फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Wooden bridge supporting crossing Kailash

Bareilly News: लकड़ी का पुल 'कैलाश' को पार करने का सहारा

Sun, 14 Apr 2024 03:47 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Sun, 14 Apr 2024 03:47 AM IST
विज्ञापन
Wooden bridge supporting crossing Kailash
नवाबगंज फोटो 3 कैलाश नदी पर बना लकडी का पुल
क्योलड़िया। नकटपुर गांव में लकड़ी का एकमात्र पुल दर्जनों गांवों के लोगों को कैलाश नदी से पार कराता है। ग्रामीणों ने पुल बनवाए जाने के लिए न जानें कितने ही प्रयास किए लेकिन, एसी कमरों में बैठे जिम्मेदारों को कभी इनकी परेशानी नहीं दिखी। आज भी मुख्यालय तक पहुंचने के लिए इन लोगों को संघर्ष करना पड़ता है।
विज्ञापन

भदपुरा ब्लॉक के गांव नकटपुर के पास कैलाश नदी बह रही है। गांव ठिरिया बन्नोजान, बड़ागांव, नवादा इमामाबाद, डांडिया मिश्रा, अभयपुर, बिहारीपुर, अब्दुल रहमान समेत कई अन्य गांव के लोग नवाबगंज जाने के लिए इस पर बने लकड़ी के पुल से ही अपनी मंजिल तय करते हैं। मुख्यमंत्री योगी के साथ ही लोक निर्माण विभाग के मंत्री और उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर ग्रामीणों ने शीघ्र ही पुल बनवाए जाने की मांग की है।
विज्ञापन

अगर, पुल बन जाएगा तो ग्रामीणों की समस्या का समाधान जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि अस्थायी पुल से गुजरते समय हमेशा खतरा बना रहता है। आए दिन लोग गिरते-गिरते बचते हैं। कई बार हादसे हो भी चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

बरसात के दिनों में सफर और मुश्किल
ग्रामीणों के लिए नवाबगंज जाना बरसात के दिनों में और मुश्किल हो जाता है। दरअसल, लकड़ी का पुल मानसून से पहले ही हटा लिया जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को दोगुनी दूरी तय करके अपनी मंजिल के लिए जाना पड़ता है।
हर चुनाव में मिलती है आश्वासन की घुट्टी
विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनाव में हर बार नेताओं का ग्रामीणों से वादा रहता है कि यहां स्थायी पुल बनाने के प्रयास किए जाएंगे। लेकिन, चुनाव बीत जाने के बाद कोई जनप्रतिनिधि इन ग्रामीणों की समस्या की सुध नहीं लेता है।
बातचीत:
मानसून के दौरान तहसील मुख्यालय जाने के लिए हमें 20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। अगर यहां पक्का पुल बन जाए तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। हर बार नेता आश्वासन देते हैं मगर, सार्थक पहल अब तक नहीं हुई। - मेवाराम गंगवार

---
लकड़ी का पुल होने से ओसवाल चीनी मिल तक गन्ना की आपूर्ति करने में परेशानी आती है। लंबे समय से हम लोग पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं मगर जिम्मेदार सुध नहीं ले रहे। लकड़ी का पुल होने की वजह से आए दिन यहां हादसे भी होते हैं। - भगवानदास
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed