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Bareilly News: दीवारों के सहारे लटक रहे तार बारिश में करंट उतरने का खतरा
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बरेली। जिले की बिजली व्यवस्था को आधुनिक व सुरक्षित बनाने के लिए 1500 करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन हकीकत में हालात नहीं बदले। सुभाषनगर, सेटेलाइट, सूफी टोला, इंग्लिशगंज जैसे प्रमुख इलाकों की कई गलियों में बिजली के खंभे नहीं लगाए गए हैं। यहां तार दीवारों के सहारे गुजर रहे हैं। कुछ स्थानों पर इन तारों से दीवारों में करंट उतरने की शिकायतें आई हैं। इससे सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शहर की बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए वर्ष 2024-25 में 84.20 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 236 जगहों पर खंभों व जर्जर ताराें को ठीक कराया गया। वर्ष 2025-26 में 86.46 करोड़ रुपये से विभिन्न उपकेंद्रों पर कार्य कराए गए। रिवैंप योजना के तहत 134 जगहों पर जर्जर तारों व खंभों को बदलवाया गया।
इसके बावजूद शाहदाना, सुभाषनगर, सेटेलाइट, कटरा चांद खां, सरदारनगर, कुतुबखाना, जगतपुर, किला, हरूनगला, कोहाड़ापीर आदि क्षेत्रों में बगैर खंभे के तार गलियों में लटकते देखे जा सकते हैं। यहां ये तार या तो घरों के बाहर लटक रहे हैं या फिर बास-बल्लियों के सहारे गुजर रहे हैं। घरों की दीवारों के सहारे गुजर रहे जर्जर तार कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकते हैं। स्थानीय लोग इन तारों को बदलवाने और सुरक्षित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग तो करते हैं, लेकिन विद्युत निगम इस पर ध्यान नहीं देता।
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शुल्क की मांग करते हैं जिम्मेदारऐसी कॉलोनियों व मोहल्ले में खंभे लगाने के लिए विद्युत निगम की तरफ से कनेक्शन के लोड के हिसाब से शुल्क की मांग की जाती है। इसके चलते भी ऐसी कॉलोनियाें में खंभे नहीं लग पा रहे हैं।
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शहर की बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए वर्ष 2024-25 में 84.20 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 236 जगहों पर खंभों व जर्जर ताराें को ठीक कराया गया। वर्ष 2025-26 में 86.46 करोड़ रुपये से विभिन्न उपकेंद्रों पर कार्य कराए गए। रिवैंप योजना के तहत 134 जगहों पर जर्जर तारों व खंभों को बदलवाया गया।
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इसके बावजूद शाहदाना, सुभाषनगर, सेटेलाइट, कटरा चांद खां, सरदारनगर, कुतुबखाना, जगतपुर, किला, हरूनगला, कोहाड़ापीर आदि क्षेत्रों में बगैर खंभे के तार गलियों में लटकते देखे जा सकते हैं। यहां ये तार या तो घरों के बाहर लटक रहे हैं या फिर बास-बल्लियों के सहारे गुजर रहे हैं। घरों की दीवारों के सहारे गुजर रहे जर्जर तार कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकते हैं। स्थानीय लोग इन तारों को बदलवाने और सुरक्षित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग तो करते हैं, लेकिन विद्युत निगम इस पर ध्यान नहीं देता।
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शुल्क की मांग करते हैं जिम्मेदारऐसी कॉलोनियों व मोहल्ले में खंभे लगाने के लिए विद्युत निगम की तरफ से कनेक्शन के लोड के हिसाब से शुल्क की मांग की जाती है। इसके चलते भी ऐसी कॉलोनियाें में खंभे नहीं लग पा रहे हैं।