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डेंगू से महिला की मौत, स्वास्थ्य विभाग बेखबर
सार
डेंगू की चपेट में आई महिला की शनिवार को मौत हो गई।उनके बेटे कुबेर सुमन के मुताबिक तीन दिन पहले तेज बुखार आने के बाद उन्होंने एक मेडिकल स्टोर से दवा ले ली थी लेकिन अगले दिन तबीयत और बिगड़ गई।सीएमओ ने बगैर डेंगू की पुष्टि के किसी मरीज का इलाज करने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।
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विस्तार
बरेली। डेंगू की चपेट में आई महिला की शनिवार को मौत हो गई। उन्हें तीन दिन पहले बुखार आने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को देर शाम तक डेंगू से हुई इस मौत की खबर नहीं थी।
प्रेमनगर में रहने वाली 44 वर्षीय सारिका सुमन शहर से प्रकाशित एक समाचार पत्र की संपादक थीं। उनके बेटे कुबेर सुमन के मुताबिक तीन दिन पहले तेज बुखार आने के बाद उन्होंने एक मेडिकल स्टोर से दवा ले ली थी लेकिन अगले दिन तबीयत और बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां से डीडीपुरम के दूसरे निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। कार्ड टेस्ट कर रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव मिलने के बाद उनका इलाज किया जा रहा था। एक यूनिट प्लेटलेट्स भी चढ़ाई गईं लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
कुबेर ने डेंगू से तीन दिन के अंदर मौत पर सवाल उठाते हुए इलाज में लापरवाही की आशंका जताई। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने डेंगू से मौत के इस केस की जानकारी न होने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह इस प्रकरण में अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगेंगे।
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कार्ड टेस्ट में पॉजिटिव मिलने की तत्काल सूचना दें निजी अस्पताल
सीएमओ ने सभी निजी अस्पताल, क्लिनिक और लैब संचालकों को निर्देश दिया है कि कोई भी बुखार पीड़ित कार्ड टेस्ट में डेंगू संदिग्ध मिले तो तत्काल उसके सैंपल की एलाइजा जांच कराई जाए। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग भी दी जाए। सीएमओ ने बगैर डेंगू की पुष्टि के किसी मरीज का इलाज करने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि कार्ड टेस्ट से डेंगू की पुष्टि नहीं होती बल्कि व्यक्ति संदिग्ध माना जाता है। एलाइजा टेस्ट से ही डेंगू की पुष्टि होती है।
कोरोना मुक्त हुआ बरेली, सक्रिय केस शून्य
करीब तीन महीने बाद जिला शनिवार को फिर कोरोना मुक्त हो गया है। सर्विलांस सेल प्रभारी डॉ .अनुराग गौतम के मुताबिक तीन महीने के अंतराल में करीब चार सौ केस पॉजिटिव मिले और 14 संक्रमित निजी अस्पताल में भर्ती रहे। किसी भी संक्रमित की मौत नहीं हुई है। 90 फीसदी मरीजों में हल्के लक्षण पाए गए जबकि नौ फीसदी मरीज लक्षणरहित थे। कई मरीज सात दिन से पहले ही निगेटिव हो गए थे।
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प्रेमनगर में रहने वाली 44 वर्षीय सारिका सुमन शहर से प्रकाशित एक समाचार पत्र की संपादक थीं। उनके बेटे कुबेर सुमन के मुताबिक तीन दिन पहले तेज बुखार आने के बाद उन्होंने एक मेडिकल स्टोर से दवा ले ली थी लेकिन अगले दिन तबीयत और बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां से डीडीपुरम के दूसरे निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। कार्ड टेस्ट कर रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव मिलने के बाद उनका इलाज किया जा रहा था। एक यूनिट प्लेटलेट्स भी चढ़ाई गईं लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
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कुबेर ने डेंगू से तीन दिन के अंदर मौत पर सवाल उठाते हुए इलाज में लापरवाही की आशंका जताई। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने डेंगू से मौत के इस केस की जानकारी न होने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह इस प्रकरण में अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगेंगे।
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कार्ड टेस्ट में पॉजिटिव मिलने की तत्काल सूचना दें निजी अस्पताल
सीएमओ ने सभी निजी अस्पताल, क्लिनिक और लैब संचालकों को निर्देश दिया है कि कोई भी बुखार पीड़ित कार्ड टेस्ट में डेंगू संदिग्ध मिले तो तत्काल उसके सैंपल की एलाइजा जांच कराई जाए। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग भी दी जाए। सीएमओ ने बगैर डेंगू की पुष्टि के किसी मरीज का इलाज करने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि कार्ड टेस्ट से डेंगू की पुष्टि नहीं होती बल्कि व्यक्ति संदिग्ध माना जाता है। एलाइजा टेस्ट से ही डेंगू की पुष्टि होती है।
कोरोना मुक्त हुआ बरेली, सक्रिय केस शून्य
करीब तीन महीने बाद जिला शनिवार को फिर कोरोना मुक्त हो गया है। सर्विलांस सेल प्रभारी डॉ .अनुराग गौतम के मुताबिक तीन महीने के अंतराल में करीब चार सौ केस पॉजिटिव मिले और 14 संक्रमित निजी अस्पताल में भर्ती रहे। किसी भी संक्रमित की मौत नहीं हुई है। 90 फीसदी मरीजों में हल्के लक्षण पाए गए जबकि नौ फीसदी मरीज लक्षणरहित थे। कई मरीज सात दिन से पहले ही निगेटिव हो गए थे।