{"_id":"6806a7aebf289c14180938d2","slug":"worry-about-tomorrow-the-poison-of-pollution-is-ruining-the-health-of-the-earth-bareilly-news-c-4-lko1064-623473-2025-04-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: कल की करें चिंता, धरती की सेहत बिगाड़ रहा प्रदूषण का जहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: कल की करें चिंता, धरती की सेहत बिगाड़ रहा प्रदूषण का जहर
विज्ञापन
बरेली। विकास की रफ्तार में धरा का धानी शृंगार उजड़ता जा रहा है। घरों की गंदगी, हानिकारक रसायन प्रवाहित होने से कई नदियों में बैक्टरीरिया बढ़ गए हैं। अवैध कब्जों से कई दम तोड़ रही हैं तो कुछ का स्वरूप बदलकर नाले जैसा हो गया है। पेड़ों पर आरी चलने से सांसें संकट में हैं। समय रहते हमें कल की चिंता करनी होगी। अन्यथा धरा का धैर्य डगमगाया तो हमारा अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दावा है कि बरेली का वायु गुणवत्ता सूचकांक मानक के अनुरूप है, पर अस्पतालों में लग रही मरीजों की कतार इस दावे की पोल खोल रही है। विभाग के अनुसार, सोमवार को शहर का एक्यूआई 72 (सामान्य) रहा। दूसरी ओर, एक दशक में ओपीडी में सांस रोगियों की तादाद तीन गुना हो गई है। जिला अस्पताल के चेस्ट फिजिशियन डॉ. अजय मोहन के मुताबिक, दस वर्ष पूर्व प्रतिदिन ओपीडी में 80 मरीज इलाज के लिए आते थे। पर अब यह संख्या दो सौ के पार पहुंच गई है। बच्चों में भी अस्थमा के लक्षण मिलने लगे हैं। इमरजेंसी में इलाज के लिए सात-आठ बुजुर्ग भर्ती हो रहे हैं। हालत गंभीर होने पर उनमें से कई हायर सेंटर रेफर भी किए जा रहे हैं। शहर में बढ़ते ट्रैफिक और निर्माण के दौरान एनजीटी के मानकों का पालन नहीं होने से प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे सांस के साथ ही, गले में खराश, ब्राेंकाइटिस, टीबी, त्वचा रोग आदि से ग्रसित होने की आशंका रहती है।
रासायनिक खादों के इस्तेमाल से घट रही मिट्टी की उर्वरता
कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. रंजीत सिंह के मुताबिक, रासायनिक खादों के ज्यादा इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। यह चूक भविष्य में भारी पड़ सकती है। केंद्र की ओर से किसानों को रासायनिक खाद से दूरी बनाने और जैविक खेती अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
विज्ञापन
हर साल रोप रहे लाखों पौधे, पर नहीं बढ़ रहा हरित क्षेत्र
प्रतिवर्ष वन और अन्य 22 विभागों के सहयोग से जिले में लाखों पौधे रोपे जा रहे हैं, पर हरित क्षेत्र नहीं बढ़ रहा। निगरानी के अभाव में पौधे सूख रहे हैं। जिलाधिकारी ने रोपे गए पौधों की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट तलब की थी तो विभागों ने चुप्पी साध ली। यह चुप्पी पूरी हकीकत बयां कर रही है। वन विभाग के मुताबिक, बरेली में वन क्षेत्र 225.97 हेक्टेयर है। वहीं, हरित क्षेत्र कई वर्षों से 0.01 फीसदी पर ही सिमटा हुआ है।
नदियों में गिर रहा सौ एमएलडी से ज्यादा प्रदूषित जल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दावा है कि रामगंगा नदी का पानी जिले में प्रवेश और निकास स्थल पर साफ है। हकीकत में इन दोनों स्थलों के अलावा अन्य कई स्थानों पर इसका पानी प्रदूषण से काला पड़ गया है। पांच वर्ष पूर्व बरेली कॉलेज के एक शोध के अनुसार, रामगंगा की कई मछलियाें में कैंसर के लक्षण मिले थे। देवरनियां, नकटिया, किला नदियों में रोज घरों, फैक्टरियों से निकलने वाला सौ एमएलडी दूषित पानी गिर रहा है।
निगम चलाएगा मुहिमएनकैप की जोनल हेड मानसी गुप्ता के मुताबिक, पृथ्वी दिवस पर नगर निगम की ओर से हमारी शक्ति, हमारा ग्रह थीम पर स्वच्छ ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता मुहिम चलाएगा। इसके तहत ठेलों, ढाबों, मोबाइल होटलों आदि से संपर्क कर उन्हें दो चौड़ी पत्तियों वाले पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। पारंपरिक ईंधन के तौर पर नारियल के छिलकों से बने कोयले आदि के इस्तेमाल का सुझाव दिया जाएगा। इससे पर्यावरण हरा-भरा होगा। ब्यूरो
विज्ञापन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दावा है कि बरेली का वायु गुणवत्ता सूचकांक मानक के अनुरूप है, पर अस्पतालों में लग रही मरीजों की कतार इस दावे की पोल खोल रही है। विभाग के अनुसार, सोमवार को शहर का एक्यूआई 72 (सामान्य) रहा। दूसरी ओर, एक दशक में ओपीडी में सांस रोगियों की तादाद तीन गुना हो गई है। जिला अस्पताल के चेस्ट फिजिशियन डॉ. अजय मोहन के मुताबिक, दस वर्ष पूर्व प्रतिदिन ओपीडी में 80 मरीज इलाज के लिए आते थे। पर अब यह संख्या दो सौ के पार पहुंच गई है। बच्चों में भी अस्थमा के लक्षण मिलने लगे हैं। इमरजेंसी में इलाज के लिए सात-आठ बुजुर्ग भर्ती हो रहे हैं। हालत गंभीर होने पर उनमें से कई हायर सेंटर रेफर भी किए जा रहे हैं। शहर में बढ़ते ट्रैफिक और निर्माण के दौरान एनजीटी के मानकों का पालन नहीं होने से प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे सांस के साथ ही, गले में खराश, ब्राेंकाइटिस, टीबी, त्वचा रोग आदि से ग्रसित होने की आशंका रहती है।
विज्ञापन
रासायनिक खादों के इस्तेमाल से घट रही मिट्टी की उर्वरता
कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. रंजीत सिंह के मुताबिक, रासायनिक खादों के ज्यादा इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। यह चूक भविष्य में भारी पड़ सकती है। केंद्र की ओर से किसानों को रासायनिक खाद से दूरी बनाने और जैविक खेती अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
विज्ञापन
हर साल रोप रहे लाखों पौधे, पर नहीं बढ़ रहा हरित क्षेत्र
प्रतिवर्ष वन और अन्य 22 विभागों के सहयोग से जिले में लाखों पौधे रोपे जा रहे हैं, पर हरित क्षेत्र नहीं बढ़ रहा। निगरानी के अभाव में पौधे सूख रहे हैं। जिलाधिकारी ने रोपे गए पौधों की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट तलब की थी तो विभागों ने चुप्पी साध ली। यह चुप्पी पूरी हकीकत बयां कर रही है। वन विभाग के मुताबिक, बरेली में वन क्षेत्र 225.97 हेक्टेयर है। वहीं, हरित क्षेत्र कई वर्षों से 0.01 फीसदी पर ही सिमटा हुआ है।
नदियों में गिर रहा सौ एमएलडी से ज्यादा प्रदूषित जल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दावा है कि रामगंगा नदी का पानी जिले में प्रवेश और निकास स्थल पर साफ है। हकीकत में इन दोनों स्थलों के अलावा अन्य कई स्थानों पर इसका पानी प्रदूषण से काला पड़ गया है। पांच वर्ष पूर्व बरेली कॉलेज के एक शोध के अनुसार, रामगंगा की कई मछलियाें में कैंसर के लक्षण मिले थे। देवरनियां, नकटिया, किला नदियों में रोज घरों, फैक्टरियों से निकलने वाला सौ एमएलडी दूषित पानी गिर रहा है।
निगम चलाएगा मुहिमएनकैप की जोनल हेड मानसी गुप्ता के मुताबिक, पृथ्वी दिवस पर नगर निगम की ओर से हमारी शक्ति, हमारा ग्रह थीम पर स्वच्छ ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता मुहिम चलाएगा। इसके तहत ठेलों, ढाबों, मोबाइल होटलों आदि से संपर्क कर उन्हें दो चौड़ी पत्तियों वाले पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। पारंपरिक ईंधन के तौर पर नारियल के छिलकों से बने कोयले आदि के इस्तेमाल का सुझाव दिया जाएगा। इससे पर्यावरण हरा-भरा होगा। ब्यूरो