{"_id":"5bbba958867a55285e427dcd","slug":"111539025240-basti-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल परिसर को बना डाला वाहन पार्किंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पताल परिसर को बना डाला वाहन पार्किंग
Updated Tue, 09 Oct 2018 12:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो
अस्पताल परिसर को बना डाला वाहन पार्किंग
तीमारदारों ही ने मार्केट करने के लिए भी रख देते हैं वाहन
जिला महिला अस्पताल आने वाले मरीज भी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जिला महिला अस्पताल पार्किंग स्टैंड बन गया है। वाहन पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से तीमारदार कहीं भी वाहन खड़ा कर देते हैं ही कुछ लोग मार्केट में खरीददारी के पहले यहां वाहन छोड़ देते हैं। कारण कि पूरे गांधीनगर मुख्य बाजार में पार्किंग व्यवस्था नहीं है। अस्पताल परिसर में बेतरतीब खड़े वाहनों से मरीजों के साथ-साथ एंबुलेंस चालकों को भी समस्या हो रही है। लेकिन जिम्मेदार इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। अस्पताल कर्मियों का कहना है कि वे किस-किस को मना करें।
शहर की आबादी लगभग सवा लाख के आसपास है। महिलाओं के लिए एक ही सरकारी चिकित्सालय है। ऐसे में यहां हर रोज भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। अस्पताल परिसर की बात की जाए तो वह भी एक घर के आंगन जैसा है। इतने मरीज और ऊपर से तीमारदारों के वाहनों से परिसर खचाखच भरा रहता है। पार्किंग नहीं होने से वाहनों को सुविधानुसार खड़ा करना इनकी मजबूरी भी है। एंबुलेंस चालकों का कहना है कि हमें कब किस मरीज को कहां लेकर जाना पड़े कुछ कहा नहीं जा सकता। परिसर में खड़े वाहनों से 15 से 20 मिनट की लेटलतीफी हो जाती है। कारण कि तीमारदार अपने वाहनों को लॉक कर चले जाते हैं। अस्पताल परिसर में पार्किंग व्यवस्था पर तीमारदार अनीता श्रीवास्तव का कहना था कि बहुत दिक्कत होती है। लोग जहां मन में आए अपने वाहन खड़ा कर देते हैं। संभलकर न निकला जाए तो चोट भी लग सकती है। अस्पताल पहुंचीं प्रिया का कहना था कि पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए, इससे शाम के वक्त प्रसूताओं को टहलने में सुविधा होगी, वाहनों के खड़े रहने से इन्हें समस्या होती है। अधिवक्ता अतुल भट्ट ने कहा जब भी वे अस्पताल में किसी परिचित से मिलने आते हैं, वाहन खड़ा करने के लिए जगह ढूंढनी पड़ती है। बाहर खड़ा करें तो चोरी का डर रहता है। राघवेंद्र शुक्ल ने कहा कि यह एक बड़ी समस्या है, इनका निदान आवश्यक है। वाहनों के खड़ा करने के लिए नियत स्थान होना चाहिए।
पालिका सहयोग करे तो हो सकती है व्यवस्था
वाहन पार्किंग की समस्याओं पर जिला महिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके सिंह कहते हैं कि स्थिति से अवगत हूं। परिसर छोटा है। लोगों को मना भी नहीं किया जा सकता है। हां, अस्पताल के बाहर काफी जमीन है। अगर नगर पालिका सहयोग करे तो एक बेहतर पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है। और परिसर भी साफ-सुथरा नजर आएगा। लोगों को बड़ी समस्या से निजात मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
अस्पताल परिसर को बना डाला वाहन पार्किंग
तीमारदारों ही ने मार्केट करने के लिए भी रख देते हैं वाहन
जिला महिला अस्पताल आने वाले मरीज भी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जिला महिला अस्पताल पार्किंग स्टैंड बन गया है। वाहन पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से तीमारदार कहीं भी वाहन खड़ा कर देते हैं ही कुछ लोग मार्केट में खरीददारी के पहले यहां वाहन छोड़ देते हैं। कारण कि पूरे गांधीनगर मुख्य बाजार में पार्किंग व्यवस्था नहीं है। अस्पताल परिसर में बेतरतीब खड़े वाहनों से मरीजों के साथ-साथ एंबुलेंस चालकों को भी समस्या हो रही है। लेकिन जिम्मेदार इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। अस्पताल कर्मियों का कहना है कि वे किस-किस को मना करें।
शहर की आबादी लगभग सवा लाख के आसपास है। महिलाओं के लिए एक ही सरकारी चिकित्सालय है। ऐसे में यहां हर रोज भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। अस्पताल परिसर की बात की जाए तो वह भी एक घर के आंगन जैसा है। इतने मरीज और ऊपर से तीमारदारों के वाहनों से परिसर खचाखच भरा रहता है। पार्किंग नहीं होने से वाहनों को सुविधानुसार खड़ा करना इनकी मजबूरी भी है। एंबुलेंस चालकों का कहना है कि हमें कब किस मरीज को कहां लेकर जाना पड़े कुछ कहा नहीं जा सकता। परिसर में खड़े वाहनों से 15 से 20 मिनट की लेटलतीफी हो जाती है। कारण कि तीमारदार अपने वाहनों को लॉक कर चले जाते हैं। अस्पताल परिसर में पार्किंग व्यवस्था पर तीमारदार अनीता श्रीवास्तव का कहना था कि बहुत दिक्कत होती है। लोग जहां मन में आए अपने वाहन खड़ा कर देते हैं। संभलकर न निकला जाए तो चोट भी लग सकती है। अस्पताल पहुंचीं प्रिया का कहना था कि पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए, इससे शाम के वक्त प्रसूताओं को टहलने में सुविधा होगी, वाहनों के खड़े रहने से इन्हें समस्या होती है। अधिवक्ता अतुल भट्ट ने कहा जब भी वे अस्पताल में किसी परिचित से मिलने आते हैं, वाहन खड़ा करने के लिए जगह ढूंढनी पड़ती है। बाहर खड़ा करें तो चोरी का डर रहता है। राघवेंद्र शुक्ल ने कहा कि यह एक बड़ी समस्या है, इनका निदान आवश्यक है। वाहनों के खड़ा करने के लिए नियत स्थान होना चाहिए।
विज्ञापन
पालिका सहयोग करे तो हो सकती है व्यवस्था
वाहन पार्किंग की समस्याओं पर जिला महिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके सिंह कहते हैं कि स्थिति से अवगत हूं। परिसर छोटा है। लोगों को मना भी नहीं किया जा सकता है। हां, अस्पताल के बाहर काफी जमीन है। अगर नगर पालिका सहयोग करे तो एक बेहतर पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है। और परिसर भी साफ-सुथरा नजर आएगा। लोगों को बड़ी समस्या से निजात मिलेगी।
विज्ञापन