सीएम और पीएम को पत्र लिख चुका है। तहसील दिवस में अनेकों शिकायतें की गई। बताया कि 11 मई 2017 को वह एसडीएम सदर कीर्तिप्रकाश भारती से मिला। आश्वासन दिया मगर कब्जा नहीं हटवाया। बताया कि वह अपने लिए नहीं बल्कि सरकारी जमीन को बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है, मगर सरकार के लोग ही उसका साथ नहीं दे रहे हैं। बताया कि अगर 24 जुलाई तक कब्जा नहीं हटवाया गया तो वह 25 जुलाई को डीएम के सामने आत्मदाह कर लेगा। इसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती।
एक आम आदमी जब गांव के तालाब पर अतिक्रमण हटवाने के लिए हार गया तो उसने आत्मदाह करने का निर्णय लिया। उसने 25 जुलाई को आत्मदाह के लिए डीएम को नोटिस दिया है।
अतिक्रमण हटवाने के लिए एसडीएम, डीएम, कमिश्नर, सीएम और प्रधानमंत्री तक से गुहार लगाई मगर हर तरफ उसे निराशा हाथ लगी। गंगाराम ने चार दिन तक डीएम कार्यालय पर आमरण अनशन भी किया। बावजूद एक आम आदमी की नहीं सुनी गई। व्यवस्था से दुखी होकर गंगाराम का कहना है कि जब प्रशासन के लोग खुद तालाबों पर अतिक्रमण करा रहे हैं तो कोई क्या कर सकता है। उसने डीएम को शपथ-पत्र के जरिए नोटिस देकर 25 जुलाई को आत्मदाह करने की बात कही है। मामला ब्लॉक बनकटी के ग्राम बेहिल का है।
विज्ञापन
सरकार तालाबों और पोखरों जैसी सरकारी संपत्तियों पर से अतिक्रमण हटाने के लिए एंटी-भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन कर रही है, वहीं एक आम आदमी को तालाब पर से कब्जा हटवाने के लिए आत्मदाह का फैसला करना पड़ रह है। यह उस व्यवस्था पर कड़ा प्रहार है, जिसमें सब कुछ ठीक होने का दावा किया जा रहा है। ब्लॉक बनकटी के ग्राम बेहिल के गंगा राम यादव का कहना है कि वह जुलाई 2014 से ही गांव के सार्वजनिक तालाब पर कब्जे को मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहा है मगर प्रशासन बाधा बना हुआ है। बताया कि अब तक वह न जानें कितनी बार एसडीएम, डीएम, कमिश्नर, सीएम और पीएम को पत्र लिख चुका है। तहसील दिवस में अनेकों शिकायतें की गई। बताया कि 11 मई 2017 को वह एसडीएम सदर कीर्तिप्रकाश भारती से मिला। आश्वासन दिया मगर कब्जा नहीं हटवाया। बताया कि वह अपने लिए नहीं बल्कि सरकारी जमीन को बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है, मगर सरकार के लोग ही उसका साथ नहीं दे रहे हैं। बताया कि अगर 24 जुलाई तक कब्जा नहीं हटवाया गया तो वह 25 जुलाई को डीएम के सामने आत्मदाह कर लेगा। इसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
विज्ञापन