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हरियाणा से बसों से बरेली आए मजदूर
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बसों के जरिये हरियाणा से आए युवक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बरेली के जरी कारीगर व कामगारों को प्रशासन ने प्रमाणपत्र देकर घर भेजा
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बरेली। रविवार सुबह हरियाणा से बरेली आए करीब ढाई सौ मजदूरों को फतेहगंज पश्चिमी के मेडिकल कॉलेज लाया गया। वहां उन्हें स्वास्थ्य परीक्षण के बाद प्रमाणपत्र देकर भेजा गया। बरेली के ही अधिकांश मजदूरों ने यूपी और हरियाणा सरकार को धन्यवाद दिया कि उन्हें लाने को बेहतर इंतजाम किया गया।
दोपहर दो बजे करीब मेडिकल कॉलेज और निजी बसों से यह लोग सेटेटाइट बस स्टैंड पहुंचे। यहां से साधन न मिलने पर पैदल ही घरों को निकल पड़े। इनमें अधिकांश शहर व कुछ आसपास के गांवों के लोग थे। एजाज नगर गौंटिया निवासी सलमान और उनके छह साथी भी इनमें शामिल थे। पैदल घर जा रहे लोगों ने अमर उजाला को बताया कि वह हरियाणा के पेहवा में जरी व हस्तशिल्प का काम करते थे। लॉकडाउन में वहां फंस गए। वहां काम तो बंद था पर लोगों का रवैया काफी सहयोग भरा था। उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी। घर लौटने के लिए आवेदन किया तो कुरुक्षेत्र होते हुए चार बसें बदलवाकर उन्हें बरेली तक लाया गया। इसमें हरियाणा और उप्र सरकार दोनों की बसें थीं जिन्होंने उनसे कोई किराया नहीं लिया। उन्हें रास्ते भर नाश्ता व खाना भी फ्री मिला। बताया कि सुबह बरेली आ गए थे। मेडिकल कॉलेज में उन समेत करीब ढाई सौ लोगों की जांच हुई और फिर उन्हें प्रमाणपत्र देकर घर भेज दिया गया।
दोपहर दो बजे करीब मेडिकल कॉलेज और निजी बसों से यह लोग सेटेटाइट बस स्टैंड पहुंचे। यहां से साधन न मिलने पर पैदल ही घरों को निकल पड़े। इनमें अधिकांश शहर व कुछ आसपास के गांवों के लोग थे। एजाज नगर गौंटिया निवासी सलमान और उनके छह साथी भी इनमें शामिल थे। पैदल घर जा रहे लोगों ने अमर उजाला को बताया कि वह हरियाणा के पेहवा में जरी व हस्तशिल्प का काम करते थे। लॉकडाउन में वहां फंस गए। वहां काम तो बंद था पर लोगों का रवैया काफी सहयोग भरा था। उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी। घर लौटने के लिए आवेदन किया तो कुरुक्षेत्र होते हुए चार बसें बदलवाकर उन्हें बरेली तक लाया गया। इसमें हरियाणा और उप्र सरकार दोनों की बसें थीं जिन्होंने उनसे कोई किराया नहीं लिया। उन्हें रास्ते भर नाश्ता व खाना भी फ्री मिला। बताया कि सुबह बरेली आ गए थे। मेडिकल कॉलेज में उन समेत करीब ढाई सौ लोगों की जांच हुई और फिर उन्हें प्रमाणपत्र देकर घर भेज दिया गया।
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