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Basti News: पानी में बहाए 1.35 करोड़...नहीं बुझ सकी प्यास
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जलापूर्ति ओवरहेड टैंक बना संवाद
बस्ती। जल जीवन मिशन के तहत लोगों को पेयजल मुहैया कराने की योजना धरातल पर नहीं दिख रही है। कहीं टंकी का निर्माण अधूरा है, तो कहीं पाइपलाइन बिछाकर छोड़ दिए हैं। अधिकांश परियोजनाएं कागज में पूर्ण दिखाकर भुगतान ले लिए, मगर धरातल पर काम अधूरा पड़ा है। टोटियों से एक भी बूंद पानी नहीं टपक सका। इससे ग्रामीणों की शुद्ध पेयजल की आस टूट रही है।
ऐसा ही हाल कुदरहा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कबरा खास का है। यहां जल निगम ग्रामीण की ओर से जल जीवन मिशन के तहत एक करोड़ 35 लाख रुपये की पेयजल परियोजना जनवरी 2023 में स्वीकृत हुई थी। सालभर में कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य था। जनवरी 2024 में बोर्ड पर काम दिखा दिया गया और भुगतान तो करा लिए, मगर अभी तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। इससे ग्रामीणों को पेयजल नहीं मिल रहा है।
हालांकि गांव में कहीं-कहीं पाइपलाइन बिछा दी गई है तो कहीं-कहीं पड़ी हुई है, मगर, घर के अंदर कनेक्शन देना भूल गए। लोगों ने बताया कि ठेकेदार की लापरवाही और जिम्मेदारों के ढुलमुल रवैये से यह योजना भेंट चढ़ गई है। ग्राम में तीन साल पहले ओवरहेड टैंक का निर्माण और पाइपलाइन बिछाने का दावा करते हुए कार्य को पूर्ण दिखा दिया गया है, मगर यहां की आबादी आज तक स्वच्छ पेयजल से वंचित है। जलापूर्ति न होने के कारण ग्रामीण आज भी देसी और इंडिया मार्क हैंडपंपों के सहारे अपनी प्यास बुझाने को विवश हैं।
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स्थिति यह है कि ग्राम में लगे कई हैंडपंप या तो खराब पड़े हैं या दूषित पानी दे रहे हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। कबरा खास निवासी अनूप कहना है कि अभी तक पाइपलाइन अधूरी है। एसबी यादव का कहना है कि हर घर शुद्ध पेयजल उपलब्धता के दावे हवा-हवाई हैं। पूर्व प्रधान बहादुर यादव का कहना है कि पानी के टंकी का निर्माण हो गया है मगर अभी अधूरे कार्य के चलते जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। संदीप यादव का कहना है कि सरकार जो योजना चला रही है, वो अभी पूर्ण रूप से धरातल पर नहीं पहुंच पा रही है।
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परियोजना पर एक नजर
कार्यदायी संस्था का नाम : उ.प्र. जलनिगम ग्रामीण बस्ती
योजना का नाम : कबराखास पेयजल योजना कुदरहा
योजना की लागत : 1.35 करोड़
प्रारंभ तिथि : 23 जनवरी 2023
कार्य पूर्ण होने की तिथि : 22 जनवरी 2024
कुल लाभान्वित गांव : दो
वर्तमान लाभान्वित आबादी : 1834
गृह जल संयोजन की संख्या : 248
वितरण प्रणाली लंबाई : 6275 मी.
अवर जलाशय की क्षमता/ऊंचाई : 125 किलो./12 मी.
फर्म का नाम : मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लि. हैदराबाद
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ग्रामीण बोले- नहीं मिल रहा पानी
परियोजना अधूरी है। पाइपलाइन बिछाकर छोड़ दिए हैं। मगर, पानी नहीं आ रहा है। ऐसे में देसी नल व इंडिया मार्क हैंडपंप के सहारे पानी जुटाने को मजबूर हो रहे हैं। गर्मी में सांसत बढ़ गई है।
-रामलगन, कबराखास, कुदरहा
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गर्मी में पानी की अधिक जरूरत पड़ती है। पेयजल परियोजना पूर्ण न होने से देसी हैंडपंप से ही प्यास बुझ रही है। एक बाल्टी भरने में परेशानी होती है। पानी के लिए भी देसी हैंडपंप का ही सहारा है।
-शेष बहादुर यादव, कबराखास, कुदरहा
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पाइपलाइन बिछाने के लिए गड्ढा खोदकर छोड़ दिए। टोंटी तक नहीं लगाए गए हैं। आज भी पानी की आस अधूरी है, तीन साल पहले ही कागज में परियोजना को पूर्ण दिखाकर भुगतान ले लिया गया है।
-रामधारी सिंह, कबराखास, कुदरहा
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दूषित पानी पीने से अक्सर संक्रामक रोग फैल जाता है। इससे डर बना रहता है। ओवरहेड टैंक शोपीस बना है। कार्य भी आधा-अधूरा है। जिन घरों को कनेक्शन दिए हैं, वहां पानी आज तक नहीं पहुंचा।
-रामबोध यादव, कबराखास, कुदरहा
कोट
परियोजना की अवधि 2028 तक बढ़ा दी गई है। बजट आते ही अधूरे कार्य को पूर्ण करवा दिया जाएगा। जल्द ही सप्लाई बहाल कर दी जाएगी। जेई से रिपोर्ट मांगी गई है।
-योगेंद्र प्रसाद, एक्सईएन जलनिगम, ग्रामीण, बस्ती।
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ऐसा ही हाल कुदरहा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कबरा खास का है। यहां जल निगम ग्रामीण की ओर से जल जीवन मिशन के तहत एक करोड़ 35 लाख रुपये की पेयजल परियोजना जनवरी 2023 में स्वीकृत हुई थी। सालभर में कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य था। जनवरी 2024 में बोर्ड पर काम दिखा दिया गया और भुगतान तो करा लिए, मगर अभी तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। इससे ग्रामीणों को पेयजल नहीं मिल रहा है।
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हालांकि गांव में कहीं-कहीं पाइपलाइन बिछा दी गई है तो कहीं-कहीं पड़ी हुई है, मगर, घर के अंदर कनेक्शन देना भूल गए। लोगों ने बताया कि ठेकेदार की लापरवाही और जिम्मेदारों के ढुलमुल रवैये से यह योजना भेंट चढ़ गई है। ग्राम में तीन साल पहले ओवरहेड टैंक का निर्माण और पाइपलाइन बिछाने का दावा करते हुए कार्य को पूर्ण दिखा दिया गया है, मगर यहां की आबादी आज तक स्वच्छ पेयजल से वंचित है। जलापूर्ति न होने के कारण ग्रामीण आज भी देसी और इंडिया मार्क हैंडपंपों के सहारे अपनी प्यास बुझाने को विवश हैं।
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स्थिति यह है कि ग्राम में लगे कई हैंडपंप या तो खराब पड़े हैं या दूषित पानी दे रहे हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। कबरा खास निवासी अनूप कहना है कि अभी तक पाइपलाइन अधूरी है। एसबी यादव का कहना है कि हर घर शुद्ध पेयजल उपलब्धता के दावे हवा-हवाई हैं। पूर्व प्रधान बहादुर यादव का कहना है कि पानी के टंकी का निर्माण हो गया है मगर अभी अधूरे कार्य के चलते जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। संदीप यादव का कहना है कि सरकार जो योजना चला रही है, वो अभी पूर्ण रूप से धरातल पर नहीं पहुंच पा रही है।
परियोजना पर एक नजर
कार्यदायी संस्था का नाम : उ.प्र. जलनिगम ग्रामीण बस्ती
योजना का नाम : कबराखास पेयजल योजना कुदरहा
योजना की लागत : 1.35 करोड़
प्रारंभ तिथि : 23 जनवरी 2023
कार्य पूर्ण होने की तिथि : 22 जनवरी 2024
कुल लाभान्वित गांव : दो
वर्तमान लाभान्वित आबादी : 1834
गृह जल संयोजन की संख्या : 248
वितरण प्रणाली लंबाई : 6275 मी.
अवर जलाशय की क्षमता/ऊंचाई : 125 किलो./12 मी.
फर्म का नाम : मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लि. हैदराबाद
ग्रामीण बोले- नहीं मिल रहा पानी
परियोजना अधूरी है। पाइपलाइन बिछाकर छोड़ दिए हैं। मगर, पानी नहीं आ रहा है। ऐसे में देसी नल व इंडिया मार्क हैंडपंप के सहारे पानी जुटाने को मजबूर हो रहे हैं। गर्मी में सांसत बढ़ गई है।
-रामलगन, कबराखास, कुदरहा
गर्मी में पानी की अधिक जरूरत पड़ती है। पेयजल परियोजना पूर्ण न होने से देसी हैंडपंप से ही प्यास बुझ रही है। एक बाल्टी भरने में परेशानी होती है। पानी के लिए भी देसी हैंडपंप का ही सहारा है।
-शेष बहादुर यादव, कबराखास, कुदरहा
पाइपलाइन बिछाने के लिए गड्ढा खोदकर छोड़ दिए। टोंटी तक नहीं लगाए गए हैं। आज भी पानी की आस अधूरी है, तीन साल पहले ही कागज में परियोजना को पूर्ण दिखाकर भुगतान ले लिया गया है।
-रामधारी सिंह, कबराखास, कुदरहा
दूषित पानी पीने से अक्सर संक्रामक रोग फैल जाता है। इससे डर बना रहता है। ओवरहेड टैंक शोपीस बना है। कार्य भी आधा-अधूरा है। जिन घरों को कनेक्शन दिए हैं, वहां पानी आज तक नहीं पहुंचा।
-रामबोध यादव, कबराखास, कुदरहा
कोट
परियोजना की अवधि 2028 तक बढ़ा दी गई है। बजट आते ही अधूरे कार्य को पूर्ण करवा दिया जाएगा। जल्द ही सप्लाई बहाल कर दी जाएगी। जेई से रिपोर्ट मांगी गई है।
-योगेंद्र प्रसाद, एक्सईएन जलनिगम, ग्रामीण, बस्ती।