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बच्चों के रिपोर्ट कार्ड के गोलमाल में फंसे बीएसए
Updated Wed, 07 Jun 2017 07:03 PM IST
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सालाना रिपोर्ट कार्ड और छात्र प्रोफाइल की छपाई के मामले में बीएसए फंसते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि बिना टेंडर कराए अन्य जनपद के एक फर्म को 32 लाख रुपये के छपाई का कार्य दे दिया। शिकायत पर कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह ने एडी बेसिक को जांच के आदेश दिए हैं।
जिले में 1747 प्राइमरी और 639 जूनियर सहित कुल 2386 स्कूल के दो लाख 48 हजार 890 बच्चों को सालाना रिपोर्ट कार्ड और उनका प्रोफाइल बनाने के लिए जिले को लगभग 32 लाख मिला। नियम टेंडर के जरिए ही छपाई के लिए ठेका देने का है। कमिश्नर से की गई शिकायत में कहा गया है कि बीएसए कार्यालय ने टेंडर न निकालकर गैर जनपद के एक चहेते को छपाई का काम दे दिया। रिपोर्ट कार्ड और छात्र प्रोफाइल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए। यह भी कहा गया है कि छपाई का आर्डर तो गैर जनपद को दिया गया मगर छपाई शहर से ही कराई गई। जांच अधिकारी एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी ने बताया कि जांच के लिए बीएसए से अभिलेख मांगे गए हैं, मगर उनकी ओर से अभिलेख नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते जांच नहीं हो रही है। बताया कि इस बार अगर अभिलेख नहीं उपलब्ध कराया तो आरोप पत्र जारी कर दिया जाएगा। बीएसए एमपी वर्मा के निजी और सीयूजी दोनों नंबरों से बात नहीं हो पाई।
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जिले में 1747 प्राइमरी और 639 जूनियर सहित कुल 2386 स्कूल के दो लाख 48 हजार 890 बच्चों को सालाना रिपोर्ट कार्ड और उनका प्रोफाइल बनाने के लिए जिले को लगभग 32 लाख मिला। नियम टेंडर के जरिए ही छपाई के लिए ठेका देने का है। कमिश्नर से की गई शिकायत में कहा गया है कि बीएसए कार्यालय ने टेंडर न निकालकर गैर जनपद के एक चहेते को छपाई का काम दे दिया। रिपोर्ट कार्ड और छात्र प्रोफाइल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए। यह भी कहा गया है कि छपाई का आर्डर तो गैर जनपद को दिया गया मगर छपाई शहर से ही कराई गई। जांच अधिकारी एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी ने बताया कि जांच के लिए बीएसए से अभिलेख मांगे गए हैं, मगर उनकी ओर से अभिलेख नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते जांच नहीं हो रही है। बताया कि इस बार अगर अभिलेख नहीं उपलब्ध कराया तो आरोप पत्र जारी कर दिया जाएगा। बीएसए एमपी वर्मा के निजी और सीयूजी दोनों नंबरों से बात नहीं हो पाई।
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