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प्रमुख सचिव ने जांचे अस्पतालों के हाल

Sat, 23 Sep 2017 12:07 AM IST
Updated Sat, 23 Sep 2017 12:07 AM IST
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प्रमुख सचिव ने जांचे अस्पतालों के हाल
प्रमुख सचिव ने अस्पतालों का हाल देखा
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बस्ती।
बाल विकास एवं महिला कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव और जिले की नोडल रेणुका कुमार ने शुक्रवार को अस्पतालों की स्थिति जानी। पीआईसीयू के अलावा चिल्ड्रेन वार्ड पर उनका पूरा फोकस रहा। जिला अस्पताल और ओपेक चिकित्सालय कैली में तो तीमारदारों से व्यवस्थागत खामियों पर वार्ता कीं। हालांकि, उन्हें कहीं कोई शिकायत नहीं मिली मगर उन्होेंने अस्पताल के अधिकारियों और डीएम अरविंद कुमार सिंह को व्यवस्था पर नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने ओपेक चिकित्सालय कैली में इलाज के लिए हड्डी रोग स्पेशियलिटी के लिए डिमांड भेजने के निर्देश दिए।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार साढ़े नौ बजे प्रमुख सचिव की गाड़ी जिला अस्पताल पहुंच गई। यहां सबसे पहले उन्होंने चिल्ड्रेन वार्ड का निरीक्षण किया। एक-एक मरीजों तक पहुंची और उनसे बीमारी जानी। चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती तीन साल के कुपोषित अभिजीत की हालत देख वह अपने को रोक नहीं सकीं। बीमार के पिता को आश्वस्त किया कि बच्चे का बेहतर इलाज डॉक्टर यहीं करेंगे। एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव को इस पर निगाह रखने का निर्देश दिया। इसके बाद वह अस्पताल के पीआईसीयू में गईं, जहां मशीनों के संचालन पर बातचीत की। पीआईसीयू से निकलते समय उनकी नजर एनसीयू के खुले कमरे पर पड़ गई। डॉक्टर को बुलाकर कमरा बंद रखने की हिदायत दी। कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है। कारण यह कि हवा के साथ कमरे में वायरस जाने की आशंका रहती है।
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इसके बाद वह महिला अस्पताल पहुंची। यहां सीधे वह किशोरी परामर्श केंद्र का निरीक्षण करने चली गईं। यहां तैनात काउंसलर सीमा सिंह से बातचीत कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिया। सीएमएस डॉ. अवधेश कुमार सिंह से डॉक्टरों की कमी आदि पर बातचीत की। बताया गया कि एसएनसीयू में मानक के मुताबिक डॉक्टरों की कमी है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड भी बंद है। उन्होंने तत्काल एडी स्वास्थ्य से बातचीत कर हल निकालने का आश्वासन दिया।
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ओपेक चिकित्सालय कैली में नोडल अधिकारी ने जेई-एईएस वार्ड का निरीक्षण किया। निदेशक डॉ. अतुल कुमार और सीएमएस डॉ. एसके श्रीवास्तव ने अस्पताल के रास्ते की समस्या से अवगत कराया। प्रमुख सचिव ने ओपेक चिकित्सालय कैली को हड्डी रोग का स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया। जांच में उन्होंने एक्सरे, पैथॉलाजी, ब्लड बैंक सहित पूरे अस्पताल पर एक नजर डाली।
ठेका कर्मियों ने रखी अपनी बात
जिला अस्पताल में निरीक्षण के दौरान पीआईसीयू संचालित करने वाले ठेका कर्मियों ने अपनी बात प्रमुख सचिव के सामने रखीं। उन्होंने डीएम, सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा तथा एसआईसी से समस्या का निदान करने का निर्देश दिया। बताया कि शासन के निर्देशों के क्रम में इन कर्मियों के मानदेय भुगतान किए जाए। इसमें जरा सी भी लापरवाही पर संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ओपेक को मेडिकल कालेज से संबद्धता की पहल
निरीक्षण के दौरान ओपेक चिकित्सालय कैली पहुंची नोडल अधिकारी रेणुका कुमार ने अस्पताल के संसाधनों और भवन की भव्यता से प्रभावित हुईं। इस दौरान सीएमएस कैली डॉ. एसके श्रीवास्तव ने मेडिकल कॉलेज से अस्पताल की संबद्धता की बात रख दी। प्रमुख सचिव उनकी बात से सहमत हुईं और प्रस्ताव बनाकर भेजने का निर्देश दिया। कहा कि वे इसके लिए शासन स्तर पर पहल कर ओपेक चिकित्सालय कैली को मेडिकल कॉलेज से संबद्धता दिलाने का प्रयास करेंगी।
विशेष डिमेन्शिया क्लीनिक में 27 मरीजों की जांच

बस्ती।
विश्व डिमेन्शिया सप्ताह के अंतर्गत जिला अस्पताल के ओपीडी में आयोजित विशेष डिमेन्शिया क्लीनिक का आयोजन हुआ। इसमें 27 मरीजों की जांच की गई। जांच में इस बीमारी से पीड़ित छह रोगी मिले, जिनका उपचार किया गया।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव के निर्देशन में सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा और प्रोग्राम की नोडल अधिकारी डॉ. सीके वर्मा के नेतृत्व में जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। डिमेन्शिया एवं अल्जाइमर्स के लक्षणों पर मनोचिकित्सक डॉ. प्रभात कुमार अग्रवाल ने अपनी बात रखी। बताया कि यह बीमारी बढ़ती उम्र के साथ हो रहे मस्तिष्क में संरचनात्मक परिवर्तन (सूखने) के कारण होती है। इससे सोचने समझने में परिवर्तन आ जाता है। इससे पीड़ित कोई भी बात जल्दी भूलने लगता है। समय के साथ यह समस्या बढ़ती जाती है। यदि समय रहते मनोचिकित्सक से उपचार करा लिया जाए तो समस्या पर बहुत हद तक अंकुश लग जाता है। इकाई के मनोवैज्ञानिक मुकेश कुमार पाठक ने मरीजों के संबंधियों की ओर से ऐसे लोगों से कैसा व्यवहार किया जाए पर अपनी बात रखी। साइकेट्रिक सोशल वर्कर राकेश कुमार ने भी अपने सुझाव दिए। इस मौके पर साइकेट्रिक नर्स नीलम शुक्ला, इकाई के संजय पटेल, परशुराम यादव आदि मौजूद रहे।

पॉक्सो मामलों में होम विजिट करेगी टीम

बस्ती।
किशोरी परामर्श केंद्र में आने वाले पॉक्सो से संबंधित गंभीर मामलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। अब ऐसे मामलों में गंभीर स्थिति वाली किशोरियों के घर तक विजिट कर उनकी काउंसलिंग केंद्र की टीम करेगी। ताकि तनाव में कहीं वह गलत कदम न उठा बैठें। इसके लिए केंद्र पर एक वाहन और दो विजिटर मौजूद रहेंगे। यही नहीं सीएमएस की यह जिम्मेदारी होगी कि वह संवेदनशील मामलों में तत्काल काउंसलर को सूचित करेंगे। ताकि मौके पर जाकर काउंसलर उन्हें तसल्ली दे सकेगा। यह निर्देश बाल विकास एवं महिला कल्याण की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार ने दिए हैं।
बृहस्पतिवार को महिला अस्पताल में निरीक्षण के दौरान उन्होंने किशोरी परामर्श केंद्र की काउंसलर सीमा सिंह से लंबी बातचीत की। जब उन्हें यह पता चला कि काउंसलर अपने कमरे में बैठ कर पॉक्सो पीड़ितों का इंतजार करती हैं तो वे गंभीर हो उठीं। काउंसलर को निर्देशित किया कि जब भी अस्पताल में ऐसी मरीज पहुंचे तो उनके पास वे स्वयं जाएं और उनकी काउंसलिंग करें। डीएम अरविंद कुमार सिंह और सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा को निर्देश दिया कि और पॉक्सो के मामलों को हल्के में न लें। ऐसे मरीजों के साथ सतर्क रहें। क्योंकि पीड़ित किशोरियां अपने को परिवार और समाज से अलग रखने लगती हैं। कभी-कभार वे पढ़ाई से भी मुंह मोड़ लेती हैं। ऐसे में जिलाधिकारी का भी यह दायित्व है कि वे उनकी पढ़ाई का इंतजाम करें। स्कूल में प्रवेश को लेकर वे पहल करें। जबकि काउंसलर की जिम्मेदारी है कि वे टीम के साथ ऐसी किशोरियों की काउंसलिंग कर उनका तनाव दूर करें। ताकि वे समाज की मुख्य धारा में ही अपने को मानें।


क्रेक छत, और दरार देख भड़कीं प्रमुख सचिव

कप्तानगंज/महराजगंज।
जिला मुख्यालय पर निरीक्षण के बाद प्रमुख सचिव रेणुका कुमार कप्तानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गईं। अस्पताल के निरीक्षण कर तीन साल से निर्माणाधीन आवासीय भवन का भी जायजा लिया। अचानक उनकी नजर क्रेक छत पर चली गई, उनका पारा गरम हो गया। इसी बीच दरवाजे के किनारे मौजूद दरार को भी देखा तो वह भड़क गईं। निर्माण इकाई के अवर अभियंता को फटकार लगाई। भवन निर्माण में प्रयुक्त सामग्री का नमूना जांच के लिए भेजने का निर्देश दिया।
दोपहर बाद पहुंची प्रमुख सचिव के आते ही केंद्र पर अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल में सुविधाओं की जानकारी लेते समय बताया गया कि यहां अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और ईसीजी की सुविधा नहीं है, मगर एक्सरे टेक्नीशियन की तैनाती है। उन्हें तत्काल हटाने का निर्देश प्रमुख सचिव ने दिया। ऑपरेशन के सवाल पर आयुष डॉ. संगीता ने बताया कि यहां गाइनोलाजिस्ट तैनात नहीं हैं ऐसे में ऑपरेशन नहीं होता। इससे पूर्व प्रमुख सचिव ने इमरजेंसी वार्ड के अलावा इंजेक्शन कक्ष, ओपीडी और प्रसूति कक्ष का निरीक्षण किया।
महराजगंज में भी खफा हुईं
महराजगंज। दोपहर 1:30 बजे प्रमुख सचिव रेणुका कुमार पूर्व माध्यमिक विद्यालय महराजगंज पहुंची। विद्यालय के एमडीएम ड्रेस वितरण और बच्चों से पढ़ाई के बारे में जानकारी लीं। प्रमुख सचिव ने कम्प्यूटर रूम और आंगनबाड़ी केंद्र को देखा। विद्यालय के परिसर में जर्जर भवन को देखकर वह भड़क गई। उन्होंने जर्जर भवनों में बच्चों को न पढ़ाने के लिए अध्यापकों को निर्देश दिया।

घूसखोर लेखपाल से प्रमुख सचिव ने वापस कराए रुपये
हर्रैया। प्रमुख सचिव रेणुका कुमार का निदूरी खम्हौवा गांव में जमीनी स्तर पर हो रहे सच से सामना हुआ। जमीन की पैमाइश के लिए गांव के युवक ने लेखपाल पर दो हजार रिश्वत लेने का आरोप लगाया। मौके पर ही प्रमुख सचिव ने तहसीलदार से आपत्ति जताते हुए लेखपाल से रुपये वापस कराए। शुक्रवार को शाम करीब साढ़े चार बजे निदूरी खम्हौवा गांव के प्राथमिक विद्यालय पहुंची प्रमुख सचिव ने करीब सवा घंटे तक बिंदुवार संचालित योजनाओं के बारे में जानकारी ली। गांव वालों से समस्याओं के बारे में भी जानकारी लीं। गांव वालों ने गंदा पानी निकासी का मुद्दा उठाया। ग्राम प्रधान जुबेर अहमद ने बजट कम होने की बात बताई। प्रमुख सचिव ने सीडीओ को निर्देश दिया कि आगणन तैयार कर नाली निर्माण कराएं। सिंगारी देवी ने वृद्धावस्था पेंशन और रास्ता बनवाने की शिकायत की। राजाराम ने सहन की जमीन पर पट्टा करने की शिकायत की। दो वर्ष पहले तहसील दिवस में जहर खाकर आत्महत्या करने वाली पुष्पा सिंह के पति बीर बहादुर ने भी घोषित मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत की। राशन कार्ड से संबधित कई शिकायतों पर गंभीर प्रमुख सचिव ने कैंप लगाकर राशन कार्ड बनाने का निर्देश सेक्रेटरी को दिया। डीएसओ ने सोमवार को कैंप लगाने की जानकारी ग्रामीणों को दी। अनंतराम ने लेखपाल दीन दयाल श्रीवास्तव पर जमीन की पैमाइश के लिए दो हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया। गुस्साई प्रमुख सचिव ने लेखपाल को बुलाकर आरोपों के बाबत पूछा तो लेखपाल ने झूठा कहते हुए शिकायतकर्ता से सवाल जवाब करने लगा। इससे नाराज प्रमुख सचिव ने तहसीलदार को बुलाकर आपत्ति जताई और लेखपाल से रुपये वापस कराए।

पीडब्ल्यूडी की कलई खोली
हर्रैया। निदूरी गांव में राम शंकर सहित आसपास के लोगों ने लोक निर्माण विभाग कार्य शैली पर सवाल उठाए। गांव वालों का कहना था कि वीआईपी कार्यक्रम तय होने के बाद सड़कों के गड्ढे केवल मिट्टी और गिट्टी डालकर भर दिए जाते हैं। जो दो-चार दिन में ही उखड़ जाती है। पहले भी गड्ढामुक्ति के नाम पर सड़क के गड्ढे भरे गए मगर वह चलने लायक नहीं बची। अधिशासी अभियंता को जब रेणुका कुमार ने तलब कर जानकारी ली तो एक सप्ताह में सड़कों की दशा सुधारने की बात कही। सफाई कर्मी राम वृक्ष के कामकाज की शिकायत पर प्रमुख सचिव ने सुधर जाने की नसीहत दी। प्रधान जुबेर अहमद से सफाई व्यवस्था के लिए तैनात कर्मियों की रिपोर्ट संबधित विभाग को देने का निर्देश दिया। खड़ंजा निर्माण के लिए स्वीकृत बजट और एस्टीमेट की जानकारी जब ब्लॉक के अवर अभियंता दे रहे थे तो प्रमुख सचिव ने बगल में बैठे सीडीओ की तरफ इशारा करते हुए कुछ निर्देश दिया। इस पर सीडीओ अवर अभियंता दीनानाथ पर भड़क गए और कहा कि हमें पता है कि तुम सब कैसे कार्य करते हो। इसके बाद जेई की बोलती बंद हो गई।
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