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एड्स का बढ़ता शिकंजा, हर वर्ष 500 नए मरीज

Mon, 10 Jul 2017 11:19 PM IST
Updated Mon, 10 Jul 2017 11:19 PM IST
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एड्स का बढ़ता शिकंजा, हर वर्ष 500 नए मरीज
एड्स का बढ़ता शिकंजा, हर वर्ष 500 नए मरीज
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बस्ती।
एड्स के बारूद पर है जिला। हर वर्ष पांच सौ नए मरीज एआरटी सेंटर में पंजीकृत हो रहे हैं। कारण चाहे जो भी हो मगर बढ़ रही संख्या से स्वास्थ्य प्रशासन की नींद उड़ गई है।
एड्स के प्रति जागरूकता के तमाम प्रयास अब तक कागजी बन कर रह गए हैं। यह अलग बात है कि एआरटी सेंटर में जांच के बाद नतीजों के आधार पर दवा देकर ऐसे मरीजों को सेवा दी जा रही है मगर उन्हें पूरी तरह ठीक करने का अब तक कोई उपाय नहीं हो सका है। एड्स जानलेवा है। यह सभी जानते हैं मगर लापरवाही और सामाजिक भय के चलते इस बीमारी का संक्रमण लेकर बाहर से आने वाले अपने परिवार को भी बांट देते हैं। इसके चलते अपने जिले में चार वर्ष में तीन हजार मरीज पंजीकृत हुए हैं। यह आंकड़ा एआरटी सेंटर में मौजूद है। सरकार ने इस रोग से पीड़ितों के लिए अलग से व्यवस्था बना रखी है, जहां मरीजों को दवा देकर उन्हें राहत दी जाती है। चूंकि, इस बीमारी का इलाज संभव नहीं है। ऐसे में एआरटी सेंटर में उन्हें किसी से संबंध न बनाने के लिए भी प्रेरणा दी जाती है। एआरटी सेंटर में ऐसे रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता बरकरार रहे, इसके उपाय तो किए जा रहे हैं मगर लगातार बढ़ती संख्या उनके लिए संकट खड़ा किए हुए है। सूत्रों की मानें तो एड्स के ज्यादातर मरीज माइग्रेटेड ही हैं। इसमें अधिकांश मुंबई से ही यह रोग यहां पहुंचा है।
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बस्ती जिले में एआरटी सेंटर वर्ष 2013 में स्थापित किया गया। तब यहां पहली बार यानी मार्च 2014 तक 750 मरीजों का पंजीकरण हुआ। इसमें सभी विभिन्न सेंटरों के ट्रांसफर केस थे। वर्ष 2015 मार्च तक यह संख्या तेजी से बढ़ कर 1829 तक पहुंच गई। इसमें पुराने केस भी शामिल थेे। वर्ष 2016 में संख्या 2408 हो गई। वर्ष 2017 मार्च तक यहां कुल 2871 का पंजीकरण हो चुका था मगर पिछले माह यानी जून 17 में संख्या तीन हजार के आंकड़े को छू गई है। सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि स्वास्थ्य प्रशासन एड्स के बढ़ते रोगियों को लेकर चिंतित है। इस पर नियंत्रण का एकमात्र रास्ता बचाव है। क्योंकि एक बार एड्स के शिकंजे में आए व्यक्ति को रोग से बचाने का कोई उपाय नहीं है। एआरटी सेंटर के माध्यम से लोगों को इस रोग से बचाव के प्रति जागरूक तो किया ही जाता है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग भी जागरूकता के लिए लगातार प्रयासरत है।
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