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उत्तरांचल के जंगल की ओर बढ़ रहे हाथी, पश्चिम बंगाल से सात और हांका बुलाए
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बरेली। नेपाल से यहां आए दोनों नर हाथियों को वापस उनके प्राकृतिक वास की ओर ले जाने में ‘गंगाकली’ लीद की गंध और पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ से पहुंची हांका टीम एक हद तक ही काम आ रही है। रात भर चलकर दोनों हाथी गंगाकली व उसकी सहेलियों की लीद की गंध के सहारे शनिवार सुबह रामपुर जिले के रजपुरा गांव के गन्ने व धान के खेतों में पहुंच गए। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। अभियान का नेतृत्व कर रहे झांसी के मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने बताया कि दोनों हाथी उत्तराखंड के जंगल की तरफ बढ़ रहे हैं। पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ की हांका टीम बेहतर ढंग से काम कर रही है। पश्चिम बंगाल से हांका टीम के सात और सदस्य बुलाए गए हैं। वह रविवार शाम तक बरेली पहुंच जाएंगे।
नेपाल के जंगल से 24 जून को बाहर निकलकर पहुंचे ये हाथी पीलीभीत, उत्तराखंड, बरेली व रामपुर जिले के क्षेत्रों में चहलकदमी कर ग्रामीणों के गन्ने व धान की फसल बर्बाद कर रहे हैं। शुक्रवार शाम होते ही ये हाथी रामपुर की ओर आगे बढ़ गए थे। शनिवार सुबह दोनों हाथी रामपुर जिले के रजपुरा गांव में गन्ने व धान के खेतों में पहुंच गए। सूचना पर सुबह अभियान का नेतृत्व कर रहे मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह भी वनकर्मियों, पीएसी के जवान और हांका टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। हाथी गांव की ओर न पहुंचे इसके लिए हांका टीम ने अपना मोर्चा वहां संभाल लिया है। पीपी सिंह ने बताया कि हाथियों को वापस जंगल भेजने के लिए दुधवा से सहेलियों के साथ पहुंची मादा हाथी गंगाकली की लीद की गंध और पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ की हांका टीम काम आ रही है। पश्चिम बंगाल से हांका टीम के सात और सदस्य बुलाए गए हैं, जो रविवार शाम तक बरेली पहुंच जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि हाथी रामपुर में जिस स्थान पर हैं वहां से उत्तरांचल का चोरगलिया, जिम कार्बेट, सुरई व पीलीभीत का महोफ जंगल औसतन 60 किमी के दायरे में है। वन विभाग का कहना हाथियों का रुख जिधर अधिक हो जाएगा हांका टीम का प्रयास होगा कि उधर ही उन्हें आगे बढ़ा दे। बारिश होने व गन्ने की चारों ओर लहलहाती फसल होने के कारण हाथियों को अब तक जहां पहुंच रहे हैं वहां भरपूर भोजन-पानी मिल रहा है। इसलिए वह जंगल की ओर तो बढ़ रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे। पीपी सिंह ने बताया कि उम्मीद है कि दोनों हाथियों को चार से पांच दिन के भीतर किसी भी जंगल में पहुंचाने में कामयाबी मिल सकती है।
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नेपाल के जंगल से 24 जून को बाहर निकलकर पहुंचे ये हाथी पीलीभीत, उत्तराखंड, बरेली व रामपुर जिले के क्षेत्रों में चहलकदमी कर ग्रामीणों के गन्ने व धान की फसल बर्बाद कर रहे हैं। शुक्रवार शाम होते ही ये हाथी रामपुर की ओर आगे बढ़ गए थे। शनिवार सुबह दोनों हाथी रामपुर जिले के रजपुरा गांव में गन्ने व धान के खेतों में पहुंच गए। सूचना पर सुबह अभियान का नेतृत्व कर रहे मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह भी वनकर्मियों, पीएसी के जवान और हांका टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। हाथी गांव की ओर न पहुंचे इसके लिए हांका टीम ने अपना मोर्चा वहां संभाल लिया है। पीपी सिंह ने बताया कि हाथियों को वापस जंगल भेजने के लिए दुधवा से सहेलियों के साथ पहुंची मादा हाथी गंगाकली की लीद की गंध और पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ की हांका टीम काम आ रही है। पश्चिम बंगाल से हांका टीम के सात और सदस्य बुलाए गए हैं, जो रविवार शाम तक बरेली पहुंच जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि हाथी रामपुर में जिस स्थान पर हैं वहां से उत्तरांचल का चोरगलिया, जिम कार्बेट, सुरई व पीलीभीत का महोफ जंगल औसतन 60 किमी के दायरे में है। वन विभाग का कहना हाथियों का रुख जिधर अधिक हो जाएगा हांका टीम का प्रयास होगा कि उधर ही उन्हें आगे बढ़ा दे। बारिश होने व गन्ने की चारों ओर लहलहाती फसल होने के कारण हाथियों को अब तक जहां पहुंच रहे हैं वहां भरपूर भोजन-पानी मिल रहा है। इसलिए वह जंगल की ओर तो बढ़ रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे। पीपी सिंह ने बताया कि उम्मीद है कि दोनों हाथियों को चार से पांच दिन के भीतर किसी भी जंगल में पहुंचाने में कामयाबी मिल सकती है।
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