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World Sparrow Day 2023: ओ री चिरैया... कहां गुम हुई आंगन की गौरैया, शहरों से हुई दूर

Mon, 20 Mar 2023 12:01 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 20 Mar 2023 12:01 PM IST
सार

वर्षों पहले जब आंगन में फुदकती नन्ही-सी चिड़िया चोंच में दाना दबाए फुर्र होती थी, तो उसकी चींचीं की चहचहाहट हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी, लेकिन अब यह आंगन से गुम हो गई है। 

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World Sparrow Day 2023 Awareness needed to save the sparrow
विश्व गौरैया दिवस - फोटो : social media

विस्तार

हमारे बचपन की यादें गौरैया बिन अधूरी होती है। वर्षों पहले जब आंगन में फुदकती नन्ही-सी चिड़िया चोंच में दाना दबाए फुर्र होती थी, तो उसकी चींचीं की चहचहाहट हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी, लेकिन बढ़ता शहरीकरण, कटते पेड़, तापमान, रेडिएशन और मोबाइल टॉवरों से निकलने वाली तरंगे गौरैया के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर रही हैं। अब नन्ही सी चिरैया घर के आंगन से गुम होती जा रही है। हर वर्ष 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है, इसका उद्देश्य लोगों में गौरैया संरक्षण के प्रति जागरूकता लाना है।

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डेढ़-दो दशक पहले तक गौरैया के घोंसले रोशनदान, लॉन, पौधों पर देखने को मिल जाते थे। सुबह-सुबह घरों में न केवल गौरैया की चींचीं सुनाई देती थी बल्कि फुदक-फुदक कर दाना चुंगती भी नजर आती थी। एक दशक से गौरैया की संख्या में लगातार कमी आ रही है। कई पर्यावरण प्रेमी और संगठन भी गौरैया संरक्षण को लेकर मुहिम चला रहे हैं, लेकिन गौरैया घरों से दूर होती जा रही है। पर्यावरणविद् भी समय-समय पर जागरुकता अभियान चलाते रहते हैं।

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जागरूकता की जरूरत

प्रगतिशील किसान अनिल साहनी ने बताया कि गौरैया की पहली पसंद छायादार और फैलने वाले पौधे हैं। भोजन की बात करें तो गौरैया को कद्दू, लौकी, तोरई, सेम जैसे बेल पर होने वाले कीट खाने में पसंद हैं। गौरैया की दूसरी पसंद बाजरा, चावल दालों जैसे छोटे अनाज हैं। बढ़ता शहरीकरण और पेड़ों के कटान के कारण गौरैया ने गांवों की ओर रुख कर लिया है। गौरैया को बचाने के लिए जागरूकता की जरूरत है।

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World Sparrow Day 2023: बदायूं के राकेश ने आंगन में गौरैया के लिए बनाए घोंसले, 20 साल से कर रहे संरक्षित

रुहेलखंड नेचर क्लब के अध्यक्ष काजलदास गुप्ता ने बताया कि बढ़ते शहरीकरण के कारण गौरैया अब आंगन में नहीं दिखती। पहले घर-घर अनाज धोया और सुखाया जाता था। यह छोटी और प्यारी से चिड़िया अनाज चुंगने घर आती थी। हमारे बीच रहती थी। अब सब कुछ पैकेट बंद है। गौरैया को घरों की छतों पर अनाज और पानी नहीं मिल रहा। पिछले कुछ वर्षों में गौरैया की संख्या कम हुई है। गौरैया के संरक्षण की जरूरत है।

प्रदूषण के कारण गौरैया पर संकट

जंतु वैज्ञानिक रेनू जोशी ने बताया कि पेड़ों के कटान और पानी की कमी के साथ प्रदूषण के कारण गौरैया पर संकट है। गौरैया के लिए उपयुक्त स्थान और माहौल न होने के कारण इनकी संख्या घट रही है। 

डीएफओ समीर कुमार ने बताया कि गौरैया की संख्या पिछले कुछ वर्षों में कम हुई है। इस पक्षी की गणना नहीं की जाती। अलग-अलग वन रेंज से मिलने वाले गौरैया के झुंडों को देखते हुए अनुमान लगाया जाता है। गौरैया संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। 

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