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गरीबों का राशन खा रहे लेखपाल संघ अध्यक्ष
Updated Sat, 05 Aug 2017 06:11 PM IST
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बस्ती। गांव वालों ने लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष पर गरीबों का राशन लेने का आरोप लगाया है। जिलाध्यक्ष पात्र गृहस्थी का राशन कार्ड बनवा कर हर माह धड़ल्ले से राशन उठा रहे हैं। शिकायत के बाद जब मामला खुला तो अब यह कहकर अपना दामन बचाते फिर रहे हैं कि मेरा कार्ड निरस्त करा दें। प्रकरण संज्ञान में आने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने जांच के निर्देश डीएसओ रमन मिश्र को दिए हैं।
बहादुरपुर ब्लॉक के ग्राम फुलवरिया बरगाह निवासी राम सुमेर लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष हैं। एनएफएसए के तहत उक्त गांव में कोटे की दुकान पर रामसुमेर की मां वंशा के नाम से भी कार्ड संख्या 218540254260 का पात्र गृहस्थी का कार्ड जारी हुआ है। यह कार्ड महज दो यूनिट का है। इसके इतर इसी परिवार का सदस्य होने के बावजूद लेखपाल रामसुमेर की पत्नी प्रेमा के नाम से कार्ड संख्या 218540254298 भी जारी है, जिसमें लेखपाल के अलावा उनके तीन बेटियां व दो बेटों सहित सात यूनिट का कार्ड बनवा लिया गया है। नियमानुसार यह कार्ड पूरी तरह अवैध है, मगर हर माह यह परिवार कोटेदार से राशन भी उठाता रहा। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि अब तक कई बार सत्यापन के बावजूद राम सुमेर ने न तो अपना कार्ड निरस्त कराया और न ही जिम्मेदार लेखपाल और सेक्रेटरी को सत्यापन के दौरान इस कार्ड के संबंध में पता चल सका। इन दोनों ने भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। लगातार पात्र गृहस्थी कार्ड का लाभ उठा रहे इस कार्ड धारक के खिलाफ गांव के किसी ने शिकायत दर्ज कराई तो मामला खुल गया।
लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष रामसुमेर ने कहा कि मां का निधन हो चुका है। पत्नी के नाम से कार्ड है, इसको निरस्त करने का आवेदन कर रहे हैं। जिलाधिकारी अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में आ गया है। डीएसओ को निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी।
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बहादुरपुर ब्लॉक के ग्राम फुलवरिया बरगाह निवासी राम सुमेर लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष हैं। एनएफएसए के तहत उक्त गांव में कोटे की दुकान पर रामसुमेर की मां वंशा के नाम से भी कार्ड संख्या 218540254260 का पात्र गृहस्थी का कार्ड जारी हुआ है। यह कार्ड महज दो यूनिट का है। इसके इतर इसी परिवार का सदस्य होने के बावजूद लेखपाल रामसुमेर की पत्नी प्रेमा के नाम से कार्ड संख्या 218540254298 भी जारी है, जिसमें लेखपाल के अलावा उनके तीन बेटियां व दो बेटों सहित सात यूनिट का कार्ड बनवा लिया गया है। नियमानुसार यह कार्ड पूरी तरह अवैध है, मगर हर माह यह परिवार कोटेदार से राशन भी उठाता रहा। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि अब तक कई बार सत्यापन के बावजूद राम सुमेर ने न तो अपना कार्ड निरस्त कराया और न ही जिम्मेदार लेखपाल और सेक्रेटरी को सत्यापन के दौरान इस कार्ड के संबंध में पता चल सका। इन दोनों ने भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। लगातार पात्र गृहस्थी कार्ड का लाभ उठा रहे इस कार्ड धारक के खिलाफ गांव के किसी ने शिकायत दर्ज कराई तो मामला खुल गया।
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लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष रामसुमेर ने कहा कि मां का निधन हो चुका है। पत्नी के नाम से कार्ड है, इसको निरस्त करने का आवेदन कर रहे हैं। जिलाधिकारी अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में आ गया है। डीएसओ को निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी।
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