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..... तो फिर से आबाद होगा आईटीआर
बरेली
Updated Thu, 14 Jan 2016 01:45 AM IST
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बरेली। इंडियन टरपन टाइन एंड रेजिन (आईटीआर) फैक्ट्री शुरू करने की एक बार फिर कवायद शुरू हो गई है। शासन के निर्देश पर कमिश्नर प्रमांशु कुमार ने बुधवार की शाम प्रशासनिक और उद्योग विभाग की टीम के साथ फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण किया और इसकी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश अपर आयुक्त (प्रशासन) और अपर आयुक्त (उद्योग) को दिए हैं। जिसे बाद में शासन को भेजा जाएगा।
शासन की मंशा है कि आईटीआर फिर से आबाद हो ताकि बरेली और आसपास के लोगों को रोजगार मिल सके। बुधवार को कमिश्नर के साथ अपर आयुक्त (प्रशासन) प्रभात शर्मा, अपर आयुक्त (उद्योग)एम अफजल, सिटी मजिस्ट्रेट उमेश मंगला आदि ने करीब डेढ़ तक परिसर का दौरा कर जानकारियां जुटाई ।
50 करोड़ की है देनदारी
सीबीगंज स्थित राज्य सरकार के उपक्रम आईटीआर में 2004 में तालाबंदी हो गई थी। इसके बाद राजनीतिक स्तर पर कई बार चालू कराने के प्रयास हुए लेकिन ज्यादा देनदारियों का तर्क देने के कारण यह फैक्ट्री चालू नहीं हो पाई। इसका काफी हिस्सा बीडीए ने खरीद लिया और कालोनी विकसित कर दी। आम्रपाली माल, मल्टीप्लेक्स होटल, बिजलीघर आदि इसी जमीन पर बने है। इस जमीन को बेचकर कर्मचारियों का वीआरएस निपटाया गया था। इसके बावजूद बिजली, वाणिज्यकर सेंट्रल एक्साइज, कुछ कर्मचारियों का भुगतान, कच्चा माल लीसा तथा अन्य सरकारी देय की देनदारी अभी भी बने हुए हैं। जो कि करीब 50 करोड़ रुपया बताया जाता है। फैक्ट्री का एल्कोहल प्लांट बिक चुका है। फैक्ट्री परिसर में पुराना रेजिन और टरपन टाइन प्लांट अभी मौजूद हैं।
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ये हैं बाधाएं
फैक्ट्री का विवाद बोर्ड आफ इंडस्ट्रियल एंड फाइनेंसिंयल रिकंस्ट्रक्शन (बाइफर) में लंबित है। जिसके निस्तारण के बाद ही देनदारियों का निपटारा करना होगा। कच्चा माल लीसा उत्तराखंड से आता है लेकिन वहां पर अब जंगल से लीसा निकालने पर रोक है। साथ ही पुरानी मशीनरी को अपडेट आदि पर काफी धनराशि खर्च करनी होगी।
इन्फो
उत्पादन बंद 2002
वीआरएस प्रक्रिया 2002 से शुरू
तालाबंदी 2004
देनदारियां करीब 50 करोड़ (सरकारी देय में ऋण और बिजली बिल बकाया भी शामिल)
ये उत्पादन होता था
शीरे से स्प्रिट, लीसा से बिरोजा, तारपीन का तेल तथा अन्य केमिकल
मौजूदा स्थिति
टरपन टाइन और बिरोजा, मशीनरी आदि 13 साल से बंद।
इन दिनों सुपीरियर कंपनी किराए पर शराब उत्पादन कर रही है।
‘13 साल बाद आईटीआर चालू करने की कवायद की खबर सुखद है। फैक्ट्री चालू होने से लोगों को रोजगार मिलेगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।’ केबी अग्रवाल, तत्कालीन फैक्ट्री प्रबंधक
‘फैक्ट्री चलाना आसान नहीं है फिर भी तमाम बाधाएं दूर कर इसे चलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। आईटीआर शुरू होने से बरेली मंडल को लाभ मिलेगा।’ प्रमांशु कुमार, कमिश्नर
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शासन की मंशा है कि आईटीआर फिर से आबाद हो ताकि बरेली और आसपास के लोगों को रोजगार मिल सके। बुधवार को कमिश्नर के साथ अपर आयुक्त (प्रशासन) प्रभात शर्मा, अपर आयुक्त (उद्योग)एम अफजल, सिटी मजिस्ट्रेट उमेश मंगला आदि ने करीब डेढ़ तक परिसर का दौरा कर जानकारियां जुटाई ।
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50 करोड़ की है देनदारी
सीबीगंज स्थित राज्य सरकार के उपक्रम आईटीआर में 2004 में तालाबंदी हो गई थी। इसके बाद राजनीतिक स्तर पर कई बार चालू कराने के प्रयास हुए लेकिन ज्यादा देनदारियों का तर्क देने के कारण यह फैक्ट्री चालू नहीं हो पाई। इसका काफी हिस्सा बीडीए ने खरीद लिया और कालोनी विकसित कर दी। आम्रपाली माल, मल्टीप्लेक्स होटल, बिजलीघर आदि इसी जमीन पर बने है। इस जमीन को बेचकर कर्मचारियों का वीआरएस निपटाया गया था। इसके बावजूद बिजली, वाणिज्यकर सेंट्रल एक्साइज, कुछ कर्मचारियों का भुगतान, कच्चा माल लीसा तथा अन्य सरकारी देय की देनदारी अभी भी बने हुए हैं। जो कि करीब 50 करोड़ रुपया बताया जाता है। फैक्ट्री का एल्कोहल प्लांट बिक चुका है। फैक्ट्री परिसर में पुराना रेजिन और टरपन टाइन प्लांट अभी मौजूद हैं।
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ये हैं बाधाएं
फैक्ट्री का विवाद बोर्ड आफ इंडस्ट्रियल एंड फाइनेंसिंयल रिकंस्ट्रक्शन (बाइफर) में लंबित है। जिसके निस्तारण के बाद ही देनदारियों का निपटारा करना होगा। कच्चा माल लीसा उत्तराखंड से आता है लेकिन वहां पर अब जंगल से लीसा निकालने पर रोक है। साथ ही पुरानी मशीनरी को अपडेट आदि पर काफी धनराशि खर्च करनी होगी।
इन्फो
उत्पादन बंद 2002
वीआरएस प्रक्रिया 2002 से शुरू
तालाबंदी 2004
देनदारियां करीब 50 करोड़ (सरकारी देय में ऋण और बिजली बिल बकाया भी शामिल)
ये उत्पादन होता था
शीरे से स्प्रिट, लीसा से बिरोजा, तारपीन का तेल तथा अन्य केमिकल
मौजूदा स्थिति
टरपन टाइन और बिरोजा, मशीनरी आदि 13 साल से बंद।
इन दिनों सुपीरियर कंपनी किराए पर शराब उत्पादन कर रही है।
‘13 साल बाद आईटीआर चालू करने की कवायद की खबर सुखद है। फैक्ट्री चालू होने से लोगों को रोजगार मिलेगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।’ केबी अग्रवाल, तत्कालीन फैक्ट्री प्रबंधक
‘फैक्ट्री चलाना आसान नहीं है फिर भी तमाम बाधाएं दूर कर इसे चलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। आईटीआर शुरू होने से बरेली मंडल को लाभ मिलेगा।’ प्रमांशु कुमार, कमिश्नर