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मशरूम संवर्द्धन प्रशिक्षण में बताईं आधुनिक तकनीकी
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बरेली। बरेली कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना छात्र इकाई प्रथम और आईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से चल रहे मशरूम संवर्धन प्रशिक्षण के चौथे दिन के कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने किया। उन्होंने छात्रों को नए तरीके अपनाने का सुझाव देते हुए कहा कि नयापन ही उनके स्वावलंबन और स्वरोजगार की गारंटी बन सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आरके सिंह ने केंद्रीय मंत्री के सुझाव पर सहमति जताते हुए कहा कि काम करने का अलग तरीका पहचान बनाता है। छात्रों को इसके लिए आधुनिकता और नई तकनीक पर विचार करना चाहिए। नाबार्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद मिश्रा ने छात्रों को मशरूम उत्पादन में वित्तीय समस्या आने पर उनसे संपर्क करने को कहा। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन ने नौकरी लेने वाला बनने के बजाय नौकरी देने वाला बनने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मशरूम जैसे छोटे रोजगार शुरू करके भी दूसरों को रोजगार दिया जा सकता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ हरिशंकर गंगवार ने सौ स्वयंसेवकों को निशुल्क टी-शर्ट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राजीव यादव ने छात्र-छात्राओं को मशरूम की खेती के समय स्पानिंग करने, उत्पादन पैकेट्स बनाने और स्टोर करने जैसे कई जरूरी तरीके बताए। छात्रों ने इसका प्रयोगात्मक परीक्षण भी किया। उनके बनाए पैकेट संरक्षित कराए गए हैं, 20 दिन बाद वे अपने पैकेटों में उगे मशरूम देख सकेंगे। इसके लिए उन्हें 20 फरवरी के बाद बुलाया गया है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आरके सिंह ने केंद्रीय मंत्री के सुझाव पर सहमति जताते हुए कहा कि काम करने का अलग तरीका पहचान बनाता है। छात्रों को इसके लिए आधुनिकता और नई तकनीक पर विचार करना चाहिए। नाबार्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद मिश्रा ने छात्रों को मशरूम उत्पादन में वित्तीय समस्या आने पर उनसे संपर्क करने को कहा। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन ने नौकरी लेने वाला बनने के बजाय नौकरी देने वाला बनने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मशरूम जैसे छोटे रोजगार शुरू करके भी दूसरों को रोजगार दिया जा सकता है।
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विशिष्ट अतिथि डॉ हरिशंकर गंगवार ने सौ स्वयंसेवकों को निशुल्क टी-शर्ट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राजीव यादव ने छात्र-छात्राओं को मशरूम की खेती के समय स्पानिंग करने, उत्पादन पैकेट्स बनाने और स्टोर करने जैसे कई जरूरी तरीके बताए। छात्रों ने इसका प्रयोगात्मक परीक्षण भी किया। उनके बनाए पैकेट संरक्षित कराए गए हैं, 20 दिन बाद वे अपने पैकेटों में उगे मशरूम देख सकेंगे। इसके लिए उन्हें 20 फरवरी के बाद बुलाया गया है।
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